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आनंदम विंग बनी समाज की नई पहचान, 80 भामाशाहों का भव्य सम्मान

80 भामाशाहों के सहयोग से तैयार आनंदम विंग के निर्माण सहयोगियों का भव्य सम्मान हुआ। 23 कमरों वाली नई विंग को समाज विकास की नई उपलब्धि बताया गया।

By अजय त्यागी
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भामाशाहों का सम्मान

भामाशाहों का सम्मान

गंगाशहर बीकानेर। आनंदम विंग को आकार देने वाले 80 भामाशाहों के सम्मान में श्री नईलेन ओसवाल पंचायती प्रन्यास के टीएम हॉल में भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में नईलेन ओसवाल समाज के साथ पुरानी लेन, गंगाशहर, भीनासर और बीकानेर की विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा गणमान्य लोग शामिल हुए। आनंदम विंग के निर्माण सहयोगियों को सम्मानित करते हुए समाज की विकास यात्रा में उनके योगदान को याद किया गया। समारोह की शुरुआत न्यासी धर्मेन्द्र डाकलिया ने नमस्कार महामंत्र के जप से की।

80 भामाशाहों का सहयोग

कार्यवाहक अध्यक्ष विमलसिंह चौरड़िया ने बताया कि समाज को समर्पित आनंदम विंग का निर्माण 80 विभिन्न भामाशाहों के सहयोग से पूरा हुआ। उन्होंने बताया कि विंग के लोकार्पणकर्ता चम्पालाल डागा परिवार और टोडरमल लालाणी रहे। निर्माण वर्तमान अध्यक्ष चम्पालाल डागा के कार्यकाल में पूर्ण हुआ। इसी उपलब्धि के उपलक्ष्य में भामाशाह सम्मान समारोह रखा गया। स्वागत वक्तव्य कार्यवाहक अध्यक्ष ने दिया जबकि मंत्री सुरेंद्र पटवा ने कार्यक्रम की रूपरेखा और आयोजन के उद्देश्य की जानकारी दी।

मंत्री सुरेंद्र पटवा ने कहा कि निरंतर विकास की राह पर आगे बढ़ रहे संस्थान में आनंदम विंग के रूप में नया अध्याय जुड़ा है। इस नई विंग में आधुनिक सुविधाओं से युक्त 23 कमरे, पार्किंग और लिफ्ट की सुविधा उपलब्ध है। ट्रस्टी कन्हैयालाल बोथरा, मोहन सुराणा, विनोद बोथरा, तोलाराम बोथरा, डॉ जेठमल मरोठी, अमरचंद सोनी, रिद्ध करण सेठिया, विमल डागा, मानक चंद सामसूखा, भैरुदान सेठिया और महेंद्र बोथरा सहित ट्रस्ट मंडल ने भामाशाहों को मोमेंटो और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

पुराने योगदान को किया याद

सहमंत्री किशन बैद ने बताया कि समारोह में जैन पाठशाला सभा अध्यक्ष विजय कोचर, जैन महासभा के पूर्व अध्यक्ष इन्दरचंद सुराणा, पुखराज चोपड़ा और शुभकरण बोथरा ने विचार रखे। वक्ताओं ने संस्थापक हीरालाल आंचलिया और बाद के अध्यक्षों तथा पदाधिकारियों के योगदान को याद किया। इस दौरान निवर्तमान अध्यक्ष स्व. चम्पालाल डागा, पूर्व अध्यक्ष टोडरमल लालाणी, पूर्व मंत्री इन्दरचंद दुग्गड़ और ट्रस्टी स्व. सम्पतलाल दुग्गड़ के योगदान का भी स्मरण किया गया। समारोह में समाज की पुरानी विकास यात्रा और वर्तमान विस्तार को जोड़ा गया।

आयोजन में सहयोग देने वालों में ट्रस्टी पीयूष लूणीया, धर्मचंद चोपड़ा, अरिहंत नाहटा और इन्दर चंद मालू के साथ विजेंद्र छाजेड, सुधीर लुणावत, दिलीप सिरोहिया और मनोज छाजेड का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन ट्रस्टी मनीष बाफना ने किया और आभार सहमंत्री किशन बैद ने जताया। समारोह में मौजूद लोगों ने समाज के विकास में सामूहिक सहयोग की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। अंत में राष्ट्रगान के संगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ और सभी सहयोगियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

करीब 100 साल की विरासत

ट्रस्टी मनीष बाफना ने बताया कि श्री नई ओसवाल पंचायती प्रन्यास गंगाशहर की स्थापना आधिकारिक रूप से 1933 में हुई थी और इससे पहले से ही इसकी गतिविधियां संचालित होती रही हैं। संस्थान अपने लगभग 100 साल के सफर में कई तरह की सामाजिक और जनहितकारी गतिविधियां करता रहा है। प्रन्यास विवाह और अन्य आयोजनों के लिए उचित मूल्य पर सुविधायुक्त भवन उपलब्ध कराने के साथ होम्योपैथिक सेवा सदन तथा व्यवसाय के लिए रियायती किराये पर दुकान जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।

आनंदम विंग के निर्माण को इसी लंबी विकास यात्रा की अगली कड़ी बताया गया। मनीष बाफना के अनुसार संस्थापक हीरालाल आंचलिया के सभापति कार्यकाल से शुरू हुई विकास यात्रा में सभी सभापतियों, अध्यक्षों, मंत्रियों, पदाधिकारियों और ट्रस्टियों का योगदान रहा है। निवर्तमान अध्यक्ष स्व. चम्पालाल डागा के कार्यकाल में आनंदम विंग का निर्माण पूरा हुआ। 80 भामाशाहों के सहयोग से तैयार आनंदम विंग समाज के सामूहिक प्रयास और विकास की सोच का उदाहरण बनकर सामने आई है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। संस्थान के इतिहास, सुविधाओं और आनंदम विंग से संबंधित विवरण उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं और स्वतंत्र रूप से सभी अभिलेखों का सत्यापन नहीं किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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