टोल फर्जीवाड़ा: 7 राज्यों में ED की रेड, फर्जी रसीदों का खेल
टोल फर्जीवाड़ा जांच में ED ने राजस्थान सहित 7 राज्यों और दिल्ली एनसीआर में 14 ठिकानों पर छापे मारे हैं, डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे हैं।


प्रतीकात्मक फोटो
जयपुर, राजस्थान। NHAI के टोल प्लाजा पर कथित फर्जी वसूली और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के मामले में ED ने 14 ठिकानों पर तलाशी शुरू की है। कार्रवाई राजस्थान समेत 7 राज्यों और दिल्ली एनसीआर तक फैली है। जांच में आरोप है कि टोल बूथों पर अधिकृत व्यवस्था से अलग सॉफ्टवेयर चलाकर फर्जी रसीदें बनाई गईं और वसूली की रकम को सरकारी हिसाब से बाहर भेजा गया। टोल फर्जीवाड़ा की जांच में अब पैसों और डिजिटल रिकॉर्ड की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। [1]
फर्जी रसीदों का खेल
जांच के मुताबिक कथित तौर पर टोल प्लाजा पर ऐसे अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ जो NHAI की अधिकृत व्यवस्था से अलग काम करता था। आरोप है कि वाहन के गुजरने पर इस सिस्टम से रसीद तैयार की जाती और चालक से नकद या ऑनलाइन भुगतान लिया जाता था। यह रकम सरकारी खाते में दर्ज होने के बजाय दूसरी जगह पहुंचाई जाती थी। अधिकारियों के अनुसार फोरेंसिक जांच और NHAI से मिले रिकॉर्ड में ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। इससे सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
ED की कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, दिल्ली एनसीआर और पश्चिम बंगाल तक पहुंची है। टीमों का ध्यान उन टोल प्लाजा, संचालकों और निजी एजेंसियों पर है जिनकी भूमिका जांच में सामने आ रही है। तलाशी के दौरान कंप्यूटर, हार्ड ड्राइव, सर्वर लॉग, वित्तीय रिकॉर्ड और दूसरे डिजिटल दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। टोल फर्जीवाड़ा के जरिए कथित तौर पर कितनी रकम आधिकारिक हिसाब से बाहर गई और उसे किस रास्ते से आगे भेजा गया, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच में पैसों की तलाश
मामले की जांच 22 जनवरी 2025 को दर्ज पुलिस FIR के बाद आगे बढ़ी। इसके बाद धन शोधन रोकथाम कानून के तहत जांच शुरू हुई। उपलब्ध जांच विवरण के मुताबिक फोरेंसिक विश्लेषण और NHAI के रिकॉर्ड से अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। अब जांच का दायरा केवल किसी एक टोल बूथ तक सीमित नहीं माना जा रहा। अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि कथित सॉफ्टवेयर किसने तैयार किया, इसे किन टोल प्लाजा पर लगाया गया और इसका संचालन कौन कर रहा था।
ED अब कथित रकम की पूरी मनी ट्रेल तलाश रही है। जांचकर्ताओं का फोकस उन लोगों और संस्थाओं की पहचान पर भी है जिन्हें कथित तौर पर इस वसूली से फायदा मिला। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि टोल से मिली रकम किन खातों में पहुंची और उसका आगे इस्तेमाल कैसे हुआ। टोल फर्जीवाड़ा मामले में अभी जांच जारी है और किसी व्यक्ति या संस्था को अदालत के अंतिम फैसले से पहले दोषी नहीं माना जा सकता।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। टोल वसूली में कथित अनियमितताओं और धन की हेराफेरी से जुड़े आरोप जांच के अधीन हैं तथा किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही तय होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।
ED raids 14 places in case of fraudulent toll collection at various NHAI toll plazas
— ANI Digital (@ani_digital) September 2, 2026
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