NGT का सख्त आदेश, बिना PUC सरकारी वाहन भी सड़क पर नहीं चलेंगे
NGT का सख्त आदेश, दिल्ली में बिना PUC सरकारी वाहन नहीं चलेंगे। 12,399 वाहनों का प्रमाणपत्र खत्म मिला, उल्लंघन पर कार्रवाई के निर्देश।
प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। NGT का सख्त आदेश दिल्ली में सरकारी वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र को लेकर आया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने साफ कहा है कि वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना कोई सरकारी या सरकारी काम में लगाया गया किराये का वाहन सड़क पर नहीं चलना चाहिए। मामला विधायक जितेंद्र महाजन की याचिका से जुड़ा था। उन्होंने सरकारी वाहनों पर प्रदूषण नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए थे। अधिकरण ने संबंधित विभागों को नियमों का जमीन पर गंभीरता से पालन कराने और उल्लंघन मिलने पर जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। [1]
PUC पर सख्ती
दिल्ली सरकार की ओर से अधिकरण के सामने रखे गए आंकड़ों के मुताबिक 19 जून 2025 तक 30,995 पेट्रोल, डीजल और सीएनजी सरकारी वाहन दर्ज थे। इनमें 14,569 वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र था, जबकि 12,399 वाहनों का प्रमाणपत्र खत्म हो चुका था। इसके अलावा 4,027 वाहनों के प्रमाणपत्र से जुड़ा आंकड़ा उपलब्ध नहीं था। NGT का सख्त आदेश ऐसे वाहनों के संचालन पर रोक और नियमों के पालन को गंभीरता से सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
परिवहन विभाग ने बताया कि कैमरा आधारित चालान व्यवस्था सरकारी और निजी वाहनों में कोई भेद नहीं करती। स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरों की मदद से बिना वैध प्रमाणपत्र वाले वाहनों की पहचान की जाती है और चालान की प्रक्रिया शुरू होती है। विभाग के मुताबिक 1,360 सरकारी वाहनों के चालान किए गए थे जिनके प्रमाणपत्र खत्म हो चुके थे। अधिकरण ने कहा कि बिना वैध प्रमाणपत्र सड़क पर पाए जाने वाले सरकारी वाहनों के खिलाफ सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी करने वाली व्यवस्था की निगरानी भी की जा रही है। परिवहन विभाग के अनुसार राजधानी में करीब 950 अधिकृत प्रमाणपत्र केंद्र हैं। मई 2023 से मई 2025 के बीच इन केंद्रों के 2,050 निरीक्षण किए गए। इस दौरान 274 सलाह, 76 कारण बताओ नोटिस और 146 चेतावनियां जारी की गईं। 17 केंद्रों का संचालन बंद या निलंबित भी किया गया। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि सरकार वाहनों के साथ साथ प्रमाणपत्र जारी करने वाली व्यवस्था पर भी निगरानी बढ़ा रही है।
NGT का सख्त आदेश इस बात पर जोर देता है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियम सरकारी और निजी वाहनों के लिए अलग नहीं हो सकते। याचिकाकर्ता जितेंद्र महाजन ने भी यही सवाल उठाया था कि जब आम वाहन चालकों पर बिना प्रमाणपत्र वाहन चलाने पर कार्रवाई होती है तो सरकारी वाहनों को अलग छूट क्यों मिले। अधिकरण ने दिल्ली सरकार को सरकारी और सरकारी काम में इस्तेमाल होने वाले किराये के वाहनों पर भी नियमों का कड़ाई से पालन कराने को कहा है। अब बिना वैध प्रमाणपत्र चलने वाले वाहनों पर कार्रवाई संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण, दिल्ली सरकार और विश्वस्त समाचार स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र से जुड़े आंकड़े संबंधित विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं और समय के साथ इनमें बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।