WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

आईएनएस निपुण से बढ़ेगी नौसेना की ताकत, गहरे समुद्र में नया दम

आईएनएस निपुण आज भारतीय नौसेना की ताकत में बड़ा इजाफा करने जा रहा है। 75% स्वदेशी, इस विशेष पोत से गहरे समुद्र में गोताखोरी और पनडुब्बी बचाव क्षमता मजबूत होगी।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg
आईएनएस निपुण

आईएनएस निपुण

मुंबई, महाराष्ट्र। आईएनएस निपुण आज भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहा है। यह निस्तार श्रेणी का दूसरा Diving Support Vessel है जिसे विशाखापत्तनम की हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने बनाया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन कमीशनिंग समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक यह पोत गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के नीचे हस्तक्षेप और पनडुब्बी बचाव जैसे मुश्किल अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसकी तैनाती पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में होगी और यह नौसेना की विशेष समुद्री क्षमताओं को नई मजबूती देगा। [विडियो]

गहरे समुद्र का योद्धा

आईएनएस निपुण को सामान्य युद्धपोत की तरह हथियारों से ज्यादा विशेषज्ञ समुद्री अभियानों के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक डाइविंग सिस्टम लगाए गए हैं जो लंबे और कठिन डीप सी ऑपरेशन में गोताखोरों को सहायता दे सकते हैं। जहाज में Saturation Diving की सुविधा भी है। इसके अलावा Remote Operated Vehicles पानी के नीचे निगरानी और बचाव से जुड़े काम में मदद करेंगे। यानी जहां सामान्य जहाजों के लिए पहुंचना मुश्किल हो सकता है वहां यह पोत विशेष टीम और उपकरणों के साथ काम कर सकेगा।

इस जहाज की सबसे अहम भूमिकाओं में पनडुब्बी बचाव अभियान शामिल है। आईएनएस निपुण को Deep Submergence Rescue Vessel के लिए मदर शिप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी पनडुब्बी में आपात स्थिति आने पर बचाव प्रणाली को समुद्र में तेजी से पहुंचाने और अभियान को लंबे समय तक सहारा देने में यह पोत उपयोगी होगा। नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक इस तरह की क्षमता समुद्र के नीचे होने वाले अभियानों में बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां समय और सटीकता दोनों की बड़ी भूमिका होती है।

300 मीटर तक डाइविंग

आईएनएस निपुण की एक खास क्षमता 300 मीटर तक Saturation Diving और Mixed Diving को सपोर्ट करना है। इतने गहरे पानी में काम करने के लिए जहाज का अपनी जगह पर बेहद स्थिर रहना जरूरी होता है। इसके लिए इसमें Dynamic Positioning System लगाया गया है जो जहाज को एंकर के बजाय आधुनिक तकनीक से एक निश्चित स्थान पर बनाए रखता है। अधिकारियों के मुताबिक यह स्थिति एक मीटर से भी कम सटीकता के साथ बनाए रखने की क्षमता रखती है। इससे गहरे पानी में बचाव और अंडरवाटर हस्तक्षेप के दौरान ऑपरेशन अधिक नियंत्रित हो सकता है।

आईएनएस निपुण की भूमिका सिर्फ गोताखोरों को समुद्र तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है। इसे अंडरवाटर इंटरवेंशन, निगरानी और समुद्री बचाव के लिए एक एकीकृत प्लेटफॉर्म के तौर पर तैयार किया गया है। जहाज में नेविगेशन, प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट और मेडिकल सपोर्ट जैसी सुविधाएं भी हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसे कठिन समुद्री परिस्थितियों में लंबे अभियानों के लिए तैयार किया गया है। यही वजह है कि नौसेना इसे अपनी विशेष डीप सी ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के रूप में देख रही है।

स्वदेशी ताकत का संदेश

आईएनएस निपुण की एक बड़ी खासियत इसका स्वदेशी निर्माण है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने इसे विशाखापत्तनम में तैयार किया है और इसमें 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री होने की बात नौसेना ने कही है। यह आंकड़ा केवल निर्माण क्षमता का संकेत नहीं है बल्कि जटिल रक्षा पोतों के क्षेत्र में घरेलू तकनीक और उद्योग की बढ़ती भूमिका भी दिखाता है। जहाज को 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। अब कमीशनिंग के बाद इसका निर्माण से वास्तविक ऑपरेशनल सेवा तक का सफर पूरा होगा।

आईएनएस निपुण के शामिल होने से भारतीय नौसेना की डीप सी डाइविंग, अंडरवाटर इंटरवेंशन और पनडुब्बी बचाव क्षमता को एक साथ मजबूती मिलेगी। समुद्र के नीचे होने वाले अभियानों में सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि स्थिरता, प्रशिक्षित गोताखोर और भरोसेमंद बचाव प्रणाली की जरूरत होती है। यह पोत इन सभी जरूरतों को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है। पश्चिमी समुद्री तट पर इसकी तैनाती भारत की समुद्री सुरक्षा और विशेष अभियानों की तैयारी के लिए अहम मानी जा रही है। आईएनएस निपुण इस तरह नौसेना की गहराई में पहुंच और बचाव क्षमता का नया आधार बनेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त आधिकारिक स्रोतों और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। जहाज की परिचालन क्षमताओं से संबंधित तकनीकी विवरण आधिकारिक रूप से उपलब्ध जानकारी और अधिकारियों के बयानों पर आधारित हैं तथा वास्तविक अभियानों में परिस्थितियों के अनुसार क्षमताएं अलग हो सकती हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief