एटीएफ दाम बढ़े, हवाई टिकट महंगे होने की आहट, यात्रियों की चिंता
एटीएफ दाम बढ़े और विमान ईंधन 121.28 रुपये लीटर हुआ। लगातार दूसरी बढ़ोतरी से एयरलाइंस की लागत बढ़ी और हवाई किराये पर दबाव बढ़ा है।


प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। एटीएफ दाम बढ़े और घरेलू एयरलाइंस के लिए विमान ईंधन लगातार दूसरे महीने महंगा हो गया। 1 सितंबर से इसकी कीमत 6.28 रुपये प्रति लीटर बढ़कर 121.28 रुपये हो गई है। यह 5.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। NDTV Profit की एक रिपोर्ट के अनुसार, IOC के सूत्रों ने नई दर की जानकारी दी है। अगस्त में भी ATF की कीमत करीब 5 रुपये प्रति लीटर बढ़ी थी। लगातार दूसरी बढ़ोतरी से एयरलाइंस की लागत बढ़ी है और हवाई किराये पर दबाव बढ़ने की आशंका है। [1]
ईंधन का बढ़ा बोझ
भारत में ATF एयरलाइंस के परिचालन खर्च का करीब 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। इसलिए यदि एटीएफ दाम बढ़े तो कंपनियों का ईंधन बिल बढ़ता है और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। जुलाई में ATF की कीमत 5 रुपये प्रति लीटर घटाई गई थी लेकिन अगस्त और सितंबर में लगातार बढ़ोतरी हुई। इससे एयरलाइंस के लिए लागत संभालना चुनौती बन गया है। लंबे और ज्यादा ईंधन खपत वाले रूट पर इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है। कंपनियों को अब खर्च और किराये के बीच संतुलन साधना होगा।
एटीएफ दाम बढ़े तो इसका पूरा बोझ यात्रियों पर तुरंत डाला जाएगा यह जरूरी नहीं है। एयरलाइंस टिकट की कीमत तय करते समय यात्री मांग, उपलब्ध सीटें, बुकिंग का समय और रूट पर प्रतिस्पर्धा जैसे कई पहलू देखती हैं। ज्यादा मांग और सीमित सीट वाले रूट पर किराया बढ़ सकता है। वहीं कड़ी प्रतिस्पर्धा होने पर कंपनियां बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा खुद उठा सकती हैं। इसलिए ईंधन महंगा होने के बावजूद हर उड़ान का टिकट तुरंत महंगा होना तय नहीं है। असर एयरलाइन और रूट के हिसाब से अलग हो सकता है।
कच्चे तेल की तेजी
ATF की ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भी मजबूती आई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल कारोबार का अहम रास्ता है और वहां संभावित व्यवधान की आशंका से बाजार प्रभावित हुआ है। WTI कच्चा तेल 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा जबकि Brent करीब 90 डॉलर के स्तर पर रहा। अगर कच्चा तेल महंगा बना रहता है तो भारतीय एयरलाइंस की ईंधन लागत पर आगे भी दबाव रह सकता है।
बाजार आधारित दरों पर ATF खरीदने वाली एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार चढ़ाव का असर झेलना पड़ता है। तेल महंगा रहने पर कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है लेकिन बढ़ी लागत को तुरंत टिकट किराये में डालना आसान नहीं होता। मांग और प्रतिस्पर्धा भी किराया तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। सरकार ने कीमतों के उतार चढ़ाव से बचने के लिए तय दर वाली व्यवस्था का विकल्प दिया है। इसमें शामिल होने वाली घरेलू एयरलाइंस 115 रुपये प्रति लीटर की तय दर पर अधिकतम 3 साल तक कीमत लॉक कर सकती हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ATF की कीमत बढ़ने से हवाई किराये पर दबाव पड़ सकता है लेकिन वास्तविक टिकट कीमत मांग, प्रतिस्पर्धा, सीट उपलब्धता, रूट और एयरलाइन की व्यावसायिक नीति पर निर्भर करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।