साइबर ठगी का अनोखा खेल, पहले खाते साफ किए फिर सोना छुड़ाया
महानगर गैस के नाम पर फर्जी APK से 2 लोगों के बैंक खाते साफ किए गए। पुलिस ने 3 आरोपियों को पकड़ा और साइबर ठगी की ₹6,24,518 रकम बरामद की।

प्रतीकात्मक फोटो
मुंबई, महाराष्ट्र। साइबर ठगी के एक हैरान करने वाले मामले में कांदिवली पुलिस ने 3 आरोपियों को गुजरात से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि आरोपी खुद को महानगर गैस कंपनी से जुड़ा बताकर लोगों को फोन करते थे और पेंडिंग मीटर रीडिंग या मामूली गैस बिल के नाम पर फर्जी APK मोबाइल में डाउनलोड करवाते थे। इसके बाद बैंक खातों से रकम निकाल ली जाती थी। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी ठगी का पैसा अपने खातों में जमा करने के बजाय सीधे अपने गोल्ड लोन की किस्तें चुकाने में इस्तेमाल करते थे। [1]
गैस बिल का सहारा
पुलिस के मुताबिक साइबर ठगी के आरोपी फोन पर लोगों को भरोसे में लेने के लिए महानगर गैस से जुड़ी समस्या का बहाना बनाते थे। कभी पेंडिंग मीटर रीडिंग ऑनलाइन अपलोड करने तो कभी मामूली बकाया बिल भरने के लिए कहा जाता था। इसके बाद पीड़ितों के मोबाइल पर फर्जी APK फाइल भेजी जाती थी। उसे डाउनलोड और इंस्टॉल करने के बाद आरोपियों को मोबाइल तक पहुंच मिल जाती थी। इसी रास्ते से बैंकिंग जानकारी हासिल कर खातों से रकम निकाली जाती थी। पुलिस ने आरोपियों को सूरत जिले के ओलपाड गांव से पकड़ा है।
जांच में सामने आया कि तीनों आरोपियों ने पहले से अपने नाम पर Bajaj Finserv से गोल्ड लोन ले रखा था। साइबर ठगी से निकाली गई रकम को वे सीधे अपने गोल्ड लोन की किस्त चुकाने में लगाते थे। लोन की रकम चुकाने के बाद कंपनी के पास गिरवी रखा सोना छुड़ा लेते थे। यानी पीड़ितों के खातों से निकला पैसा आखिरकार सोने में बदल जाता था। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने यह तरीका इसलिए अपनाया क्योंकि बैंक खाते में पहुंची ठगी की रकम को जल्दी ब्लॉक किया जा सकता है, जबकि गोल्ड लोन के भुगतान के जरिए रकम को दूसरे रूप में बदला जा सकता है।
खुला पूरा खेल
कांदिवली में इस तरीके से जुड़ी 2 घटनाएं सामने आई थीं। पहली घटना में बकुल कांतिलाल देसाई को गैस की पेंडिंग रीडिंग अपलोड करने का झांसा दिया गया। फर्जी APK इंस्टॉल करवाने के बाद उनके HDFC Bank खाते से ₹2,07,401 निकाल लिए गए। दूसरी घटना में शैलेश जयकिशन परमार को सिर्फ ₹12 का गैस बिल भरने के नाम पर फंसाया गया। APK इंस्टॉल करवाने के बाद उनके बैंक खाते से ₹4,17,117 निकाल लिए गए। पुलिस के अनुसार दोनों मामलों की रकम आरोपियों ने अपने गोल्ड लोन की देनदारी चुकाने में इस्तेमाल की।
पुलिस ने आरोपियों के पास से दोनों मामलों में ठगी गई पूरी ₹6,24,518 रकम बरामद करने का दावा किया है। जांच में साइबर सेल की तकनीकी मदद ली गई और आरोपियों के मोबाइल फोन तथा ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े सुराग जुटाए गए। इन्हीं सुरागों के आधार पर पुलिस गुजरात के ओलपाड गांव तक पहुंची। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि आरोपियों ने इस तरीके से और कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी की कितनी रकम से अपने गोल्ड लोन की देनदारी चुकाई।
डेटा लीक की भी जांच
साइबर ठगी के इस मामले में अब जांच का दायरा और बढ़ गया है। आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने पुलिस से महानगर गैस कंपनी की भी जांच करने को कहा है। सवाल यह है कि कंपनी के ग्राहकों से जुड़ी जानकारी आखिर साइबर ठगों तक कैसे पहुंची। पुलिस इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है। इस मामले से लोगों के लिए साफ चेतावनी है कि गैस बिल, मीटर रीडिंग या किसी दूसरी सेवा के नाम पर भेजी गई अनजान APK को मोबाइल में डाउनलोड और इंस्टॉल न करें। किसी भी भुगतान से पहले संबंधित कंपनी से सीधे पुष्टि करना ज्यादा सुरक्षित है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आरोपियों के खिलाफ पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है साथ ही ग्राहकों की जानकारी साइबर ठगों तक पहुंचने से जुड़े पहलू की भी जांच जारी है और इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।