अमेरिका की बड़ी वापसी, मध्य पूर्व दूतावासों में फिर लौटेंगे कर्मचारी
अमेरिका की बड़ी वापसी: ट्रंप प्रशासन ने राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों को फिर भेजने की तैयारी शुरू की। यह ईरान से तनाव घटने का संकेत माना जा रहा है।
प्रतीकात्मक फोटो
वॉशिंगटन, अमेरिका। अमेरिका की बड़ी वापसी की तैयारी के बीच ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व के कुछ अमेरिकी राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों को वापस भेजना शुरू कर दिया है। ईरान के साथ तनाव के दौरान जिन मिशनों से कर्मचारी हटाए गए या उनकी संख्या घटाई गई थी वहां अब धीरे धीरे स्टाफ लौटेगा। Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार लेबनान, इजरायल, सऊदी अरब और इराक के बगदाद स्थित मिशन भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं। रियाद स्थित अमेरिकी मिशन में कर्मचारियों के परिवारों को भी लौटने की अनुमति दी जाएगी। [1]
दूतावासों में फिर हलचल
अमेरिकी अधिकारियों के इस कदम से संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन को निकट भविष्य में ईरान के साथ संघर्ष बढ़ने का खतरा पहले की तुलना में कम नजर आ रहा है। हालांकि सभी मिशन अभी पूरी क्षमता से काम नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक कुछ दूतावासों में शुरुआत में अधिकतम 85 प्रतिशत अधिकृत स्टाफ ही तैनात किया जाएगा। कुछ कर्मचारियों की वापसी इसी सप्ताह शुरू होने की उम्मीद है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि दुनिया भर के राजनयिक मिशनों की सुरक्षा स्थिति की लगातार समीक्षा की जाती है।
फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले शुरू होने के बाद अमेरिका ने मध्य पूर्व के कई दूतावासों से कर्मचारियों को हटाया था। इस दौरान खाड़ी क्षेत्र के कुछ अमेरिकी मिशनों पर ईरान की ओर से हमले भी हुए थे। कुवैत स्थित अमेरिकी मिशन को कुछ समय के लिए बंद तक करना पड़ा था। अब भारी लड़ाई में कमी आने के बाद वॉशिंगटन ने कुछ जगहों पर कर्मचारियों की मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है। इसे अमेरिका की बड़ी वापसी माना जा रहा है, हालांकि क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है।
सुरक्षा आकलन पर नजर
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक कर्मचारियों की संख्या में बदलाव सुरक्षा आकलन के आधार पर किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि इसका उद्देश्य अमेरिकी विदेश नीति से जुड़े काम को जारी रखना और साथ ही वहां तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस बदलाव से यह भी संकेत मिलता है कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी राजनयिक गतिविधियों को धीरे धीरे सामान्य करने की दिशा में बढ़ रहा है। हालांकि अलग अलग देशों में स्टाफ की संख्या सुरक्षा स्थिति के मुताबिक अलग रखी जाएगी।
न्यूयॉर्क टाइम्स की पहले की रिपोर्ट में भी राजनयिकों की वापसी और आपातकालीन उपायों में ढील की बात कही गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल, जॉर्डन और ओमान में अमेरिकी मिशन आगे चलकर पूरी स्टाफिंग पर लौट सकते हैं। वहीं संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और लेबनान में शुरुआती स्तर पर 85 प्रतिशत तक स्टाफ रखा जा सकता है। इराक, कुवैत और बहरीन में यह सीमा 75 प्रतिशत तक रहने की बात कही गई है। अमेरिका की बड़ी वापसी फिलहाल चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ती दिख रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मध्य पूर्व में सुरक्षा परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और अमेरिकी राजनयिक मिशनों में कर्मचारियों की तैनाती के स्तर में नए सुरक्षा आकलन के आधार पर बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।