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रेपो रेट बढ़ोतरी पर RBI के संकेत से बाजार में बढ़ी हलचल, जानें वजह

RBI के सख्त संकेतों से अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ोतरी की अटकलें तेज हैं। SBI Research ने महंगाई और मानसून को फैसले का अहम आधार बताया है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। महंगाई के बीच RBI के रुख में सख्ती के संकेत मिले हैं और अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है। SBI Research की रिपोर्ट के मुताबिक RBI के मौद्रिक नीति संबंधी अलग अलग बयानों में साफ अंतर दिख रहा है। MPC की बैठक के विवरण में महंगाई के जोखिम और आगे दरें बढ़ाने की संभावना पर ज्यादा जोर है, जबकि Governor Sanjay Malhotra का रुख ज्यादा सावधान है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसी अंतर ने बाजार के सामने अगली नीति को लेकर नई उलझन खड़ी कर दी है। [1]

बयानों में बड़ा फर्क

SBI Research के Group Chief Economic Adviser Dr Soumya Kanti Ghosh के मुताबिक एक ही संस्था से जारी मौद्रिक नीति बयान, Governor का बयान और MPC के बैठक विवरण अलग अलग संकेत दे रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि Governor के बयान को 1 मानने पर MPC के बैठक विवरण का सख्ती वाला रुख June 2026 में 1.76 था, जो August 2026 में बढ़कर 1.82 हो गया। यानी बैठक विवरण में महंगाई और भविष्य में दरों को सख्त करने के जोखिम को पहले से ज्यादा महत्व दिया गया है।

फिलहाल RBI ने August 2026 की बैठक में repo rate को 5.25 प्रतिशत पर ही रखा और नीति का रुख तटस्थ बनाए रखा। सभी 6 सदस्यों ने दर को यथावत रखने के पक्ष में मतदान किया। इसके बावजूद बैठक विवरण में महंगाई बढ़ने की स्थिति में आगे सख्त कदम उठाने की गुंजाइश दिखाई गई है। यही वजह है कि बाजार अब अक्टूबर की बैठक को लेकर ज्यादा सतर्क है। SBI Research का मानना है कि रेपो रेट बढ़ोतरी का रास्ता खुल चुका है, लेकिन फैसला अभी कई आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा।

महंगाई और मानसून

SBI Research के मुताबिक ब्याज दरों पर फैसला केवल घरेलू महंगाई से तय नहीं होगा। अमेरिका की अर्थव्यवस्था उपभोक्ता खर्च और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश के कारण मजबूत बनी हुई है, लेकिन वहां कुछ बड़े नकारात्मक जोखिम भी मौजूद हैं। भारत में मानसून की चाल असमान और अनिश्चित रही है। इसका असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में RBI को आर्थिक वृद्धि और महंगाई दोनों के बीच संतुलन बनाना होगा। यही संतुलन आगे की मौद्रिक नीति का सबसे अहम आधार बन सकता है।

अब बाजार की नजर इस बात पर है कि आने वाले महीनों में महंगाई कितनी बढ़ती है और मानसून का असर कीमतों पर कितना पड़ता है। RBI के बैठक विवरण में भविष्य में दर बढ़ाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है, लेकिन Governor ने किसी फैसले से पहले आंकड़ों और महंगाई की दिशा को और समझने पर जोर दिया है। इसलिए रेपो रेट बढ़ोतरी अभी तय फैसला नहीं है। फिलहाल संकेत इतना जरूर दे रहे हैं कि महंगाई का दबाव बढ़ा तो RBI के सामने दर बढ़ाने का विकल्प खुला रहेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। RBI की ब्याज दरों से जुड़ा संभावित फैसला भविष्य की महंगाई, मानसून और अन्य आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief