नेपाल बाढ़ का असर, यूपी के दो जिलों में भी हाई अलर्ट
नेपाल बाढ़ का असर यूपी के सीमावर्ती जिलों में दिखा है। महाराजगंज और कुशीनगर में हाई अलर्ट है और नदियों के बढ़ते जलस्तर पर निगरानी जारी है।

गंडक नदी
महराजगंज, उत्तर प्रदेश। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों महाराजगंज और कुशीनगर में हाई अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन गंडक और नेपाल से आने वाली अन्य नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहा है। नेपाल में आपदा से कम से कम 177 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना है। उत्तर प्रदेश सरकार ने राहत और बचाव की तैयारी बढ़ा दी है तथा संवेदनशील गांवों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। [1]
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ी सतर्कता
नेपाल बाढ़ का असर देखते हुए महाराजगंज में जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल और पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने नारायणी नदी तथा आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने एसडीआरएफ की नाव से बचाव व्यवस्था का जायजा लिया। राजस्व, पुलिस, एसएसबी और एसडीआरएफ कर्मियों को नदी की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी और निचले इलाकों से दूर रहने की अपील की है। कुशीनगर में भी गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तैयारी तेज कर दी गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने नेपाल में राहत और बचाव कार्यों के लिए 32 सदस्यीय एसडीआरएफ दल और 22 पीएसी कर्मियों को भेजा है। चार रबर नावें उपलब्ध हैं और अतिरिक्त एसडीआरएफ दल के साथ एक एल्युमिनियम नाव भी भेजी जा रही है। राहत आयुक्त का नियंत्रण कक्ष सीमावर्ती जिलों की स्थिति पर नजर रख रहा है। फंसे हुए उत्तर प्रदेश के लोगों के परिवार 1070 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं। कुशीनगर प्रशासन ने संवेदनशील गांवों और वाल्मीकिनगर बैराज का निरीक्षण भी किया है।
नदियों के जलस्तर पर नजर
नेपाल बाढ़ का असर उत्तर प्रदेश की नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। केंद्रीय जल आयोग के 27 अगस्त के बुलेटिन के अनुसार बिहार के मधवापुर में राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ रहा था। सरयू और क्वानो समेत कई नदियों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। बलिया में घाघरा नदी चेतावनी स्तर से ऊपर थी, हालांकि उसका जलस्तर घट रहा था। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों और रेतीले इलाकों पर विशेष निगरानी बढ़ाई है तथा पानी तेजी से बढ़ने की स्थिति में लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
बाढ़ का असर देखते हुए वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। जिला प्रशासन के अनुसार पानी का डिस्चार्ज रात आठ बजे करीब 1.04 लाख क्यूसेक से बढ़कर रात दस बजे 1.42 लाख क्यूसेक हो गया। नारवाजोत एपी तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर नदी के दबाव की निगरानी की जा रही है और एसडीआरएफ टीम को बचाव उपकरणों के साथ तैनात रखा गया है। पुलिस तथा पीएसी बल को भी संवेदनशील थाना क्षेत्रों में अलर्ट किया गया है। गांवों में लाउडस्पीकर से लोगों को सतर्क करने और पेयजल तथा मोबाइल शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नदी का जलस्तर मौसम और नेपाल से आने वाले पानी के अनुसार तेजी से बदल सकता है इसलिए स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों और निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।