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भाजपा ने खोले पत्ते, पुराने दिग्गज बाहर, नए चेहरों को कमान

भाजपा ने खोले पत्ते, 80 वार्डों में पुराने चेहरों को किनारे कर नए प्रत्याशियों पर भरोसा जताया, अब बागियों को मनाना और बोर्ड बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

By अजय त्यागी
1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

बीकानेर, राजस्थान। भाजपा ने नगर निगम चुनाव के नामांकन के अंतिम दिन 80 वार्डों के अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी कर सस्पेंस खत्म कर दिया। इसके बाद सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड 75 को लेकर हो रही है जहां अंतिम सूची में महावीर रांका का नाम नहीं है और विशाल गोलछा को प्रत्याशी बनाया गया है। इससे पहले रांका के वार्ड 75 से चुनाव लड़ने की खबर सामने आई थी जिसके लिए उन्होंने बाकायदा तैयारी भी शुरू कर दी थी। अंतिम सूची में बदलाव ने पार्टी के टिकट वितरण और अंदरूनी समीकरणों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। 

नए चेहरों की रणनीति

टिकटों के बंटवारे में भाजपा ने कई वार्डों में नए चेहरों को आगे किया है। इसे स्थानीय स्तर पर नाराजगी कम करने और पुराने समीकरणों से बाहर निकलने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। वार्ड आरक्षण के बाद 80 में से 9 वार्ड अनुसूचित जाति और 16 वार्ड अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए रखे गए हैं जबकि 37 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए अनारक्षित और 18 सामान्य वर्ग महिलाओं के लिए अनारक्षित हैं। महापौर पद भी सामान्य वर्ग के लिए खुला है। इसलिए सामान्य वार्डों में मजबूत उम्मीदवार उतारने का असर सिर्फ पार्षद चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा। 

मेयर पद पर नजर 

महापौर पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होने के बाद टिकट वितरण में जिताऊ चेहरों की अहमियत बढ़ गई है। भाजपा के लिए ऐसे उम्मीदवार चुनना जरूरी है जो अपने वार्ड में जीत के साथ आगे चलकर संगठन के बड़े राजनीतिक समीकरणों में भी उपयोगी साबित हो सकें। यही वजह है कि सामान्य वार्डों के टिकटों पर स्थानीय राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। सूची में अलग अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी दिखाई देती है। वोट बैंक के अनुसार भी सूचि में चेहरों का चयन स्पष्ट दिखाई देता है। 

बागियों की चुनौती

सूची जारी होने के साथ भाजपा के सामने अब सबसे कठिन परीक्षा शुरू होगी। टिकट की उम्मीद लगाए बैठे कई दावेदारों ने नामांकन दाखिल किया था और अंतिम समय तक कुछ वार्डों में उम्मीदवारों को लेकर असमंजस भी बना रहा। अब जिन नेताओं को टिकट नहीं मिला है उनके निर्दलीय मैदान में उतरने या समर्थकों के साथ नाराजगी दिखाने की संभावना से पार्टी को निपटना होगा। खासकर उन वार्डों में बगावत का असर पड़ सकता है जहां मुकाबला पहले से करीबी माना जा रहा है। नामांकन वापसी के बाद वास्तविक तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

बोर्ड पर नजर

भाजपा का लक्ष्य सिर्फ ज्यादा से ज्यादा पार्षद जिताना नहीं बल्कि नगर निगम में अपना बोर्ड बनाना भी है। इसके लिए पार्टी को नए उम्मीदवारों के पक्ष में संगठन को एकजुट रखना होगा और टिकट से नाराज नेताओं को साधना होगा। दूसरी तरफ कांग्रेस के साथ RLP और CPI जैसे दल भी स्थानीय समीकरणों को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेंगे। नामांकन वापसी के बाद मुकाबले की असली तस्वीर सामने आएगी और तभी पता चलेगा कि भाजपा की नई रणनीति कितनी असरदार रही।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। उम्मीदवारों की राजनीतिक संभावनाओं, गुटीय समीकरणों और बगावत की आशंकाओं से जुड़े निष्कर्ष उपलब्ध सूचनाओं और चुनावी घटनाक्रम के विश्लेषण पर आधारित हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief