बालिका बॉक्सिंग में जोरदार पंच, लाडो एकेडमी की बेटियों ने दिखाया दम
बालिका बॉक्सिंग में बेटियों के दमदार पंच और शानदार फुटवर्क ने दर्शकों को रोमांचित किया। लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी की खिलाड़ियों ने जोरदार प्रदर्शन किया।

बालिका बॉक्सिंग
भीलवाड़ा राजस्थान (पंकज पोरवाल)। बालिका बॉक्सिंग में रविवार को शहीद राजगुरु खेल मैदान पर बेटियों का जोश और हुनर देखने को मिला। राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर लाडो सेवा फाउंडेशन की ओर से संचालित लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी के 2 दिवसीय आयोजन में सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले हुए। अलग अलग भार वर्गों में उतरी खिलाड़ियों ने तेज पंच, शानदार फुटवर्क और तकनीकी कौशल से मुकाबलों को रोमांचक बना दिया। हर राउंड में जीत के लिए खिलाड़ियों ने पूरी ताकत लगाई और दर्शकों की निगाहें रिंग पर टिकी रहीं।
बेटियों ने दिखाया दम
फाइनल मुकाबलों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। किसी ने तेज पंच से बढ़त बनाने की कोशिश की तो किसी ने बेहतरीन फुटवर्क से सामने वाली खिलाड़ी के हमलों का जवाब दिया। जीतने वाली खिलाड़ियों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई, जबकि हारने वाली प्रतिभागियों ने भी खेल भावना नहीं छोड़ी। मुकाबलों ने दिखाया कि बेटियां अब सिर्फ भागीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रतिस्पर्धी खेलों में अपनी जगह बनाने के लिए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रही हैं।
लाडो सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने कहा कि बेटियां जब मैदान में उतरती हैं तो वे सिर्फ मुकाबला नहीं करतीं, बल्कि अपनी पहचान और सपनों के लिए भी संघर्ष करती हैं। उन्होंने बालिकाओं को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए बेहतर अवसर, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन की जरूरत बताई। राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित यह प्रतियोगिता इसी सोच को जमीन पर उतारने की कोशिश के रूप में सामने आई। देश में राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त को मेजर ध्यानचंद की जयंती पर मनाया जाता है।
खेल से बढ़ता आत्मविश्वास
लाडो स्पोर्ट्स एकेडमी का कहना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है। नियमित खेल गतिविधियों से बालिकाओं में आत्मविश्वास, अनुशासन, निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता जैसे गुण विकसित होते हैं। संस्था का जोर ऐसे सुरक्षित और सकारात्मक माहौल पर है जहां बेटियां बिना झिझक अपनी प्रतिभा दिखा सकें। प्रतियोगिता में इच्छा, निशा, संध्या स्वाइन, मीनू कोली, गायत्री, खुशबू बंसल, सावित्री, वंशिका और निशा वर्मा सहित कई खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
बालिका बॉक्सिंग प्रतियोगिता में भावना निर्वाण, कविता, खुशी, कोमल, मुस्कान, लक्ष्मी, श्रद्धा, खुशी जाट, तमना, सुमन और माधवी सहित कई बालिकाओं ने भी अपने प्रदर्शन से ध्यान खींचा। उपस्थित लोगों ने लाडो सेवा फाउंडेशन की पहल की सराहना करते हुए खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया। बालिका बॉक्सिंग के इन मुकाबलों ने एक साफ संदेश दिया कि भीलवाड़ा में प्रतिभाशाली बेटियों की कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ लगातार प्रशिक्षण, सही मार्गदर्शन और ऐसे मंचों की है जहां वे अपनी मेहनत को पहचान में बदल सकें।
अस्वीकरण (Disclaimer):
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