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परीक्षा में फर्जीवाड़ा, IBPS पेपर में सॉल्वर गैंग के 4 लोग गिरफ्तार

कानपुर में IBPS परीक्षा में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। UP STF और सचेेंडी पुलिस ने 4 लोगों को पकड़ा, फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र और सॉल्वर नेटवर्क की जांच तेज हुई।

By अजय त्यागी
1 min read
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

कानपुर, उत्तर प्रदेश। परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में UP STF और सचेेंडी पुलिस ने IBPS प्रोबेशनरी ऑफिसर और मैनेजमेंट ट्रेनी प्रारंभिक परीक्षा के दौरान 4 लोगों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई 22 अगस्त को भैलामऊ स्थित परीक्षा केंद्र पर हुई। पुलिस के मुताबिक आरोपी कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के सहारे पात्रता हासिल कर रहे थे और उनकी जगह या उनके साथ सॉल्वर के जरिए परीक्षा पास कराने की कोशिश की जा रही थी। मामले में अवनीश यादव, आशीष कुमार, राहुल कुमार सिन्हा और अंकित सचान को पकड़ा गया। [1]

फर्जी प्रमाणपत्र का खेल

पुलिस के अनुसार परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने के लिए अवनीश यादव की जगह आशीष कुमार परीक्षा केंद्र पर पहुंचा था, जबकि राहुल कुमार सिन्हा एक महिला अभ्यर्थी के लेखक सहायक के रूप में मौजूद था। पूछताछ के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पुलिस और STF ने चारों को हिरासत में लिया। जांच में आरोप है कि अवनीश ने 2025 में करीब 1 लाख रुपये देकर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया था। पुलिस ने उसके मोबाइल से कथित भुगतान और बातचीत से जुड़े साक्ष्य भी मिलने की बात कही है।

जांच में यह भी सामने आया कि अवनीश ने इससे पहले 2 परीक्षाओं में लेखक या सॉल्वर की मदद लेने की बात कही है। 22 अगस्त की परीक्षा के लिए आशीष कुमार को कथित तौर पर 30,000 रुपये परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने के लिए देने की सहमति बनी थी। पुलिस ने मोबाइल से परीक्षा संबंधी बातचीत और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड मिलने की बात कही है। वहीं जांच में अंकित सचान की भूमिका भी सामने आई है, जो ग्रामीण बैंक में रिकवरी मैनेजर बताया गया है। उसके खिलाफ भी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े की जांच की जा रही है।

सॉल्वर नेटवर्क की जांच

पुलिस के मुताबिक अंकित ने अपनी महिला परिचित के लिए कथित तौर पर 2024 में करीब 65,000 रुपये देकर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाया था। इसके बाद 22 अगस्त की परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए कथित तौर पर 10 लाख रुपये का सौदा तय हुआ। जांचकर्ताओं के अनुसार 21 और 22 अगस्त को 10,000 रुपये की 2 अग्रिम रकम ऑनलाइन भेजी गई। राहुल ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि दिल्ली में रहते हुए उसका संपर्क ऐसे लोगों से हुआ जो फर्जी प्रमाणपत्र वाले अभ्यर्थियों के लिए लेखक सहायक उपलब्ध कराते थे।

जांच के दौरान मोबाइल फोन और आईपैड से कई प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, लेखक सहायक फॉर्म, कथित फर्जी प्रमाणपत्र और पैसों के लेनदेन से जुड़ी बातचीत मिलने की बात सामने आई है। पुलिस ने इस नेटवर्क में शमशेर उर्फ शीलू सचान, मनोज कुमार यादव, सुरजीत कुमार, मनोरंजन, राजू गुप्ता, मनीष कुमार मिश्रा और राहुल यादव समेत कई नाम सामने आने की जानकारी दी है। अब STF कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की तलाश कर रही है और यह भी जांच रही है कि इससे पहले कितनी परीक्षाओं में इसी तरीके का इस्तेमाल हुआ।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट पुलिस और जांच एजेंसियों से संबंधित उपलब्ध तथ्यों तथा विश्वस्त समाचार स्रोतों पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम न्यायालय में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के अधीन है और किसी आरोपी को दोषी तब तक नहीं माना जा सकता जब तक अदालत में आरोप सिद्ध न हो जाएं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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