संस्कृत सप्ताह में दिखा उत्साह, जनजन तक भाषा पहुंचाने की मुहिम हुई तेज
संस्कृत सप्ताह के तहत कोटा में गोदावरी धाम मंदिर पहुंची संस्कृत भारती की टीम, श्रद्धालुओं को तिलक और रक्षा सूत्र बांधकर संस्कृत दिवस की शुभकामनाएं दी गईं।

संस्कृत भारती की टीम
कोटा, राजस्थान (राहुल पारीक)। संस्कृत भारती, कोटा महानगर की ओर से जनजन तक संस्कृत भाषा पहुंचाने और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने के उद्देश्य से 28 अगस्त से 2 सितंबर तक संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में गोदावरी धाम मंदिर में कार्यकर्ताओं ने श्रद्धालुओं और आमजन को तिलक लगाकर तथा रक्षा सूत्र बांधकर संस्कृत दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के दौरान संस्कृत सप्ताह संयोजक दिनेश गौतम ने संस्कृत दिवस के महत्व और भाषा की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी साझा की।
संस्कृत से जुड़े लोग
दिनेश गौतम ने कहा कि भारत की संस्कृति, ज्ञान और गौरवशाली परंपराओं को समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान जरूरी है। उन्होंने भारत को जानने के लिए संस्कृत को जानना आवश्यक बताया। कार्यक्रम में डॉ. ललित नामा ने संस्कृत दिवस मनाने की परंपरा से जुड़ी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से वर्ष 1969 से संस्कृत दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। उनके अनुसार संस्कृत भारतीय ज्ञान, दर्शन, साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा की आधारभूत भाषा रही है।
संस्कृत सप्ताह के आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी तैयारियां जारी हैं। संस्कृत भारती कोटा महानगर के मंत्री आशुतोष गौतम ने बताया कि अभियान के दौरान वृक्षारोपण, संस्कृत संध्या, श्लोक पाठ प्रतियोगिता, संस्कृत संवाद प्रतियोगिता और संस्कृत गीत प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम होंगे। इन आयोजनों को शहर के अलग अलग विद्यालयों में कराया जाएगा। उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी संस्कृत को केवल पाठ्यक्रम की भाषा न समझें, बल्कि उसे अपनी संस्कृति और संवाद से जोड़कर भी देखें। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है।
विद्यालयों में होंगे आयोजन
आयोजकों के मुताबिक विद्यालयों में होने वाली प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों को संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने का अवसर मिलेगा। श्लोक पाठ और गीत प्रतियोगिता के साथ संस्कृत संवाद जैसे कार्यक्रम भाषा को व्यवहार से जोड़ने की कोशिश करेंगे। वहीं वृक्षारोपण और संस्कृत संध्या जैसे आयोजन अभियान को सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ेंगे। संस्कृत भारती का यह प्रयास केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। अलग अलग गतिविधियों के जरिए लोगों और विद्यार्थियों तक भाषा का संदेश पहुंचाने की तैयारी की गई है।
संस्कृत सप्ताह के कार्यक्रम में देवेन्द्र गौतम, हेमराज, दीपक नागर, दिनेश शर्मा, नवीन, नंदिनी पंकज, शीतल, कोमल सैनी, उर्वशी, दिव्यानी गुर्जर और पूनम नागर सहित संस्कृत भारती के अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे। गोदावरी धाम में हुए आयोजन ने संस्कृत दिवस के संदेश को आम श्रद्धालुओं तक पहुंचाने का काम किया। आने वाले कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी से अभियान को और विस्तार मिलने की उम्मीद है। संस्कृत सप्ताह के जरिए भाषा, संस्कृति और नई पीढ़ी के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश लगातार जारी रहेगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। कार्यक्रमों और उनमें विद्यार्थियों की संभावित भागीदारी से संबंधित जानकारी आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई गई है और आयोजन की वास्तविक स्थिति में बदलाव संभव है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।