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नेपाल में बाढ़ से 162 मौतें, 579 पर्यटक अब भी लापता, तलाश जारी

नेपाल में बाढ़ से 162 लोगों की मौत हुई है। 579 पर्यटक लापता हैं और 400 से अधिक विदेशी हैं। हेलीकॉप्टरों से बचाव अभियान जारी है। 

By अजय त्यागी
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नेपाल में बाढ़

नेपाल में बाढ़

त्रिशूली नेपाल। नेपाल में बाढ़ से तबाही के बाद 162 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। हेलीकॉप्टरों से तलाश और बचाव अभियान जारी है। Reuters के अनुसार 579 पर्यटकों के लापता होने की सूचना है जिनमें 400 से अधिक विदेशी हैं। मलबे और पानी की तेज धार ने घरों सड़कों पुलों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। भारत समेत कई देशों ने राहत सामग्री और सहायता भेजी है जबकि अधिकारियों को मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका है। [विडियो] [1]   

सीमा क्षेत्र में तबाही

हिमालयी सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बचाव दल गुरुवार को सैकड़ों लापता लोगों की तलाश में जुटे रहे। Reuters के अनुसार मिट्टी और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा नदी में गिरने के बाद तेज बहाव ने नेपाल के कई कस्बों और घाटियों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल पुलिस के मुताबिक मृतकों की संख्या 162 पहुंच गई है और तलाश दोबारा तेज होने के साथ यह आंकड़ा बढ़ सकता है। कई प्रभावित इलाकों में संपर्क और परिवहन व्यवस्था भी बुरी तरह बाधित हुई है।

नेपाल पर्यटन अधिकारियों के अनुसार 579 पर्यटकों के लापता होने की सूचना है जिनमें 400 से अधिक विदेशी नागरिक हैं। इनमें अमेरिका के 47 ऑस्ट्रेलिया के 34 ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 24 नागरिक शामिल बताए गए हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 558 लोगों के लापता होने की सूचना दी गई है हालांकि दोनों देशों के आंकड़ों में संभावित ओवरलैप स्पष्ट नहीं है। प्रभावित क्षेत्र ट्रेकिंग और तीर्थयात्रा के लिए लोकप्रिय है और कई लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर थे।

राहत अभियान तेज

नेपाल में बाढ़ के बाद प्रभावित जिलों में हेलीकॉप्टरों से तंबू भोजन और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है। नेपाली सेना के प्रवक्ता ने बताया कि पड़ोसी भारत की ओर से उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री भी प्रभावित इलाकों तक पहुंचाई जा रही है। अमेरिका ने आपदा प्रतिक्रिया सलाहकार भेजने और पांच लाख डॉलर की सहायता देने की बात कही है। कनाडा दक्षिण कोरिया मलेशिया और जापान समेत कई देशों ने भी अपने नागरिकों की स्थिति पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र की टीमें भी सहायता उपलब्ध करा रही हैं।

शुरुआती रिपोर्टों में भूकंप को संभावित कारण माना गया था लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बाद में स्पष्ट किया कि दर्ज की गई भूकंपीय ऊर्जा वास्तव में बर्फ और चट्टानों के ढहने तथा उसके बाद हुए मलबा प्रवाह से जुड़ी थी। Planet Labs की शुरुआती उपग्रह तस्वीरों के अध्ययन में भी ल्हेंदे नदी में बर्फ और चट्टान के भूस्खलन से अचानक बाढ़ आने के संकेत मिले हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य और कठिन हो गया है क्योंकि सड़कें पुल संचार व्यवस्था और बिजली परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।

अपनों की तलाश

नेपाल में बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों के लिए अपनों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। नुवाकोट और धादिंग से जुड़े इलाकों में लोग लापता परिजनों की जानकारी पाने के लिए सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के बाहर जुटे। बिजली व्यवस्था क्षतिग्रस्त होने के बाद मोबाइल फोन की रोशनी में पुलिस लापता लोगों के नाम दर्ज करती दिखाई दी। प्रभावित बस्तियों में घर पेड़ और वाहन मिट्टी की मोटी परतों में दब गए हैं। हेलीकॉप्टर लगातार बचाए गए लोगों को सुरक्षित स्थानों और अस्पतालों तक पहुंचा रहे हैं।

त्रिशूली और आसपास के इलाकों से सामने आए दृश्यों में पानी और मलबे की तेज धार से लोगों और वाहनों के बहने की तस्वीरें सामने आई हैं। एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि उसने पेड़ पकड़कर अपनी जान बचाई जबकि उसके काम करने वाली जगह का घर बह गया। दूसरे व्यक्ति ने बताया कि मलबे में उसकी पत्नी बह गई और वह अब भी उसके मिलने की उम्मीद कर रहा है। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रभावित बस्तियों में व्यापक तबाही की जानकारी दी है।

बढ़ सकता है आंकड़ा

नेपाल में बाढ़ की भयावहता को देखते हुए अधिकारियों ने मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई है। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता ने कहा कि तलाश अभियान दोबारा शुरू होने के बाद और शव बरामद होने की संभावना है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी तीन मौतों और सैकड़ों लापता लोगों की सूचना दी गई है। सीमा के दोनों ओर सड़कें संचार और बिजली संपर्क टूटने से राहत कार्य प्रभावित हुए हैं। बचावकर्मियों के लिए कई इलाकों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है और अभियान लगातार जारी है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आपदा के दौरान मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े बचाव अभियानों के आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं और विभिन्न स्रोतों के आंकड़ों में अंतर संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief