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बाढ़ का खतरा बढ़ा, नदी के बाद झील भी बनी आफत, 2498 लोग अब भी लापता

बाढ़ से 675 मौतों के बाद एक बार पुनः बाढ़ का खतरा बढ़ा है। प्राकृतिक झील का बांध टूटा तो नीचे के इलाकों में फिर से बड़ा सैलाब आ सकता है।

By अजय त्यागी
1 min read
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भोटे कोशी नदी

भोटे कोशी नदी

काठमांडू, नेपाल। नेपाल में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच नई चिंता खड़ी हो गई है और एक बार पुनः बाढ़ का खतरा बढ़ा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण ने भोटे कोशी नदी में बढ़ते बहाव को देखते हुए रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन समेत नदी किनारे के इलाकों में लोगों तथा बचाव दलों को सतर्क रहने को कहा है। IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, धादिंग में त्रिशूली नदी सामान्य स्तर से 3 मीटर ऊपर बह रही है। [1]

नदी फिर उफनी

बाढ़ का खतरा बढ़ा होने की वजह सिर्फ नदी का बढ़ता पानी नहीं है। बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के मुताबिक धादिंग के गलछी इलाके में त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य से 3 मीटर ऊपर पहुंच गया है। 26 अगस्त को इसी इलाके में बाढ़ का स्तर 14 मीटर से ऊपर दर्ज हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि रसुवा के भोटे कोशी क्षेत्र से आए पानी के कारण त्रिशूली का बहाव बढ़ा है। हालांकि नदी किनारे रहने वाले कई लोगों को पहले ही सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है।

सबसे बड़ी चिंता लेंडे खोला को लेकर है। यह भोटे कोशी की सहायक नदी है और इसके ऊपरी हिस्से में बहाव रुकने से करीब 18 किलोमीटर दूर एक झील बन गई है। उपग्रह तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण में इसका क्षेत्रफल करीब 0.11 वर्ग किलोमीटर बताया गया है। इस झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध कमजोर हुआ तो अचानक पानी नीचे की ओर आ सकता है। प्राधिकरण ने कहा है कि इलाके में एक से ज्यादा ऐसी झीलें बनने की संभावना भी जांची जा रही है।

झील ने बढ़ाई चिंता

नई झील ने इसलिए चिंता बढ़ाई है क्योंकि उसका पानी प्राकृतिक अवरोध के पीछे जमा है। अगर यह अवरोध टूटता है तो तेज बहाव भोटे कोशी और आगे त्रिशूली नदी के निचले हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने और नदी किनारे जाने से बचने की अपील की है। राहत और बचाव दलों के लिए भी यही चेतावनी है कि बढ़ते पानी और अस्थिर पहाड़ी इलाके को देखते हुए किसी भी अभियान में अतिरिक्त सावधानी बरती जाए।

इस बीच 26 अगस्त की बाढ़ की तबाही का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 675 लोगों की मौत हो चुकी है और 2498 लोग अब भी संपर्क से बाहर हैं। इनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में लोग अभी अपने परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। कई इलाकों में मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश का काम जारी है। ऐसे में नई चेतावनी ने पहले से दबाव में चल रहे बचाव अभियान के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है।

खतरा अभी टला नहीं

अधिकारियों के मुताबिक लोगों के नदी किनारे से हट जाने के कारण तत्काल जोखिम सीमित है लेकिन बाढ़ का खतरा बढ़ा होने की चेतावनी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। खासकर प्राकृतिक बांध के टूटने की स्थिति में पानी कितनी तेजी से नीचे पहुंचेगा इसका सटीक अनुमान फिलहाल मुश्किल है। इसलिए रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन के संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। प्रशासन लगातार नए जलस्तर और उपग्रह संकेतों पर नजर रख रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते लोगों को सुरक्षित हटाया जा सके।

बाढ़ का खतरा बढ़ा है लेकिन अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने को कहा है। हालिया घटनाक्रम यह भी दिखाता है कि हिमालयी इलाकों में एक आपदा के बाद खतरा तुरंत खत्म नहीं होता। नदी का बढ़ता बहाव, मलबे से बनी झील और कमजोर प्राकृतिक बांध मिलकर स्थिति को फिर गंभीर बना सकते हैं। इसलिए राहतकर्मियों और नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात सतर्क रहना और सुरक्षित दूरी बनाए रखना है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। बाढ़ और प्राकृतिक बांध की स्थिति तेजी से बदल सकती है इसलिए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ताजा चेतावनियों को ही अंतिम मानें। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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