फैक्ट्री ब्लास्ट का खौफ, 11 मौतों में 8 बच्चे, सुरक्षा पर बड़ा सवाल
फैक्ट्री ब्लास्ट ने 11 जिंदगियां छीन लीं, इनमें 8 मासूम बच्चे थे 5 लोग गंभीर घायल हैं। लाइसेंस रद्द होने के बाद भी फैक्ट्री चलने का सवाल सबसे बड़ा बन गया है।

फैक्ट्री ब्लास्ट
मोहम्मदपुर मनौरी, उत्तर प्रदेश। सोमवार दोपहर हुआ फैक्ट्री ब्लास्ट देखते ही देखते मौत के मंजर में बदल गया। कौशांबी के मोहम्मदपुर मनौरी गांव में पटाखा निर्माण इकाई पूरी तरह जमींदोज हो गई और 11 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 8 बच्चे शामिल हैं। 5 गंभीर घायल प्रयागराज के SRN अस्पताल में भर्ती हैं। धमाके की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आसपास के 5 से 6 मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। रेल लाइन के पास हुए विस्फोट से दिल्ली हावड़ा मार्ग पर ट्रेन संचालन भी करीब एक घंटे प्रभावित रहा। [1] [विडियो]
लाइसेंस पर सवाल
सबसे चुभने वाला सवाल यह है कि जिस इकाई को चलाने की अनुमति ही नहीं थी वहां बारूद का कारोबार कैसे चलता रहा। अधिकारियों के मुताबिक फैक्ट्री को 2019 में विस्फोटक लाइसेंस मिला था और वह 2026 तक वैध था लेकिन 2024 में ही लाइसेंस रद्द कर दिया गया। इसके बावजूद कारोबार जारी रहा। यानी कागज पर खतरा खत्म हो चुका था लेकिन जमीन पर बारूद जमा होता रहा। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नियमों की अनदेखी किसकी निगरानी में हुई।
फैक्ट्री ब्लास्ट ने सिर्फ एक इमारत नहीं गिराई बल्कि उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा कर दिया जो कागज पर सुरक्षा और जमीन पर लापरवाही के बीच आराम से चलती रहती है। अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री के आसपास रहने वाले लोग ही इस त्रासदी की सबसे बड़ी कीमत चुकाने वालों में रहे। 11 मृतकों में 8 बच्चे थे और 5 गंभीर घायल अस्पताल में हैं। बारूद की फैक्ट्री के पास घर और परिवार बसते रहे तो सवाल सिर्फ मालिक पर नहीं बल्कि निगरानी की पूरी व्यवस्था पर उठना तय है।
अब कार्रवाई का दौर
धमाके के बाद पुलिस ने 6 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपियों में फैक्ट्री संचालक भी शामिल है और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगाई गई हैं। मलबा हटाने और किसी संभावित व्यक्ति की तलाश के लिए NDRF, SDRF, पुलिस, दमकल और अन्य बचाव दल जुटे रहे। यानी हादसे के बाद मशीनें और टीमें तेजी से पहुंचीं। सवाल बस इतना है कि अगर यही तेजी निरीक्षण के समय दिखाई देती तो शायद आज मलबे से जिंदगी तलाशने की नौबत ही नहीं आती।
सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक जताते हुए PMNRF से यही सहायता घोषित की। लेकिन सरकारी मदद किसी परिवार के लौटे हुए बच्चे की जगह नहीं ले सकती। फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद सबसे जरूरी जांच यही है कि लाइसेंस रद्द होने के बावजूद उत्पादन और भंडारण कैसे चलता रहा। अगर जवाब सिर्फ कुछ गिरफ्तारियों तक सीमित रहा तो अगली बार बारूद वही होगा, धमाका नया होगा और मलबे में फिर किसी मासूम का घर मिलेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। घटना की जांच अभी जारी है और मृतकों, घायलों, लाइसेंस की स्थिति तथा जिम्मेदारी से जुड़े कुछ तथ्य जांच के अंतिम निष्कर्ष के साथ बदल सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
Kaushambi, Uttar Pradesh: Morning visuals from the firecracker factory blast site. The incident has claimed 11 lives so far. pic.twitter.com/dXrDqoymxs
— IANS (@ians_india) September 1, 2026