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राहुल गांधी बनाम विजय, 2029 की PM रेस में गठबंधन के भीतर घमासान

2029 की पीएम रेस में विजय के नाम पर कांग्रेस ने साफ कहा राहुल गांधी ही पसंद हैं। TVK के रुख और सीट बदलने से गठबंधन पर सवाल और तेज हो गए हैं।

By अजय त्यागी
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प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

चेन्नई, तमिलनाडु। तमिलनाडु की सियासत में 2029 के लोकसभा चुनाव की लड़ाई अभी दूर है, लेकिन प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर घमासान अभी से शुरू हो गया है। TVK की ओर से मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को राष्ट्रीय राजनीति में आगे बढ़ाने की कोशिशों के बीच कांग्रेस ने अपना रुख साफ कर दिया है। कांग्रेस विधायक दल की नेता थरहाई कथबर्ट ने बुधवार को कहा कि पार्टी राजनीतिक तौर पर राहुल गांधी को 2029 के लिए अपनी पसंद मान चुकी है। ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने विजय की दावेदारी को लेकर TVK नेताओं की सोच पर भी सवाल उठाए।  [1]

PM पर आमने सामने

कांग्रेस विधायक थरहाई कथबर्ट ने चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि TVK नेताओं का विजय को प्रधानमंत्री पद के लिए आगे करना उनके फिल्मी प्रशंसक आधार से जुड़ा नजर आता है। उनका कहना था कि नेताओं की अपनी राय हो सकती है, लेकिन कांग्रेस का राजनीतिक फैसला अलग है। कांग्रेस के मुताबिक 2029 में राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के लिए उसका चेहरा होंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब TVK के कई नेता विजय को राज्य की राजनीति से आगे राष्ट्रीय भूमिका देने की बात लगातार उठा रहे हैं और इससे दोनों सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

विजय की दावेदारी को लेकर TVK के भीतर आवाजें इसलिए भी तेज हुई हैं क्योंकि अगस्त के India Today CVoter सर्वे में विजय 9.2 प्रतिशत समर्थन के साथ प्रधानमंत्री पद की पसंद में तीसरे स्थान पर रहे। नरेंद्र मोदी 48.7 प्रतिशत के साथ पहले और राहुल गांधी 27.1 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर थे। TVK नेता आधव अर्जुन पहले कह चुके हैं कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर दक्षिण और खासकर तमिलनाडु से नेता पहुंचना चाहिए। इन बयानों ने विजय को 2029 की राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ने वाली चर्चा को और हवा दी है।

गठबंधन में बढ़ा तनाव

मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। तमिलनाडु के पर्यटन मंत्री और कांग्रेस नेता एस. राजेश कुमार ने 30 अगस्त को कहा था कि अगर TVK 2029 में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानने को तैयार नहीं होती है तो कांग्रेस के दोनों मंत्री सरकार से बाहर हो जाएंगे। यह चेतावनी इसलिए अहम मानी गई क्योंकि कांग्रेस फिलहाल विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दे रही है। ऐसे में राज्य सरकार में साथ रहने वाले दो दलों के बीच राष्ट्रीय नेतृत्व के सवाल पर अलग राय सामने आना गठबंधन की मजबूती पर सवाल खड़े करता है।

उधर भाजपा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूछा है कि अगर TVK नेताओं के बयान राहुल गांधी की दावेदारी के खिलाफ हैं तो कांग्रेस अब तक सरकार में क्यों बनी हुई है। भाजपा प्रवक्ता सीआर केसवन ने इसी मुद्दे को राजनीतिक विरोधाभास के तौर पर उठाया है। हालांकि कांग्रेस और TVK के बीच तत्काल गठबंधन टूटने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। यही वजह है कि फिलहाल इसे बढ़ते मतभेद और दबाव की स्थिति के तौर पर देखना ज्यादा उचित होगा। राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस का रुख हालांकि लगातार स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

सीट बदली तो सवाल

31 अगस्त को थरहाई कथबर्ट की विधानसभा सीट भी चर्चा में आ गई। उन्हें पहले TVK विधायकों के लिए तय हिस्से में बैठाया जाता था, लेकिन बाद में विपक्षी बेंच की अगली पंक्ति में स्थान दिया गया। इस बदलाव को कांग्रेस और TVK के बीच बढ़ती दूरी से जोड़कर देखा गया। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष के मुताबिक कथबर्ट को कांग्रेस विधायक दल की नेता बनने के बाद कांग्रेस नेतृत्व के अनुरोध पर अगली पंक्ति की सीट दी गई थी। इसलिए सीट बदलने को अकेले गठबंधन में दरार का पक्का सबूत मानना जल्दबाजी होगी।

पूरे घटनाक्रम की असली पृष्ठभूमि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बदली राजनीति में है। चुनाव के बाद कांग्रेस ने DMK के साथ अपना पुराना गठबंधन खत्म कर TVK सरकार को समर्थन दिया। TVK को 108 सीटें मिलीं और कांग्रेस समेत कई दलों के समर्थन से सरकार बनी। कांग्रेस ने समर्थन के साथ यह शर्त रखी कि सांप्रदायिक ताकतों को सरकार से दूर रखा जाए। अब राज्य सरकार में साथ रहने वाले दल जब 2029 के प्रधानमंत्री चेहरे पर अलग दिशा में खड़े दिख रहे हैं तो स्वाभाविक तौर पर आगे की सियासी तस्वीर को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है कि TVK के भीतर विजय को राष्ट्रीय चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश और कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी पर कायम रहने के बीच दूरी साफ दिखने लगी है। विजय का नाम सर्वे में मजबूत तीसरे विकल्प के तौर पर उभरना TVK के लिए उत्साह बढ़ाने वाला जरूर है, लेकिन प्रधानमंत्री पद की औपचारिक उम्मीदवारी अभी तय नहीं हुई है। दूसरी ओर कांग्रेस अपने संगठन और नेतृत्व के स्तर पर राहुल गांधी को लेकर कोई समझौता करती नजर नहीं आ रही। यही टकराव 2029 की राजनीति से पहले तमिलनाडु के गठबंधन समीकरणों की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रधानमंत्री पद की संभावित दावेदारियों से जुड़े राजनीतिक दावे संबंधित नेताओं के बयानों और उपलब्ध सर्वेक्षणों पर आधारित हैं तथा अंतिम चुनावी परिणाम या भविष्य की राजनीतिक स्थिति का पूर्वानुमान नहीं हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief