JPSC भर्ती घोटाला में बड़ा खुलासा, होटल में लिखी गई आंसर शीट
JPSC भर्ती घोटाला में CID को चौंकाने वाले सुराग मिले। स्ट्रॉन्ग रूम से आंसर शीट निकालने, होटल में दोबारा लिखने और सॉफ्टवेयर से रिजल्ट बदलने के आरोप हैं।

प्रतीकात्मक फोटो
रांची, झारखंड। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी ने एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में परीक्षा परिणामों में सॉफ्टवेयर के जरिए कथित हेरफेर से लेकर सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम से आंसर शीट निकालकर उन्हें दोबारा लिखने के आरोप सामने आए हैं। गिरफ्तार कर्मचारियों परीक्षा एजेंसियों के निदेशकों और बिचौलियों से पूछताछ के दौरान इन गतिविधियों से जुड़े कई दावे सामने आए। IANS के अनुसार सीआईडी अब तकनीकी साक्ष्यों सर्वर लॉग और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है। [1]
सॉफ्टवेयर से रिजल्ट बदला
जांच में सामने आया कि परीक्षा कराने वाली आउटसोर्स एजेंसियों पर कथित तौर पर ऐसे सॉफ्टवेयर और ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने का आरोप है जिनसे परीक्षा परिणाम प्रभावित किए जा सकते थे। सीआईडी की एसआईटी के सामने आरोपी हेमंत वर्मा ने कथित तौर पर बताया कि टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लोगों ने वर्ष 2025 में जेपीएससी परीक्षाओं के लिए कस्टमाइज्ड सॉफ्टवेयर तैयार कराया था। आरोप है कि इसके जरिए परीक्षा से पहले पसंदीदा उम्मीदवारों की पहचान और बाद में डेटाबेस में उनके उत्तर बदलने की व्यवस्था की गई और यह भर्ती घोटाला किया गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक मुख्य परीक्षा की आंसर शीट भी कथित नेटवर्क के निशाने पर थीं। आरोप है कि परीक्षा के बाद सभी उत्तर पुस्तिकाएं जेपीएससी कार्यालय के सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में रखी गईं। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों की खाली आंसर शीट कथित तौर पर गुप्त तरीके से बाहर निकाली गईं। जांच में सामने आए बयानों के अनुसार भर्ती घोटाला करने में टीडीपीएल के निदेशकों रामवीर सिंह, सत्यपाल सिंह, प्रदीप कुमार सिंह और मोहम्मद उस्मानी ने इन शीट्स को विशेषज्ञों तक पहुंचाया। इसके बाद होटल और किराये के मकानों में उत्तर लिखे जाने का आरोप है।
होटल, फ्लैट में लिखी आंसर शीट
भर्ती घोटाला मामले की जांच में एक अन्य आरोपी अभय तिवारी के बयान को भी अहम माना जा रहा है। सीआईडी के अनुसार सहायक वन संरक्षक और वन क्षेत्र पदाधिकारी पदों की प्रारंभिक परीक्षा के बाद रांची के हरिओम टावर में मुख्य परीक्षा की तैयारी के नाम पर एक कमरा किराये पर लिया गया था। आरोप है कि इस कमरे में पंजाब हरियाणा और लखनऊ से विषय विशेषज्ञ बुलाए गए। इन विशेषज्ञों पर उम्मीदवारों की ओर से आंसर शीट लिखने का आरोप है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस प्रक्रिया में कितने उम्मीदवार शामिल थे और कितनी उत्तर पुस्तिकाओं में कथित बदलाव किया गया।
सीआईडी के मुताबिक उत्तर लिखवाने की प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों के अंक बढ़वाने के लिए विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों से संपर्क करने के प्रयास भी किए गए। आरोपी अभय तिवारी ने कथित तौर पर जांच में 40 लाख रुपये देने की बात कही है। यह रकम आंसर शीट लिखवाने और उम्मीदवारों को अधिक अंक दिलाने के लिए खर्च किए जाने का दावा किया गया। अब जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाने के लिए दस्तावेजों तकनीकी साक्ष्यों सर्वर रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। जांच अभी जारी है और कथित घोटाले में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। परीक्षा में कथित हेरफेर आंसर शीट बदलने और धन के लेनदेन से जुड़े सभी आरोप जांच एजेंसी के सामने आए बयानों और जांच में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं और इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।