जुलूस ए मोहम्मदी में उमड़ा सैलाब, अमन भाईचारे का दिया संदेश
जुलूस ए मोहम्मदी में हजारों आशिक ए रसूल शामिल हुए। नात सलाम और दरूद शरीफ के बीच निकले जुलूस का जगह जगह स्वागत हुआ और अमन भाईचारे का संदेश दिया गया।
जश्ने ईद मिलादुन्नबी
बीकानेर, राजस्थान। जश्ने ईद मिलादुन्नबी के मौके पर जुलूस ए मोहम्मदी शान ओ शौकत के साथ निकाला गया। हजारों की तादाद में आशिक ए रसूल नात ओ सलाम और हुजूर की शान में दरूद शरीफ पढ़ते हुए जुलूस में शामिल हुए। मोहल्ला दमामियान और शीतला गेट से शुरू हुआ जुलूस शहर के कई प्रमुख मोहल्लों और रास्तों से होकर मोहल्ला व्यापारियन में संपन्न हुआ। शुरुआत से पहले शहर काजी शाहनवाज और शमीम साहब ने जुलूस के आदाब बताए। इसके बाद शादात ए इकराम के हाथों जुलूस रवाना हुआ।
अमन का पैगाम
जुलूस के रास्ते में अलग अलग जगह लोगों ने स्वागत किया और सामाजिक व राजनीतिक लोगों ने पुष्प वर्षा की। आयोजकों के मुताबिक इससे शहर के अमन चैन और भाईचारे की तस्वीर सामने आई। जुलूस ए मोहम्मदी पींजारान, मोहल्ला छिपान, लाल गुफा, गोगा गेट, मोहल्ला गुजरान, जेल रोड और सिटी कोतवाली होते हुए आगे बढ़ा। इसके बाद मोहल्ला भिस्तीयान, कोट गेट, जोशीवाड़ा, महावतांन और कसाइयों की बारी से होते हुए मोहल्ला व्यापारियन पहुंचा। पूरे रास्ते व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।
जुलूस के दौरान मोहल्लों में लोगों की ओर से शिरनी भी तकसीम की गई। भारतीय मुस्लिम शांति मिशन इंतजामिया कमेटी ने इसके लिए सहयोग करने वाले सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया। मेराज खान और अता हुसैन कादरी ने भी जुलूस के दौरान माकूल व्यवस्था के लिए बीकानेर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन का आभार जताया। जुलूस में तंजीमे आईमा के इमाम हजरात समेत बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आयोजकों ने पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित बनाने में सहयोग देने वालों की सराहना की।
एकजुट रहने की अपील
समापन स्थल पर जामा मस्जिद के सामने कारी असगर साहब ने कार्यक्रम की निजामत की। मुफ्ती अशफाकउल्ला ने कौम को एक प्लेटफार्म पर आकर इत्तेफाक से रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह नमाज में इमाम के पीछे एकजुट होकर नमाज पढ़ी जाती है उसी तरह कौम के लिए भी एक सरपरस्त चुनने की जरूरत है। उन्होंने सियासत और मजहब को लेकर अपनी बात रखते हुए हजरत उमर फारूक रजि अल्लाह अन्हू के दौर का उदाहरण भी सामने रखा।
मौलाना असगर अली ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि आज के दौर में इल्म के एतबार से पीछे रहने की स्थिति को बदलना जरूरी है। उन्होंने लोगों से बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की। मौलाना नौशाद ने नाते पाक पढ़कर माहौल को जोश से भर दिया और आशिक ए रसूल को झूमने पर मजबूर किया। अशरफ जिलानी साहब ने लब्बैक के साथ जिंदगी में गलत कामों से दूर रहने और नशे से बचने का संकल्प लेने की अपील की। इस तरह कार्यक्रम में धार्मिक संदेश के साथ सामाजिक सुधार पर भी जोर दिया गया।
जुलूस ए मोहम्मदी में हाफिज मुनीर अहमद, मौलाना अब्दुल सत्तार फैजानी, मौलाना मोहम्मद सलीम, हाफिज जाकिर और हाफिज मोहम्मद रमजान समेत कई उलेमा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। मोहल्ला दमामियान के कार्यकर्ताओं और तंजीमे आईमा के इमाम हजरात की मौजूदगी भी रही। जुलूस के पूरे रास्ते में व्यवस्था बनाए रखने के लिए जाकिर नागौरी, मोहम्मद असलम, मास्टर मंसूर अली, मेहबूब कयामखानी, साजिद सुलेमानी, एम एच पप्पू और अन्य लोगों ने सहयोग किया। आयोजन में शामिल लोगों ने आपसी सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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