शूटिंग कैंप का समापन, बच्चों और युवाओं ने सीखी निशानेबाजी की बारीकियां
नोखा में 10 दिवसीय शूटिंग कैंप का समापन हुआ, बच्चों, महिलाओं और युवाओं ने निशानेबाजी सीखी और प्रमाण पत्र लेकर नई उम्मीद के साथ लौटे।

शूटिंग कैंप का समापन
नोखा(बीकानेर), राजस्थान। जैन एसोसिएशन ऑफ यूथ की ओर से आयोजित 10 दिवसीय टारगेट एक्स शूटिंग प्रशिक्षण शिविर का सफल समापन हुआ। मरोठी चौक स्थित फर्स्ट ट्रिगर शूटिंग अकादमी में हुए इस शिविर में बच्चों, महिलाओं और युवाओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से प्रमाणित कोच पवित्रा भादू ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया। शूटिंग कैंप के दौरान प्रतिभागियों ने निशानेबाजी की तकनीक समझने के साथ एकाग्रता, धैर्य और अनुशासन जैसे जरूरी गुणों पर भी अभ्यास किया।
निशाने पर नजर
शिविर के दौरान प्रतिभागियों को शूटिंग खेल की बुनियादी तकनीकों से लेकर निशाना साधने तक का अभ्यास कराया गया। लगातार अभ्यास के जरिए प्रतिभागियों की एकाग्रता और धैर्य को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया। आयोजकों के अनुसार निशानेबाजी केवल लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का खेल नहीं है बल्कि इसमें अनुशासन और मानसिक संतुलन की भी जरूरत होती है। प्रशिक्षण में बच्चों और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और खेल की बारीकियों को समझने की कोशिश की। महिलाओं की भागीदारी ने भी शिविर को व्यापक बनाया।
शिविर में जैन समाज के सदस्यों ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की। आयोजकों का उद्देश्य प्रतिभागियों को खेल गतिविधियों से जोड़ने के साथ नई प्रतिभाओं को सामने लाना रहा। शूटिंग कैंप के माध्यम से बच्चों और युवाओं को एक ऐसा मंच मिला जहां वे नियमित अभ्यास के जरिए अपने कौशल को समझ और निखार सके। प्रशिक्षण के दौरान धैर्य से लक्ष्य पर ध्यान रखने और तय तकनीक के अनुसार अभ्यास करने पर जोर रहा। इससे प्रतिभागियों में आत्मविश्वास बढ़ाने और खेल के प्रति रुचि पैदा करने की दिशा में भी सकारात्मक माहौल बना।
प्रमाण पत्र से उत्साह
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सहभागिता के प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण पत्र मिलने से प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ा और उन्हें अपने सीखे कौशल को आगे जारी रखने की प्रेरणा मिली। आयोजकों ने इस पहल को बच्चों, महिलाओं और युवाओं को खेलों से जोड़ने की दिशा में उपयोगी कदम बताया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने सिर्फ निशानेबाजी की तकनीक नहीं सीखी बल्कि एकाग्रता और अनुशासन को भी अभ्यास का हिस्सा बनाया। इन गुणों का असर खेल के साथ व्यक्तिगत आत्मविश्वास पर भी पड़ सकता है।
जय की पहल का अगला मकसद नई प्रतिभाओं को लगातार अवसर देना और खेल गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाना है। 10 दिन के प्रशिक्षण के बाद अब प्रतिभागियों के सामने सीखी तकनीकों को नियमित अभ्यास में बदलने की चुनौती रहेगी। शूटिंग कैंप की सफलता का असली आकलन आगे होने वाले अभ्यास और प्रतिभागियों की खेल उपलब्धियों से होगा। इस आयोजन ने यह जरूर दिखाया कि सामुदायिक संगठन यदि खेल गतिविधियों को मंच दें तो बच्चों, महिलाओं और युवाओं को नई दिशा मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर निशानेबाजी को लेकर रुचि बढ़ने की उम्मीद है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रशिक्षण शिविर में प्रतिभागियों के कौशल और आत्मविश्वास में सुधार से संबंधित बातें आयोजकों द्वारा बताए गए उद्देश्य और कार्यक्रम की प्रकृति पर आधारित हैं तथा इनके दीर्घकालिक परिणामों का स्वतंत्र मूल्यांकन नहीं किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।