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निशुल्क मेडिकल कैंप में उमड़ी भीड़, आयोजकों की पहल बनी बड़ी मिसाल

745 मरीजों की भीड़, 15 विशेषज्ञ डॉक्टर और 6 घंटे तक चलती कतार, निशुल्क मेडिकल कैंप में इलाज के साथ जांच और दवाइयां भी मुफ्त मिलीं। आयोजकों की पहल चर्चा में रही।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg निशुल्क मेडिकल कैंप

निशुल्क मेडिकल कैंप

बीकानेर राजस्थान। निशुल्क मेडिकल कैंप में इलाज की उम्मीद लेकर 745 मरीज पहुंचे और सुबह से ही लंबी कतारें लग गईं। घुटनों और हड्डियों की परेशानी वाले मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा रही। जयपुर से आए विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाने के लिए दोपहर 2 बजे तक भी लोगों की भीड़ बनी रही। आयोजकों के मुताबिक करीब 6 घंटे चले इस शिविर में मरीजों को डॉक्टरों की सलाह के साथ जांच और दवाइयां भी मुफ्त दी गईं। दूरदराज के इलाकों से पहुंचे मरीजों ने भी शिविर का लाभ उठाया।

आयोजकों की खास पहल

निशुल्क मेडिकल कैंप का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रमुख टेक चंद बरडिया, जयपुर के हड्डी विशेषज्ञ डॉ. सचिन गुप्ता और हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. जय किशन सुथार ने संयुक्त रूप से किया। मुख्य अतिथि समाजसेवी और महावीर इंटरनेशनल के राष्ट्रीय पदाधिकारी संतोष बांठीया रहे। ऋषिकेश के 95 वर्षीय संत जगन्नाथ जी महाराज विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सुधा आचार्य के शंख वादन से हुई। पूरे आयोजन के संयोजक प्रकाश चंद्र सोनी रहे और कार्यक्रम प्रमुख संयोजक विजय कोचर रहे।

वंदे मातरम टीम के प्रवक्ता पुरुषोत्तम सुथार ने बताया कि इस आयोजन में लगभग 745 मरीजों ने लाभ लिया। उन्होंने कहा कि पहले भी टीम की ओर से ऐसे चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए हैं और इस बार भी लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। आयोजकों ने सिर्फ परामर्श तक व्यवस्था सीमित नहीं रखी बल्कि जांच और दवाइयों की सुविधा भी निशुल्क उपलब्ध कराई। इस पहल का असर शिविर में उमड़ी भीड़ से साफ दिखाई दिया और कई मरीजों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से सीधे सलाह लेने का मौका मिला।

घुटनों की परेशानी ज्यादा

निशुल्क मेडिकल कैंप में हड्डियों और घुटनों की परेशानी वाले मरीजों की संख्या सबसे अधिक रही। मुकेश जोशी के अनुसार शिविर में फिजियोथैरेपी, शुगर, बीपी और हड्डियों की जांच की सुविधा भी रखी गई थी। हड्डियों की जांच के लिए दिल्ली से विशेष मशीन मंगाई गई थी। इससे मरीजों को एक ही जगह जरूरी जांच और विशेषज्ञ सलाह मिल सकी। शिविर में हृदय रोग और हड्डियों के अलावा दंत चिकित्सा तथा सामान्य रोगों से जुड़े मरीजों को भी सेवाएं दी गईं।

शिविर में करीब 15 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने अपनी सेवाएं दीं। इनमें डॉ. सचिन गुप्ता, डॉ. जय किशन सुथार, डॉ. अरिहंत बांठिया और डॉ. गजेंद्र वर्मा सहित अलग अलग रोगों के विशेषज्ञ शामिल रहे। बीकानेर के अलावा ग्रामीण इलाकों से मरीज पहुंचे और फलोदी जैसे दूर के क्षेत्र से भी लोग इलाज के लिए आए। आयोजकों के अनुसार सुबह 8 बजे शुरू हुआ शिविर दोपहर 2 बजे तक चला। इसके बावजूद जयपुर से आए डॉक्टरों को दिखाने वालों की कतार काफी देर तक खत्म नहीं हुई।

6 घंटे तक जारी रही भीड़

निशुल्क मेडिकल कैंप के दौरान मरीजों की लंबी लंबी कतारें आयोजन स्थल पर चर्चा का विषय बनी रहीं। सुबह से ही लोग अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। करीब 6 घंटे तक मरीजों की आवाजाही जारी रही। आयोजकों की ओर से जांच, परामर्श और दवाइयों की व्यवस्था निशुल्क रखने से दूरदराज से आए लोगों को भी काफी सहूलियत मिली। खासकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी ने मरीजों को आकर्षित किया और हड्डियों तथा घुटनों से जुड़ी समस्या वाले लोगों की संख्या लगातार बनी रही।

शिविर को सफल बनाने में वंदे मातरम टीम के विजय कोचर, पुरुषोत्तम सुथार, मुकेश जोशी, कमल सेन, शिवदयाल उपाध्याय, घनश्याम सोनी, पुरुषोत्तम उपाध्याय, भवानी सुथार, राजेंद्र रामपुरिया, कामिनी भोजक, विजयलक्ष्मी मूंदड़ा और राजश्री कच्चावा सहित कई लोगों ने सेवा दी। मंजू बोथरा, शिव शंकर सोनी, रामलाल हलवाई, राधा खत्री, जसोदा खत्री, सपना सूरज, दिनेश सोनी, राजाराम सोनी, विशाल सोनी, नरसिंग भाटी और अन्य सहयोगियों ने भी व्यवस्थाओं में योगदान दिया। निशुल्क मेडिकल कैंप में सामूहिक सेवा और चिकित्सा सुविधा का यह प्रयास लोगों के बीच चर्चा में रहा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। शिविर में मरीजों की संख्या, डॉक्टरों की संख्या और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े आंकड़े आयोजकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं और सभी आंकड़ों का स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief