WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

ईद-ए-मिलाद आज, मस्जिदों से गलियों तक दिखेगा इबादत और सेवा का रंग

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी आज देशभर में मनाई जा रही है। जामा मस्जिद से लेकर देशभर में दुआ, नात, जुलूस और सेवा के आयोजन हो रहे हैं।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

ईद-ए-मिलाद आज देशभर में मनाई जा रही है। इसे ईद-ए-मिलाद-उन-नबी भी कहा जाता है और यह पैगंबर मुहम्मद के जन्म की याद से जुड़ा अवसर है। आज 26 अगस्त 2026 को मस्जिदों और कई इलाकों में दुआ नात धार्मिक कार्यक्रम और सामुदायिक गतिविधियां हो रही हैं। दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद भी इस अवसर से जुड़े प्रमुख स्थलों में शामिल है। भारत सरकार की अवकाश सूची में भी आज मिलाद-उन-नबी या ईद-ए-मिलाद दर्ज है। [1]

जामा मस्जिद में मिलाद

भारत की राजधानी की ऐतिहासिक जामा मस्जिद आज ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के संदर्भ में खास आकर्षण का केंद्र है। भारत के आधिकारिक पर्यटन पोर्टल के मुताबिक जामा मस्जिद दिल्ली उन प्रमुख स्थानों में शामिल है जहां ईद-ए-मिलाद से जुड़े आयोजन देखे जा सकते हैं। पोर्टल पर इस अवसर की अवधि 25 अगस्त की शाम से 26 अगस्त 2026 तक बताई गई है। मस्जिद और आसपास के इलाकों में धार्मिक माहौल के साथ सजावट और सामुदायिक गतिविधियों की परंपरा भी देखने को मिलती है।

ईद-ए-मिलाद के मौके पर देश के कई हिस्सों में मस्जिदों और मोहल्लों को रोशनी तथा झंडों से सजाया जाता है। कई जगह जुलूस निकाले जाते हैं और नात पढ़ी जाती है। मस्जिदों में पैगंबर मुहम्मद के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर विद्वानों के कार्यक्रम होते हैं। हालांकि हर जगह आयोजन का तरीका एक जैसा नहीं होता। कुछ समुदाय बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम करते हैं जबकि कई परिवार घर पर दुआ और इबादत के जरिए दिन बिताते हैं। इस विविधता के बावजूद पैगंबर की शिक्षाओं को याद करना प्रमुख भाव रहता है।

दुआ के साथ सेवा

आज ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ जरूरतमंदों की मदद पर भी जोर दिया जा रहा है। कई समुदायों में भोजन और मिठाइयां बांटने की परंपरा है। स्थानीय संगठन जरूरतमंद परिवारों के लिए भोजन वितरण या अन्य सहायता अभियान चला सकते हैं। कुछ जगह रक्तदान और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रम भी होते हैं। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी इस अवसर पर शांति करुणा आपसी सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े संदेशों को प्रमुखता दी है। इससे सेवा और सद्भाव का पहलू सामने आता है।

ईद-ए-मिलाद के साथ खानपान की स्थानीय परंपराएं भी जुड़ी हैं। अलग अलग राज्यों और परिवारों में खास पकवान तैयार किए जाते हैं और रिश्तेदारों दोस्तों तथा पड़ोसियों के साथ साझा किए जाते हैं। कुछ मुस्लिम समुदायों में खीर और मीठे पकवान बनाए जाते हैं जबकि कुछ इलाकों में पारंपरिक मीठी पूरी जैसी चीजें भी तैयार की जाती हैं। हालांकि हर क्षेत्र में भोजन की परंपरा अलग हो सकती है। मिल बांटकर खाना इस अवसर के सामुदायिक जुड़ाव और आपसी रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम माना जाता है।

पैगंबर की सीख

ईद-ए-मिलाद-उन-नबी केवल जन्म की याद का अवसर नहीं बल्कि पैगंबर मुहम्मद के जीवन और शिक्षाओं पर विचार करने का समय भी माना जाता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 अगस्त को अपने संदेश में कहा कि यह अवसर पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाओं को याद करने का है और उनके आदर्श लोगों को अच्छे आचरण तथा कर्तव्यनिष्ठा के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में योगदान की कामना भी की।

आज ईद-ए-मिलाद अलग अलग मुस्लिम समुदायों में अपनी स्थानीय परंपराओं के अनुसार मनाई जा रही है। कहीं जुलूस और सामुदायिक कार्यक्रम हैं तो कहीं मस्जिदों में दुआ नात और धार्मिक चर्चा हो रही है। कई परिवार घर पर इबादत और जरूरतमंदों की मदद को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 26 अगस्त 2026 को मिलाद-उन-नबी या ईद-ए-मिलाद का अवकाश है। राजधानी की जामा मस्जिद से लेकर देश के अलग अलग इलाकों तक ईद-ए-मिलाद आज दुआ सेवा करुणा और सद्भाव के संदेश से जुड़ी दिखाई दे रही है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ईद-ए-मिलाद-उन-नबी से जुड़ी धार्मिक परंपराएं और आयोजन समुदाय तथा क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकते हैं और स्थानीय कार्यक्रमों में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief