सुनामी अलर्ट से सुरक्षा मजबूत, मछुआरों को भी मिलेगी समुद्र की जानकारी
सुनामी अलर्ट से भारत की समुद्री सुरक्षा मजबूत हुई है। वैज्ञानिक 24 घंटे नजर रख रहे हैं और मछुआरों को सैटेलाइट से समुद्र की अहम जानकारी मिल रही है।

प्रतीकात्मक फोटो
हैदराबाद, तेलंगाना। भारतीय सुनामी पूर्व चेतावनी केंद्र में वैज्ञानिक समुद्र और भूकंपीय गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों की चौबीस घंटे निगरानी करते हैं। बड़े भूकंप के बाद उसकी जगह, गहराई और तीव्रता का तेजी से आकलन किया जाता है। इसके बाद समुद्र के जलस्तर और दूसरी निगरानी सूचनाओं को वैज्ञानिक मॉडल के साथ मिलाकर सुनामी की संभावना जांची जाती है। सरकारी जानकारी के अनुसार केंद्र भूकंप की पहचान करीब 10 मिनट में कर सकता है। खतरे की स्थिति में संबंधित एजेंसियों को चेतावनी और जरूरी सलाह भेजी जाती है। [1]
समुद्र पर पैनी नजर
सुनामी अलर्ट व्यवस्था में केवल भूकंप का पता लगाना ही पर्याप्त नहीं है। वैज्ञानिकों को यह भी देखना होता है कि समुद्र में वास्तव में कोई असामान्य हलचल हुई है या नहीं। इसके लिए समुद्री जलस्तर मापने वाले उपकरणों और अन्य निगरानी प्रणालियों से लगातार आंकड़े लिए जाते हैं। इन सूचनाओं के आधार पर खतरे का स्तर तय किया जाता है। चेतावनी की स्थिति में लोगों को तट से दूर जाने और ऊंचे स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा सकती है। अंतिम निकासी आदेश स्थानीय प्रशासन जारी करता है।
सुनामी अलर्ट की यह व्यवस्था अब केवल भारत तक सीमित नहीं है। INCOIS भारतीय सुनामी सेवा प्रदाता के तौर पर हिंद महासागर क्षेत्र के देशों को सलाह उपलब्ध कराता है। आधिकारिक जानकारी में 28 देशों का उल्लेख है। संदेशों के लिए एसएमएस, ईमेल और दूसरे संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। केंद्र की लगातार निगरानी का मकसद यही है कि संभावित खतरे की सूचना वैज्ञानिक जांच के बाद संबंधित प्रशासन तक जल्द पहुंचे। इससे तटीय क्षेत्रों में तैयारी और बचाव की कार्रवाई के लिए उपलब्ध समय का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है।
मछुआरों को बड़ी मदद
सुनामी अलर्ट के साथ समुद्र से जुड़ी दूसरी सेवाएं भी मछुआरों के लिए उपयोगी साबित हो रही हैं। INCOIS सैटेलाइट से मिले समुद्री तापमान, क्लोरोफिल और दूसरे आंकड़ों के आधार पर संभावित मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों की जानकारी तैयार करता है। इससे मछुआरों को समुद्र में मछली खोजने के लिए कम समय और ईंधन खर्च करने में मदद मिल सकती है। यह जानकारी संचार माध्यमों से उपलब्ध कराई जाती है। खराब समुद्री परिस्थितियों में सुरक्षा संबंधी चेतावनियां भी मछुआरों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
टूना और हिल्सा जैसी मछलियों की संभावित उपलब्धता का अनुमान लगाने में भी आधुनिक तकनीक इस्तेमाल हो रही है। समुद्र की सतह के तापमान और क्लोरोफिल जैसे संकेतकों से संभावित क्षेत्रों की पहचान की जाती है। हिल्सा के लिए मशीन लर्निंग आधारित सलाह विकसित की गई है जबकि टूना के लिए भी अलग एडवाइजरी उपलब्ध है। इससे साफ है कि समुद्री निगरानी अब केवल आपदा प्रबंधन तक सीमित नहीं रही। वैज्ञानिक आंकड़े तटीय सुरक्षा के साथ मछुआरों की रोजमर्रा की आजीविका में भी मदद कर रहे हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। सुनामी की प्राकृतिक घटना को रोका नहीं जा सकता और कोई भी चेतावनी प्रणाली जोखिम को पूरी तरह समाप्त नहीं करती। चेतावनी मिलने पर स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचना और निर्देशों का पालन करना आवश्यक है। मछली पकड़ने संबंधी एडवाइजरी संभावित क्षेत्रों की जानकारी देती है और वास्तविक मछली पकड़ने की गारंटी नहीं होती। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।