नोखा में जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन, कार्यशाला में समझाया महत्व
जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन मनाने का संदेश, नोखा में कार्यशाला के दौरान पारिवारिक और धार्मिक संस्कारों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन
नोखा(बीकानेर), राजस्थान। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद् नोखा की ओर से 23 अगस्त 2026 को तेरापंथ भवन में जैन संस्कार विधि से रक्षाबंधन मनाने को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम तेरापंथ युवक परिषद् के सेवा, संस्कार और संगठन के त्रि आयाम में संस्कार आयाम के तहत हुआ। इसका उद्देश्य पारिवारिक और धार्मिक संस्कारों को मजबूत करना रहा। कार्यशाला में परिषद् सदस्यों, महिला मंडल, ज्ञानशाला और श्रावक समाज ने सहभागिता निभाई।
रक्षाबंधन की जैन विधि
कार्यक्रम का शुभारंभ जैन संस्कारकों गोपाल लूणावत, हंसराज भूरा और निर्मल चोपड़ा ने जैन संस्कार विधि के अनुसार रक्षाबंधन कार्यशाला कराकर किया। इस दौरान रक्षाबंधन पर्व को धार्मिक और पारिवारिक संस्कारों से जोड़कर मनाने की जानकारी दी गई। उपासक एवं संस्कारक राजेन्द्र सेठिया ने विशेष उद्बोधन दिया। उपासक धीरेन्द्र बोथरा ने जैन संस्कारों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कार व्यक्ति के व्यवहार और पारिवारिक जीवन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जैन संस्कारक गोपाल लूणावत ने रक्षाबंधन के संदर्भ में जैन कहानी के माध्यम से पर्व का महत्व विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि धार्मिक परंपराओं को सरल और सार्थक तरीके से परिवार तक पहुंचाने से बच्चों और युवाओं में संस्कारों के प्रति रुचि बढ़ सकती है। जैन संस्कारक हंसराज भूरा ने रक्षाबंधन को जैन संस्कार विधि से मनाने की प्रक्रिया की विशेष जानकारी दी। कार्यशाला के दौरान उपस्थित लोगों को पर्व की परंपरा के साथ उसके पीछे जुड़े धार्मिक और पारिवारिक भाव को समझने का अवसर मिला।
संस्कारों से जुड़ने का संदेश
कार्यक्रम में तेरापंथ युवक परिषद् नोखा के अध्यक्ष गजेन्द्र पारख, ज्ञानशाला प्रशिक्षिका राजकुमारी मरोठी, रेखा सेठिया, सरिता बैद और सोनू बोथरा सहित कई सदस्य मौजूद रहे। ज्ञानशाला प्रभारी महावीर नाहटा की भी विशेष उपस्थिति रही। कार्यशाला में महिला मंडल, ज्ञानशाला और श्रावक समाज के सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। आयोजन के दौरान रक्षाबंधन को केवल पारिवारिक पर्व के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक और नैतिक संस्कारों को मजबूत करने के अवसर के रूप में समझाने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के समापन पर अध्यक्ष गजेन्द्र पारख ने जैन संस्कारकों, श्रावक श्राविकाओं, महिला मंडल, ज्ञानशाला और सभी सहयोगी कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सभी की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया। परिषद् सदस्यों और समाज के सहयोग से कार्यशाला सुव्यवस्थित और संस्कारमय वातावरण में संपन्न हुई। आयोजकों के अनुसार ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से परिवारों और नई पीढ़ी को धार्मिक परंपराओं से जोड़ने तथा संस्कारों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट उपलब्ध कराए गए आयोजकीय तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक परंपराओं और जैन संस्कार विधि से जुड़े विचार आयोजकों एवं वक्ताओं के विचारों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत मान्यताएं व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।