सामूहिक एकासना साधना में 95 वर्षीय शांति देवी ने बढ़ाया हौसला
सैकड़ों श्रावक श्राविकाओं की सामूहिक एकासना साधना, 95 वर्षीय शांति देवी का आत्मबल बना चर्चा का केंद्र, संतों के सान्निध्य में तप और सामायिक से समता का संदेश।
सामूहिक एकासना साधना
बीकानेर राजस्थान। सामूहिक एकासना साधना के लिए रविवार को बीकानेर और बाहर से आए सैकड़ों श्रावक श्राविकाएं जुटे। आचार्य प्रवर 1008 रामलालजी म.सा. और उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के सान्निध्य में एकासना तप और सात सामायिक की साधना हुई। सेवा सदन में विशेष कार्यशाला भी रखी गई। इस दौरान करीब 95 वर्ष की श्रीमती शांति देवी बेगानी ने कमजोर शरीर के बावजूद मजबूत आत्मबल दिखाते हुए साधना की। उनके जज्बे को देखकर मौजूद लोगों ने उनकी जमकर सराहना की।
साधना में जुटा समाज
सामूहिक एकासना साधना के आयोजन में श्री साधुमार्गी जैन सेवा समिति बीकानेर और समता युवा संघ के पदाधिकारी व्यवस्थाओं में जुटे रहे। समिति के अध्यक्ष कन्हैयालाल बैद सहित कई कार्यकर्ताओं ने साधकों की सुविधाओं का ध्यान रखा। शांति देवी बेगानी को बैठाने और उठाने में भी समिति के अध्यक्ष सहित अन्य लोगों ने मदद की। उनकी उम्र और कमजोर शारीरिक स्थिति के बावजूद साधना के प्रति उनका उत्साह देखकर मौजूद लोगों ने इसे आत्मबल की प्रेरक मिसाल बताया।
आचार्य रामलालजी और उपाध्याय राजेश मुनि की प्रेरणा से देश के अलग अलग इलाकों में रह रहे श्रावक श्राविकाओं ने भी एकासना तप और सामायिक साधना की। बीकानेर में गोगागेट के अंदर अग्रसेन भवन और कई परिवारों के घरों में भी बड़ी संख्या में साधकों ने साधना की। कुछ श्रावक श्राविकाओं ने रात को सेवा सदन में ही विश्राम किया और सुबह जल्दी उठकर जप तप स्वाध्याय तथा साधना में समय लगाया। इससे आयोजन में धार्मिक अनुशासन और सामूहिक भागीदारी का माहौल बना रहा।
सामायिक का बताया अर्थ
सामूहिक एकासना साधना के साथ सामायिक के महत्व को भी समझाया गया। समिति के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा के अनुसार सामायिक का भाव सभी जीवों के प्रति राग द्वेष और मोह छोड़कर समान दृष्टि रखना है। इसमें मन वचन और काया को सांसारिक गतिविधियों तथा पापकारी प्रवृत्तियों से हटाकर आत्मचिंतन में लगाने का प्रयास किया जाता है। गृहस्थों के लिए सामान्य सामायिक की अवधि 48 मिनट बताई गई है। आवश्यकता के अनुसार इसे अधिक समय तक भी किया जा सकता है।
सामायिक के दौरान हिंसा और पापकारी प्रवृत्तियों का त्याग करने का संकल्प लिया जाता है। इस साधना का उद्देश्य केवल धार्मिक क्रिया पूरी करना नहीं बल्कि व्यवहार में समता और आत्मसंयम को मजबूत करना भी माना जाता है। रविवार की साधना में शामिल श्रावक श्राविकाओं ने इसी भाव के साथ समय बिताया। सेवा सदन में विशेष सत्र और कार्यशाला के दौरान चरित्र आत्माओं का सान्निध्य भी मिला। आयोजन में तप के साथ स्वाध्याय और आत्मचिंतन पर जोर दिखाई दिया।
जिनेश्वर परिषद ने किए दर्शन
सामूहिक एकासना साधना के दौरान श्री सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के अध्यक्ष महावीर सिंह खजांची, पूर्व मंत्री रतन लाल नाहटा, जिनेश्वर युवक परिषद के अध्यक्ष संदीप मुसरफ, मंत्री मनीष नाहटा सहित पदाधिकारियों और सदस्यों ने छबीली घाटी स्थित सेवा सदन पहुंचकर आचार्य प्रवर रामलालजी म.सा. और उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि के दर्शन वंदन किए। इस दौरान साधुमार्गी जैन सेवा समिति के पदाधिकारियों ने उन्हें चातुर्मासिक गतिविधियों की जानकारी दी।
उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि ने इस अवसर पर भारतीय जनगणना में जैन जाति का अंकन करवाने की बात कही। उन्होंने सभी समुदायों के जैन साधु साध्वियों के सम्मान पर भी जोर दिया। इस मुलाकात के दौरान धार्मिक गतिविधियों और समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। रविवार का आयोजन इस मायने में भी खास रहा कि इसमें तप साधना के साथ सामाजिक एकजुटता और धार्मिक जागरूकता का संदेश सामने आया। सामूहिक एकासना साधना ने बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं को एक साथ साधना से जोड़ने का काम किया।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आयोजन में शामिल लोगों की संख्या और धार्मिक गतिविधियों से संबंधित विवरण आयोजकों तथा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं और सभी तथ्यों का स्वतंत्र सत्यापन नहीं किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।