अवैध खनन पर नकेल, वन क्षेत्र में खुला रास्ता अब विभाग की रडार पर
अवैध खनन पर नकेल के बीच वन विभाग ने सख्ती की तैयारी की है। बंद रास्ते और क्रेशर यूनिटों की जांच से खनन की पूरी कड़ी सामने आ सकती है।
अवैध खनन पर नकेल
नीमकाथाना, राजस्थान (शिंभू सिंह शेखावत)। स्यालोदड़ा के वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन को लेकर वन विभाग ने सख्ती की तैयारी शुरू कर दी है। उप वन संरक्षक सीकर प्रदीप कुमार ने मौके का जायजा लेकर अधिकारियों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। ग्रामीणों का आरोप है कि हरियाणा की तरफ से पत्थर निकालकर राजस्थान सीमा में लाया जाता है और स्थानीय क्रेशर यूनिटों में इस्तेमाल किया जाता है। इससे धूल प्रदूषण बढ़ने की शिकायत भी सामने आई है। विभाग अब पूरे मामले पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है।
बंद रास्ते पर सवाल
ग्रामीणों के अनुसार तालाब के पास वन विभाग ने पहले अवैध खनन गतिविधियों से जुड़े रास्ते को बंद किया था। आरोप है कि यह रास्ता दोबारा खोल दिया गया और इसी से वाहनों की आवाजाही शुरू हुई। ग्रामीण चाहते हैं कि रास्ते को स्थायी रूप से बंद किया जाए ताकि वन क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लग सके। क्षेत्रीय वन अधिकारी रविंद्र सिंह भाटी के मुताबिक विभाग लगातार गश्त कर रहा है। सीमा क्षेत्र होने के कारण निगरानी में चुनौतियां हैं लेकिन नई रणनीति के जरिए कार्रवाई मजबूत की जाएगी।
वन विभाग की कार्रवाई का असर सिर्फ मौके पर मौजूद गतिविधियों तक सीमित नहीं रहने वाला है। अधिकारी ने साफ किया है कि वन क्षेत्र से निकाले गए पत्थर का इस्तेमाल करने वाली क्रेशर यूनिटों की भी जांच होगी। यदि किसी यूनिट में वन क्षेत्र से अवैध रूप से निकाला गया पत्थर मिलता है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से जांच का दायरा बढ़ गया है और अब पत्थर के स्रोत से लेकर उसके इस्तेमाल तक की पूरी कड़ी पर नजर रखी जा सकती है।
क्रेशर भी जांच में
हरियाणा और राजस्थान की सीमा से लगे इलाके में खनन गतिविधियों की निगरानी विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। ग्रामीणों की शिकायतों में सीमा पार से पत्थर लाने और स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी। विभाग का कहना है कि गश्त लगातार जारी है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में कार्रवाई का फोकस रास्तों वाहनों और पत्थर इस्तेमाल करने वाली इकाइयों पर रह सकता है।
स्यालोदड़ा में अवैध खनन पर नकेल कसने की तैयारी के बीच ग्रामीणों को उम्मीद है कि बंद किए गए रास्तों की स्थिति भी साफ होगी और वन क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगेगी। वन विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि मौके की निगरानी और प्रस्तावित जांच के बाद कितनी ठोस कार्रवाई सामने आती है। यदि क्रेशर यूनिटों में भी जांच होती है तो पत्थर की सप्लाई से जुड़ी पूरी श्रृंखला की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप और विभाग द्वारा कही गई बातें जांच का विषय हैं तथा किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी मानना सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।