1100 सर्वर का खेल, फर्जी ऐप से बैंक खाते तक पहुंची पूरी कड़ी
यूट्यूब से सीखी तकनीक के सहारे 1100 सर्वर का खेल खड़ा करने वाले आरोपी पर लोगों को बिना KYC सर्वर देने का आरोप है, जिनसे जुड़े तार साइबर ठगी तक पहुंचे।
प्रतीकात्मक फोटो
मुंबई, महाराष्ट्र। 1100 सर्वर का खेल सामने आने के बाद मुंबई की साउथ रीजन साइबर पुलिस ने हरियाणा के भिवानी खेड़ा से 32 वर्षीय प्रवीण हुकुम चंद को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने यूट्यूब और इंटरनेट गाइड से RDP और VPS तकनीक सीखी और फिर rdpwale.in नाम से सेवा शुरू की। आरोप है कि बिना पहचान पत्र और KYC के करीब 1,100 लोगों को सर्वर दिए गए। पुलिस जांच में इन सर्वरों के साइबर ठगी और फर्जी ऐप से जुड़े इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। [1]
फर्जी ऐप से खुला राज
मामले की शुरुआत मुंबई के एक व्यक्ति से हुई 17.42 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच से हुई। पुलिस के मुताबिक पीड़ित को MGL Gas Bill Update नाम के ऐप का लालच दिया गया था। ऐप इंस्टॉल होने के बाद उसके मोबाइल में मौजूद मैलवेयर सक्रिय हुआ और ठगों ने बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल कर रकम निकाल ली। तकनीकी जांच में ऐप के बैकएंड से जुड़े सर्वर का IP एड्रेस मिला। इसी सुराग ने जांचकर्ताओं को उस सर्वर तक पहुंचाया, जहां से आगे 1100 सर्वर का खेल सामने आया।
पुलिस ने IP एड्रेस से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले और सर्वर प्रदाता कंपनी Hostinger से जानकारी हासिल की। जांच के दौरान VPS संचालन का संबंध भिवानी खेड़ा निवासी प्रवीण से सामने आया। पुलिस का आरोप है कि उसके दिए गए सर्वरों में से कुछ का इस्तेमाल साइबर ठग कमांड और कंट्रोल सिस्टम की तरह कर रहे थे। ऐसे सिस्टम के जरिए ठग संक्रमित मोबाइल से संवेदनशील जानकारी हासिल कर सकते थे। अब जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि किन ग्राहकों ने सर्वर का इस्तेमाल वैध काम में किया और किनका संबंध अपराध से था।
यूट्यूब से सीखा हुनर
पुलिस के अनुसार प्रवीण ने कंप्यूटर या IT की कोई औपचारिक पढ़ाई नहीं की थी। उसने यूट्यूब ट्यूटोरियल और ऑनलाइन गाइड देखकर वेबसाइट तैयार करना तथा RDP और VPS चलाना सीखा। इसके बाद उसे ऐसे ग्राहकों की जरूरत समझ आई जो कम पहचान जांच के साथ सर्वर चाहते थे। पुलिस का आरोप है कि इसी मौके को उसने कारोबार में बदल दिया। अलग अलग क्षमता वाले सर्वरों के लिए वह 1,699 रुपये से 13,199 रुपये महीने तक किराया लेता था और इसी मॉडल से 1100 सर्वर का खेल बड़े नेटवर्क तक पहुंच गया।
जांच में करीब 1,100 उपयोगकर्ताओं का रिकॉर्ड सामने आया है। पुलिस के मुताबिक इन ग्राहकों से जुड़े कई मोबाइल नंबर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कम से कम 30 शिकायतों में भी सामने आए हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सभी ग्राहक अपराध में शामिल थे। पुलिस अब प्रत्येक ग्राहक और सर्वर की गतिविधि अलग अलग जांच रही है। बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड, सर्वर लॉग और वेबसाइट से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि आरोपी को ग्राहकों की गतिविधियों की जानकारी थी या नहीं।
अब किसकी बारी
पुलिस ने आरोपी से लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए हैं और उनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। जांचकर्ताओं की नजर सर्वर लॉग, भुगतान के रास्ते और ग्राहकों के डिजिटल संपर्क पर भी है। इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि कितने सर्वर सीधे साइबर अपराध में इस्तेमाल हुए और कितने केवल सामान्य काम के लिए लिए गए थे। पुलिस पूरे नेटवर्क को जोड़ने की कोशिश कर रही है। खास तौर पर उन नंबरों और खातों की पड़ताल हो रही है जिनका संबंध पहले दर्ज साइबर शिकायतों से मिला है।
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक ठग अक्सर बैंकिंग, KYC, बिजली बिल या गैस बिल अपडेट के नाम पर लोगों को फर्जी APK डाउनलोड करने के लिए उकसाते हैं। ऐसे ऐप मोबाइल में घुसने के बाद SMS, नोटिफिकेशन और दूसरी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए अनजान लिंक से आया कोई भी ऐप डाउनलोड करना जोखिम भरा हो सकता है। 1100 सर्वर का खेल यह भी दिखाता है कि साइबर अपराध में सिर्फ ठग ही नहीं बल्कि उनके पीछे काम करने वाला डिजिटल बुनियादी ढांचा भी जांच के दायरे में आ सकता है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप पुलिस जांच और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं तथा न्यायिक रूप से दोष सिद्ध होने तक उन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।