WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

विजय शाह मामला: SIT जांच पूरी, राज्यपाल के फैसले से नई सियासी हलचल

विजय शाह मामला अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां SIT की जांच पूरी हो चुकी है और राज्यपाल ने अभियोजन की मंजूरी नहीं देने की कैबिनेट सिफारिश स्वीकार कर ली है।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली। विजय शाह मामला अब राजनीतिक फैसले और न्यायिक प्रक्रिया के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देने के कैबिनेट प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला उस दिन आया जब सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई और राज्य सरकार ने बताया कि SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है। अदालत को यह भी बताया गया कि अभियोजन की मंजूरी का प्रस्ताव राज्यपाल के पास लंबित था।   [1]

फैसले से पहले क्या हुआ

मध्य प्रदेश कैबिनेट ने 25 अगस्त को ही विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देने का फैसला किया था। इसके बाद प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा गया। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि निर्णय जल्द होने की उम्मीद है। अदालत ने यह भी समझना चाहा कि मंजूरी मिलने या न मिलने के बाद जांच एजेंसी का अगला कदम क्या होगा। SIT ने स्पष्ट किया कि मंजूरी मिलती है तो आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा और मंजूरी नहीं मिलती तो क्लोजर रिपोर्ट पेश की जाएगी। 

इसके कुछ ही घंटे बाद राज्यपाल ने कैबिनेट की सिफारिश पर अपनी सहमति दे दी। यानी फिलहाल सरकार की ओर से विजय शाह के खिलाफ अभियोजन आगे बढ़ाने का रास्ता बंद हो गया है। मामला हालांकि यहीं खत्म हो जाता है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। क्योंकि इस पूरे घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी, SIT की रिपोर्ट और अभियोजन मंजूरी की संवैधानिक प्रक्रिया पहले ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी है। अब आगे अदालत में इस फैसले और उसके कानूनी असर को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

विजय शाह मामला उन टिप्पणियों से जुड़ा है जो उन्होंने मई 2025 में महू क्षेत्र के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में की थीं। उनकी टिप्पणी का संबंध कर्नल सोफिया कुरैशी से जोड़ा गया, जो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की मीडिया ब्रीफिंग में प्रमुख चेहरों में शामिल थीं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 14 मई 2025 को स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और 19 मई को शीर्ष अदालत ने शाह को अंतरिम गिरफ्तारी संरक्षण देते हुए 3 वरिष्ठ IPS अधिकारियों की SIT गठित की थी। 

SIT ने जांच के बाद अभियोजन की मंजूरी मांगी थी और यह रिपोर्ट अगस्त 2025 से राज्य सरकार के पास थी। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने देरी पर सवाल उठाते हुए राज्य को निर्णय लेने को कहा था। मई 2026 में भी अदालत ने सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। अब अगस्त के अंत में कैबिनेट ने मंजूरी रोकने का फैसला किया और राज्यपाल ने उसे स्वीकार कर लिया। यानी जिस फाइल पर लंबे समय से फैसला टल रहा था, उस पर आखिरकार निर्णय तो आया, लेकिन अब उसकी संवैधानिक और न्यायिक व्याख्या पर नजर रहेगी। 

अब आगे की लड़ाई

विजय शाह मामला अब केवल एक मंत्री की विवादित टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा है। इसमें यह बड़ा सवाल भी जुड़ गया है कि अभियोजन की मंजूरी से जुड़े मामले में राज्य सरकार और राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका की सीमा क्या है। कांग्रेस की ओर से राज्यपाल से इस फैसले पर हस्तक्षेप की मांग किए जाने की तैयारी है। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने मध्य प्रदेश के 2004 के एक पुराने मामले का हवाला दिया है जिसमें अभियोजन मंजूरी को लेकर राज्यपाल की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी।

फिलहाल तस्वीर इतनी साफ है कि सरकार ने अभियोजन की मंजूरी रोकने का फैसला किया है और राज्यपाल ने उस सिफारिश को स्वीकार कर लिया है। लेकिन विजय शाह मामला अभी कानूनी बहस से बाहर नहीं हुआ है। SIT की जांच पूरी है और अगर मंजूरी नहीं मिलने के आधार पर क्लोजर रिपोर्ट आती है तो उसके बाद भी संबंधित पक्ष कानूनी रास्ता अपना सकते हैं। इसलिए इस कहानी का फिलहाल राजनीतिक अध्याय जरूर आगे बढ़ गया है, लेकिन न्यायिक अध्याय पर पूर्ण विराम लगा है या नहीं, यह आने वाले कदम तय करेंगे।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अभियोजन की मंजूरी से जुड़े संवैधानिक और न्यायिक प्रश्नों पर अंतिम स्थिति संबंधित अदालतों और सक्षम संवैधानिक प्राधिकारियों के आगे के निर्णयों पर निर्भर करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief