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धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति पर गूंजे जयकारे, श्रद्धालुओं ने की पूजा

धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति पर तिलस्वां महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था दिखी। रुद्र हवन, महामृत्युंजय हवन और सहस्त्रधारा अभिषेक के बाद प्रसादी बांटी।

By अजय त्यागी
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धार्मिक अनुष्ठान

धार्मिक अनुष्ठान

भीलवाड़ा, राजस्थान। बिजौलियां ऊपरमाल की पावन धरा पर स्थित प्रसिद्ध तिलस्वां महादेव मंदिर में श्रावण मास के दौरान हुए धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हुई। श्री तिलस्वां महादेव मंदिर ट्रस्ट और ऊपरमाल किसान पंचायत के सानिध्य में 30 जुलाई 2026 से शुरू हुए कार्यक्रमों में शांति पाठ, लघु रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और अखंड रामायण पाठ कराया गया। पूर्णाहुति अवसर पर गणपति स्थापना, मंडल हवन, महा रुद्र हवन, महामृत्युंजय हवन और सहस्त्रधारा अभिषेक विधि विधान से संपन्न हुए।

मंत्रों से गूंजा धाम

पूर्णाहुति के दौरान विभिन्न गोत्रों के विद्वान पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। मंदिर परिसर में पूजा पाठ के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान तिलस्वां महादेव के दर्शन कर पूजा अर्चना की। आयोजन का उद्देश्य देश में सुख शांति और समृद्धि की कामना करना रहा। इसके साथ अच्छी वर्षा और फसलों के लहलहाने की प्रार्थना की गई। क्षेत्र में पर्याप्त खनिज संपदा, आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ प्राकृतिक आपदाओं से देश प्रदेश की रक्षा की कामना भी की गई।

धार्मिक अनुष्ठान के दौरान भगवान शंकर की कृपा और इंद्र देवता को प्रसन्न करने की भावना भी जुड़ी रही। श्रद्धालुओं ने परिवार, क्षेत्र और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। पूर्णाहुति के समय मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और धार्मिक जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। पूजा और हवन की विभिन्न प्रक्रियाएं विधि विधान के साथ पूरी की गईं। आयोजन के समापन की ओर बढ़ते कार्यक्रम में भक्तों ने श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया और भगवान तिलस्वां महादेव के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

भक्तों के लिए इंतजाम

दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गईं। मंदिर परिसर में ठहरने वाले भक्तों के लिए भोजन और प्रसादी की व्यवस्था भी रखी गई ताकि धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने वालों को परेशानी नहीं हो। तिलस्वां महादेव मंदिर बिजौलिया से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां शिवरात्रि सहित विभिन्न अवसरों पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंचती है। श्रावण मास के आयोजन में भी ट्रस्ट की व्यवस्थाओं के बीच भक्तों ने पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों में उत्साह से भाग लिया।

कार्यक्रम में तिलस्वां मंदिर के महंत एवं स्थायी प्रन्यासी पूर्णा शंकर पाराशर, ट्रस्ट अध्यक्ष रमेश चंद्र अहीर, सचिव मांगीलाल धाकड़, आचार्य छीतर गोड़, फूलचंद कराड़ और सुगनलाल धाकड़ सहित ट्रस्ट पदाधिकारी, सदस्य, किसान पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। तिलस्वां महादेव मंदिर की धार्मिक पहचान लंबे समय से क्षेत्र की आस्था से जुड़ी रही है। आयोजन के समापन पर ट्रस्ट पदाधिकारियों ने सहयोग करने वाले श्रद्धालुओं और सहयोगकर्ताओं का आभार जताया तथा भक्तों ने व्यवस्थाओं की सराहना की।

आस्था से हुआ समापन

श्रावण मास में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई। भक्तों ने भगवान तिलस्वां महादेव के दर्शन कर सुख शांति और समृद्धि की कामना की। आयोजन में हवन, जाप, अभिषेक और पाठ जैसे धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए सामूहिक प्रार्थना का माहौल बना। ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं के ठहरने और भोजन की व्यवस्था किए जाने से दूर दराज से आने वाले भक्तों को सुविधा मिली। पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की खुशहाली, अच्छी बारिश और फसलों की समृद्धि के लिए प्रार्थनाओं पर जोर रहा।

तिलस्वां महादेव मंदिर में हुए धार्मिक अनुष्ठान का समापन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हुआ। पूर्णाहुति के अवसर पर महा रुद्र हवन, महामृत्युंजय हवन और सहस्त्रधारा अभिषेक सहित विभिन्न विधियां पूरी की गईं। श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर परिवार और देश प्रदेश की सुख शांति की कामना की। मंदिर परिसर में मंत्रोच्चार और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। आयोजन के अंत में प्रसादी वितरण हुआ और ट्रस्ट ने सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। धार्मिक अनुष्ठान ने श्रावण मास में तिलस्वां महादेव के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और सामूहिक प्रार्थना की भावना को सामने रखा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और प्रार्थनाओं का उल्लेख श्रद्धालुओं की आस्था एवं कार्यक्रम के संदर्भ में किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief