वर्षों की साधना से तैयार पुस्तक का विमोचन, समारोह में लेखक का सम्मान
बीकानेर में ज्योतिषविद् श्रीराम बिस्सा की वर्षों की साधना और अनुभव पर आधारित पुस्तक का विमोचन हुआ, विद्वानों ने इसे उपयोगी कृति बताया।
पुस्तक का विमोचन
बीकानेर, राजस्थान। नवकिरण सृजन मंच के तत्वावधान में ज्योतिषविद् एवं साधक श्रीराम बिस्सा की पुस्तक का विमोचन हुआ। समारोह में लेखक का सम्मान भी किया गया। पुस्तक का संपादन डॉ. पुनीत जोशी ने किया है। कार्यक्रम में साहित्यकारों, ज्योतिषविदों, अध्यात्म प्रेमियों और गणमान्य नागरिकों ने हिस्सा लिया। पुस्तक वर्षों के अध्ययन, चिंतन और अनुभव से तैयार लेखों का संग्रह है। पुस्तक विमोचन के मौके पर वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्योतिष और अध्यात्म की भूमिका पर चर्चा की और इसे जिज्ञासु पाठकों के लिए उपयोगी बताया।
चिंतनशील प्रस्तुति
समारोह की अध्यक्षता विद्वान ज्योतिष एवं भागवताचार्य डॉ. गोपाल नारायण व्यास ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. अजय जोशी रहे। पुस्तक का विमोचन करते हुए डॉ. व्यास ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ज्योतिष और अध्यात्म का लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उन्होंने कहा कि श्रीराम बिस्सा ने अपने अध्ययन और अनुभव को सरल तथा चिंतनशील रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की है। उनके अनुसार यह कृति उन पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है जो ज्योतिष और अध्यात्म को समझने में रुचि रखते हैं और इन विषयों को व्यापक नजरिए से देखना चाहते हैं।
डॉ. अजय जोशी ने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्योतिष जीवन, कर्म और समय को समझने की एक महत्वपूर्ण दृष्टि है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास प्राचीन ज्ञान को आज के पाठकों तक सहज भाषा में पहुंचाने में मदद करते हैं। पुस्तक के संपादक डॉ. पुनीत जोशी ने इसे केवल लेखों का संकलन मानने से आगे की कृति बताया। उन्होंने कहा कि इसमें श्रीराम बिस्सा के वर्षों के अध्ययन, अनुभव, चिंतन और ज्योतिष साधना की यात्रा दिखाई देती है। इससे पुस्तक की विषयवस्तु को व्यक्तिगत अनुभव और अध्ययन से जुड़ा स्वरूप मिलता है।
किताब का मकसद
लेखक श्रीराम बिस्सा ने कहा कि लंबे समय तक अध्ययन, मनन और अनुभव के दौरान उन्होंने जो सीखा और समझा, उसे लेखों के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्होंने अपने ज्योतिषीय अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारतीय ज्योतिष परंपरा बहुत व्यापक और गहरी है। उनके अनुसार इसके कई पहलू आज भी अध्ययन और अनुसंधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पुस्तक का विमोचन होने पर उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन के लिए नवकिरण सृजन मंच, संपादक डॉ. पुनीत जोशी और सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया। पुस्तक विमोचन इसी प्रयास को पाठकों के सामने लाने का अवसर बना।
कार्यक्रम में गिरिराज व्यास ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े ऐसे लेख आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री बन सकते हैं। कौशल व्यास ने पुस्तक के प्रकाशन पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि श्रीराम बिस्सा का दीर्घकालीन अध्ययन और अनुभव संग्रह में सहज रूप से दिखाई देता है। महेश कुमार व्यास ने भी इसे ज्योतिष और अध्यात्म के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय व्यास ने किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों और विद्वजनों का परिचय कराया तथा पुस्तक के साहित्यिक और ज्योतिषीय पक्ष पर प्रकाश डाला। शुभारंभ अरुण व्यास द्वारा विधिवत् रुद्राभिषेक से हुआ।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पुस्तक में व्यक्त ज्योतिष और अध्यात्म संबंधी विचार लेखक एवं वक्ताओं के विचार हैं, इन्हें प्रमाणित वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।