ए के हंगल यानी शोले के रहिम चाचा को जैकी श्रॉफ ने किया याद
ए के हंगल की याद में जैकी श्रॉफ ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा कर दिग्गज अभिनेता को श्रद्धांजलि दी। रहिम चाचा से लेकर पद्म भूषण तक उनका सफर यादगार रहा।

दिग्गज चरित्र अभिनेता ए के हंगल
मुंबई, महाराष्ट्र। अभिनेता जैकी श्रॉफ ने दिग्गज चरित्र अभिनेता ए के हंगल को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर साझा की। जैकी ने पोस्ट में उन्हें याद किया और हाथ जोड़ने वाला इमोजी भी लगाया। ए के हंगल का असली नाम अवतार किशन हंगल था और उनका निधन 26 अगस्त 2012 को हुआ था। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, हंगल हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल रहे जिनके सहज और भावुक अभिनय ने कई पीढ़ियों के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। [1]
शोले के रहिम चाचा
ए के हंगल की याद आते ही सबसे पहले फिल्म शोले के रहिम चाचा का किरदार लोगों के जेहन में उभरता है। रामगढ़ के इमाम के रूप में उनका शांत और भावुक अंदाज आज भी याद किया जाता है। फिल्म में बेटे की मौत के बाद उनके किरदार का दर्द दर्शकों को भीतर तक छू गया था। उनका मशहूर संवाद इतन सन्नाटा क्यों है भाई हिंदी सिनेमा के यादगार संवादों में गिना जाता है। यही किरदार हंगल की पहचान का सबसे मजबूत हिस्सा बन गया।
लेकिन हंगल की पहचान सिर्फ शोले तक सीमित नहीं थी। उन्होंने बावरची नमक हराम गुड्डी अभिमान चितचोर आंधी कोरा कागज नरम गरम शौकीन अवतार अर्जुन और आईना जैसी फिल्मों में अलग अलग भूमिकाएं निभाईं। पिता चाचा पड़ोसी मजदूर और बुजुर्ग जैसे किरदारों में उनका अभिनय इतना सहज रहा कि दर्शकों को वे पर्दे के कलाकार से ज्यादा अपने आसपास के किसी परिचित व्यक्ति जैसे लगते थे। उनकी यही सादगी और गर्मजोशी उन्हें हिंदी फिल्मों का बेहद पसंदीदा चरित्र अभिनेता बनाती रही।
रंगमंच से फिल्मों तक
ए के हंगल का सफर फिल्मों से नहीं बल्कि रंगमंच और सामाजिक सक्रियता से शुरू हुआ था। उनका जन्म 1 फरवरी 1914 को सियालकोट में हुआ था। शुरुआती दौर में उन्होंने दर्जी का काम किया और स्वतंत्रता आंदोलन तथा मजदूर गतिविधियों से भी जुड़े रहे। विभाजन के बाद वे 1949 में मुंबई आए और इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन यानी IPTA से जुड़े। यहां उन्होंने बलराज साहनी और कैफी आजमी जैसे चर्चित रंगकर्मियों के साथ काम किया। रंगमंच ने उनके अभिनय को गहराई और सामाजिक संवेदना दी।
फिल्मी दुनिया में हंगल ने अपेक्षाकृत देर से कदम रखा। करीब 50 साल की उम्र में उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला और इसके बाद उनका करियर लगातार आगे बढ़ता गया। उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया और कई दशकों तक दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए रखी। उनकी खासियत यह थी कि वे छोटे से छोटे किरदार में भी भावनाओं की गहराई भर देते थे। इसी वजह से ए के हंगल की याद आज भी सिर्फ एक फिल्म या एक संवाद से नहीं बल्कि पूरे दौर की अभिनय परंपरा से जुड़ी हुई है।
पद्म भूषण सम्मान
लंबे फिल्मी सफर में ए के हंगल को कई यादगार भूमिकाओं के लिए सराहा गया और 2006 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके बाद भी उनकी जिंदगी का अंतिम दौर आसान नहीं रहा और आर्थिक परेशानियों की खबरें सामने आई थीं। फिल्म जगत के कई लोगों ने उनकी मदद के लिए आगे बढ़कर समर्थन दिया। इसके बावजूद अभिनय के प्रति उनका जुड़ाव बना रहा और उन्होंने जीवन के अंतिम वर्षों में भी कैमरे के सामने काम किया। उनका योगदान हिंदी सिनेमा की चरित्र भूमिकाओं की समृद्ध परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है।
ए के हंगल की याद
जैकी श्रॉफ का यह पोस्ट ऐसे समय आया है जब ए के हंगल के निधन को 14 साल हो चुके हैं। हालांकि दिए गए मूल विवरण में 28 अगस्त की तारीख लिखी गई है लेकिन उपलब्ध विश्वसनीय रिकॉर्ड के मुताबिक उनका निधन 26 अगस्त 2012 को मुंबई में हुआ था। इसलिए 2026 में उनकी 14वीं पुण्यतिथि 26 अगस्त को ही बनती है। जैकी श्रॉफ का यह छोटा सा संदेश एक ऐसे कलाकार को याद करने का मौका बन गया जिसने बिना बड़े स्टारडम के हिंदी सिनेमा में अपनी अमिट पहचान बनाई।
ए के हंगल की याद आज भी उनके किरदारों संवादों और अभिनय की सादगी में दिखाई देती है। शोले के रहिम चाचा से लेकर नमक हराम शौकीन और आईना तक उन्होंने हर भूमिका में आम आदमी की भावनाओं को पर्दे पर उतारा। जैकी श्रॉफ ने तस्वीर साझा कर जिस तरह उन्हें याद किया उससे एक बार फिर पुरानी हिंदी फिल्मों के इस बेहद सम्मानित कलाकार की चर्चा तेज हो गई। ए के हंगल की याद इसलिए भी खास है क्योंकि उनका अभिनय चमक दमक से ज्यादा इंसानी संवेदनाओं और सच्चाई के करीब रहा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। पुण्यतिथि की तारीख से जुड़े उपलब्ध स्रोतों में अंतर मिलने पर विश्वसनीय रिकॉर्ड के आधार पर 26 अगस्त 2012 को ए के हंगल के निधन की तारीख माना गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।