डिजिटल अरेस्ट का बड़ा खुलासा, 63 लाख की ठगी में 12 आरोपी गिरफ्तार
डिजिटल अरेस्ट का बड़ा खुलासा, देवास पुलिस ने 63 लाख की ठगी में 12 आरोपियों को पकड़ा और 54 लाख से ज्यादा की रकम बरामद की है।
प्रतीकात्मक फोटो - Rex TV India
देवास, मध्य प्रदेश। डिजिटल अरेस्ट का बड़ा खुलासा करते हुए देवास पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। एक सेवानिवृत्त फैक्ट्री कर्मचारी से करीब 63 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने 12 संदिग्ध साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को दूरसंचार विभाग, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई का अधिकारी बताकर पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाया था। पुलिस के अनुसार, जांच 127 दिनों तक चली और 17 राज्यों के 33 जिलों तक पहुंची। [1]
आठ दिन तक डराते रहे
डिजिटल अरेस्ट का खुलासा जिस शिकायत से हुआ, उसमें पीड़ित ने बताया कि मार्च 2026 में उसे फोन और वीडियो कॉल आने लगे। कॉल करने वालों ने खुद को सरकारी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताया और कहा कि उसका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सामने आया है। आरोपियों ने करीब 8 दिनों तक उसे डर और दबाव में रखा। इस दौरान उससे बैंक खातों और निवेश से जुड़ी जानकारी ली गई और जांच के नाम पर अलग अलग खातों में रकम भेजने के लिए कहा गया। पीड़ित ने बाद में साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की।
शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, बैंक स्टेटमेंट, लेनदेन तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की। पुलिस ने रकम के एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचने वाली कड़ियों को जोड़ते हुए संदिग्ध लोगों की पहचान की। इसके बाद अलग अलग राज्यों में दबिश देने के लिए टीमें भेजी गईं। पुलिस के मुताबिक, 19 टीमों में 70 पुलिसकर्मी शामिल थे और उन्होंने करीब 58,315 किलोमीटर की दूरी तय की। कार्रवाई के दौरान राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में जांच आगे बढ़ी।
17 राज्यों तक पहुंचा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट का खुलासा करने वाली इस कार्रवाई में 17 राज्यों के 33 जिलों में दबिश दी गई। 127 दिनों तक चले अभियान के बाद 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत अलग अलग राज्यों से जुड़े संदिग्ध शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों से 54,84,725 रुपये की रकम बरामद करने का दावा किया है। बरामद रकम को कथित ठगी से जुड़ा बताया गया है और इसके स्रोत तथा नेटवर्क में इस्तेमाल की गई भूमिका की जांच जारी है।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में से 11 को जेल भेज दिया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल के एक आरोपी से पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान बैंकिंग लेनदेन और तकनीकी निगरानी से पुलिस को नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद मिली। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में ठग अलग अलग खातों का इस्तेमाल करके रकम को तेजी से इधर उधर भेजते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हैं तथा ठगी की रकम का पूरा प्रवाह कहां तक पहुंचा।
ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं
डिजिटल अरेस्ट को लेकर देवास पुलिस ने लोगों को खास तौर पर सतर्क किया है। पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। कोई भी पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी फोन अथवा वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर किसी व्यक्ति से जुर्माने या जांच के नाम पर पैसे जमा कराने के लिए नहीं कहती। अनजान कॉल पर बैंक खाते, निवेश, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करना जरूरी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट उपलब्ध पुलिस जानकारी और विश्वस्त समाचार स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा और किसी आरोपी को दोषी सिद्ध होने तक निर्दोष माना जाता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।