राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों की हड़ताल, जज पर गंभीर आरोप
राजस्थान हाईकोर्ट में वकीलों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ प्रदर्शन किया। केस लिस्टिंग और प्रशासनिक शक्तियों को लेकर आरोपों से विवाद बढ़ा।

प्रतीकात्मक फोटो
जयपुर, राजस्थान। राजस्थान हाईकोर्ट में सोमवार को अधिवक्ताओं ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया। वकीलों ने उन पर प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग और मामलों की लिस्टिंग में हेरफेर के आरोप लगाए। जयपुर और जोधपुर पीठ में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंची। हाईकोर्ट परिसर में वकील नारे लगाते और अपनी फाइलों के साथ गलियारे में बैठकर विरोध करते नजर आए। यह घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप मेहता के पत्रों के बाद सामने आया है। [1]
वकीलों का विरोध
राजस्थान हाईकोर्ट के जयपुर और जोधपुर परिसरों में सोमवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्र हुए। सामने आए वीडियो में वकील गलियारे में नारे लगाते दिखाई दिए। कुछ प्रदर्शनकारी अपनी फाइलों के साथ वहीं बैठ गए और विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। स्थिति को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का प्रयास किया। विरोध के कारण हाईकोर्ट परिसर में माहौल तनावपूर्ण नजर आया और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई।
यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप मेहता की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को लिखे गए पत्रों के बाद हुआ है। न्यायमूर्ति मेहता ने पत्रों में न्यायमूर्ति शर्मा पर मामलों की लिस्टिंग में कथित हेरफेर और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से राजस्थान हाईकोर्ट की अगुवाई के लिए किसी अन्य राज्य से मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने का आग्रह भी किया था। इन पत्रों के बाद सामने आए अधिवक्ताओं के विरोध ने केस लिस्टिंग और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सीजेआई ने दिया जवाब
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायमूर्ति संदीप मेहता के पत्रों में उठाई गई चिंताओं पर प्रतिक्रिया दी है। सीजेआई ने कहा कि उन्होंने पत्रों में उठाए गए मुद्दों का पहले ही संज्ञान ले लिया है। उनकी ओर से जारी प्रेस बयान में कहा गया कि किसी मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों से स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही निपटा जाना चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि सीजेआई और कॉलेजियम के अन्य सदस्य शेष हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर काम कर रहे हैं।
सीजेआई सूर्यकांत ने अपने बयान में संस्थागत प्रक्रिया के पालन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने न्यायमूर्ति मेहता की ओर से उठाई गई चिंताओं का संज्ञान लिए जाने की बात कही। साथ ही मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों से निपटने के लिए निर्धारित व्यवस्था को ही उचित रास्ता बताया। इस बीच राजस्थान हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं का विरोध सामने आने से मामला और चर्चा में आ गया है। उपलब्ध तथ्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई संबंधित संस्थागत प्रक्रिया के तहत होने की बात कही गई है और आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। रिपोर्ट में उल्लिखित आरोप संबंधित पक्षों पर लगाए गए आरोप हैं और इन्हें अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।