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बर्खास्तगी रद्द, अफसर बहाल, कोर्ट ने बिना जांच कार्रवाई पर उठाए सवाल

बर्खास्तगी रद्द होने के बाद J&K बैंक के अफसर को बड़ी राहत मिली। हाईकोर्ट ने बिना जरूरी जांच सेवा से हटाने के आदेश पर सवाल उठाए।

By अजय त्यागी
1 min read
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डिप्टी जनरल मैनेजर सादत हुसैन पंपोरी

डिप्टी जनरल मैनेजर सादत हुसैन पंपोरी

श्रीनगर, जम्मू कश्मीर। बर्खास्तगी रद्द करने का जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट का फैसला उस मामले में आया है जिसमें जम्मू कश्मीर बैंक के डिप्टी जनरल मैनेजर सादत हुसैन पंपोरी को कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोप में सेवा से हटा दिया गया था। जस्टिस संजय धर की अदालत ने 15 जुलाई 2024 के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास बिना जरूरी जांच के ऐसी कठोर कार्रवाई करने का समान अधिकार नहीं है।  [1]

जांच पर उठे सवाल

पंपोरी पर आरोप लगाया गया था कि वह सोशल मीडिया पर टॉर्चर कश्मीर अभियान चलाने में शामिल थे और इससे देश की संप्रभुता तथा अखंडता के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश हुई। बैंक ने उनके खिलाफ कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में नियमित विभागीय जांच जरूरी नहीं है। पंपोरी ने अदालत में कहा कि उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई और किसी जांच में उनकी भूमिका स्थापित नहीं की गई। इसी दलील के बीच अदालत ने बर्खास्तगी के आधार की पड़ताल की।

अदालत ने गोपनीय रिपोर्ट की जांच की तो उसमें संवेदनशील सूत्रों से मिली जानकारी, गोपनीय पूछताछ और सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख मिला। लेकिन कोर्ट को ऐसा रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि गवाहों के बयान दर्ज किए गए या नियमों के मुताबिक जरूरी सबूत जुटाकर जांच पूरी की गई। अदालत ने साफ किया कि केवल सूत्रों से मिली जानकारी और गोपनीय पूछताछ को नियम में मांगी गई जांच नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर बर्खास्तगी रद्द कर दी गई और पंपोरी को उनकी पिछली सेवा स्थिति में वापस रखने का निर्देश दिया गया।

बैंक के पास विकल्प

अदालत ने हालांकि यह भी साफ किया कि बैंक के हाथ पूरी तरह बंधे नहीं हैं। फैसला रद्द होने के बाद बैंक चाहे तो संबंधित नियमों के तहत जरूरी प्रक्रिया पूरी करके पंपोरी के खिलाफ नए सिरे से कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा बैंक नियमित विभागीय जांच भी आगे बढ़ा सकता है। अदालत ने यह भी माना कि पहले जारी निलंबन आदेश के आधार पर विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता खुला रहेगा। यानी फैसला आरोपों को सही या गलत घोषित करने के बजाय बिना जरूरी प्रक्रिया की गई कार्रवाई को कानूनी कसौटी पर परखता है।

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जम्मू कश्मीर में कथित अलगाववादी विचारधारा और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोपों को लेकर कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में बैंक के वरिष्ठ अधिकारी को मिली प्रशासनिक शक्ति और संवैधानिक पदाधिकारियों की असाधारण शक्तियों के बीच फर्क किया। बर्खास्तगी रद्द होने से पंपोरी को फिलहाल राहत मिली है लेकिन उनके मामले में आगे की विभागीय या नियम आधारित कार्रवाई का विकल्प खुला है। अंतिम स्थिति आगे की प्रक्रिया से तय होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अदालत द्वारा बर्खास्तगी रद्द किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित आरोपों को अदालत ने सही या गलत साबित कर दिया है बल्कि फैसला मुख्य रूप से अपनाई गई प्रक्रिया और जांच की वैधानिकता से जुड़ा है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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