9 साल की अंजलि के अंगदान से 3 मरीजों को जिंदगी, AIIMS का बड़ा फैसला
जोधपुर में सड़क हादसे के बाद ब्रेन डेड हुई 9 साल की अंजलि के अंगदान से 3 मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद मिली, परिवार के फैसले ने मिसाल कायम की।

अंजलि के अंगदान
जोधपुर, राजस्थान। AIIMS जोधपुर में सड़क हादसे के बाद ब्रेन डेड घोषित 9 साल की अंजलि के अंगदान ने तीन मरीजों के लिए उम्मीद जगा दी। अस्पताल में इस बच्ची का अंगदान इस साल का दूसरा और संस्थान में 12वां कैडेवरिक अंगदान है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ अभिषेक भार्गव के मुताबिक अंजलि को 19 अगस्त को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था और 27 अगस्त को ब्रेन डेड घोषित किया गया। डॉक्टरों ने परिवार को अंगदान की अहमियत समझाई और सहमति मिलने के बाद शनिवार को प्रक्रिया पूरी की गई। [1]
मां ने दिखाई हिम्मत
अंजलि के पिता अशोक दास ड्राइवर हैं। उन्होंने बताया कि 19 अगस्त को अंजलि और उसका भाई स्कूल वैन से उतरकर घर की ओर जा रहे थे। भाई आगे निकल गया और अंजलि पीछे रह गई। इसी दौरान एक वाहन ने उसे टक्कर मार दी। सिर में गंभीर चोट के बाद उसे AIIMS लाया गया। डॉक्टरों ने इलाज में कोशिश की, लेकिन हालत नहीं संभली। परिवार को अंजलि के अंगदान के लिए समझाया गया तो शुरुआत में सहमति नहीं बनी, मगर मां ने इस फैसले का समर्थन किया।
डॉक्टर भारत चौधरी के अनुसार अंजलि को सिर में गंभीर चोट के साथ पसलियों में भी फ्रैक्चर था। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन ब्रेन डेड होने के बाद उम्मीद खत्म हो गई। परिवार की सहमति से उसके लिवर और दोनों किडनी दान की गईं। एक किडनी और लिवर को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल भेजा गया, जबकि दूसरी किडनी जोधपुर में ही रखी गई। यह अंजलि के अंगदान जरूरतमंद मरीजों के लिए उम्मीद बन गए।
AIIMS की बड़ी उपलब्धि
अंजलि का अंगदान इस साल संस्थान में हुआ दूसरा कैडेवरिक अंगदान है। इससे पहले 31 जनवरी को पाली के श्रमिक भेराराम के ब्रेन डेड होने के बाद एक किडनी और लिवर दान किए गए थे। AIIMS जोधपुर में बाल अंगदान की शुरुआत 2024 में हुई थी और अंजलि का मामला तीसरा है। इससे पहले 5 साल के भोमाराम के अंग दान किए गए थे। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 12 अंगदान के जरिए 37 अंग ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
दुख में भी उम्मीद। अंजलि के परिवार ने बेटी को खोने के दर्द में ऐसा फैसला लिया, जिसने दूसरों के लिए जीवन की संभावना पैदा की। पिता के मुताबिक डॉक्टरों की कोशिश के बाद जब बेटी को बचाना संभव नहीं रहा तो अंगदान की बात सामने आई और मां ने आगे बढ़कर साथ दिया। अंजलि की कहानी बताती है कि अंगदान केवल चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवार को नई शुरुआत देने का जरिया भी बन सकता है। जोधपुर में इस बच्ची का अंगदान अब इंसानियत की मिसाल बन गया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अंगदान और प्रत्यारोपण से जुड़े चिकित्सकीय विवरण संबंधित अस्पताल और अधिकृत चिकित्सा संस्थानों की जानकारी के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।