नस्लीय हिंसा पर अमेरिका में हंगामा, दक्षिण एशियाई नेताओं का दबाव
अमेरिका में दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ भेदभाव और नस्लीय हिंसा की चिंता बढ़ी, सांसदों ने ठोस कदम, बेहतर रिपोर्टिंग और रोकथाम की मांग उठाई है।
प्रतीकात्मक फोटो
वॉशिंगटन, अमेरिका। नस्लीय हिंसा को लेकर अमेरिका में दक्षिण एशियाई मूल के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अब ठोस कार्रवाई की मांग उठाई है। बुधवार को अमेरिकी कैपिटल में हुई एक गोलमेज बैठक में नेताओं ने अपने समुदायों में बढ़ते भेदभाव, नफरत और हिंसा पर चर्चा की। PTI की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बेहतर रिपोर्टिंग व्यवस्था और प्रभावी सरकारी प्रतिक्रिया जरूरी है। बैठक का आयोजन इंडियन अमेरिकन इम्पैक्ट और स्टॉप एएपीआई हेट ने किया था। [1]
बढ़ती चिंता
बैठक में कांग्रेस सदस्यों राजा कृष्णमूर्ति, श्री थानेदार, अमी बेरा, सुहास सुब्रमण्यम और प्रमिला जयपाल समेत दक्षिण एशियाई मूल के कई नेता शामिल हुए। नेताओं ने बताया कि उनके समुदायों में लोग नफरत, उत्पीड़न और हिंसा का सामना कर रहे हैं। चर्चा में यह समझने की कोशिश हुई कि नस्लीय हिंसा को बढ़ावा देने वाले कारण क्या हैं और पीड़ितों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को कैसे बेहतर बनाया जाए। नेताओं ने रोकथाम और कार्रवाई के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बताई।
कृष्णमूर्ति ने कहा कि किसी भी अमेरिकी को उसके जन्मस्थान, पूजा के तरीके या नाम के कारण यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वह इस देश का हिस्सा नहीं है। उन्होंने नस्लीय हिंसा से निपटने के लिए Hate Crimes Commission Act को मजबूत करने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद यह समझना है कि नफरत आखिर क्यों बढ़ रही है और हिंसा होने से पहले उसे रोकने के तरीके क्या हो सकते हैं। बैठक में शामिल नेताओं ने अपने निजी अनुभव और स्थानीय समुदायों की चिंताएं भी साझा कीं।
कानून की पहल
इस साल कृष्णमूर्ति ने सीनेटर कर्स्टन गिलिब्रैंड और सांसद ग्रेस मेंग तथा नीडिया वेलाजक्वेज के साथ Hate Crimes Commission Act को फिर से पेश किया है। प्रस्तावित कानून एक द्विदलीय आयोग बनाने की बात करता है जो देश में नस्लीय हिंसा और अन्य हेट क्राइम के कारणों की जांच करेगा। इसमें सोशल मीडिया और तकनीक की भूमिका को भी देखा जाएगा। इसके अलावा आयोग यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि पीड़ित पूरी तरह शिकायत क्यों नहीं दर्ज करा पाते और किन रोकथाम उपायों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है।
प्रस्ताव में संघीय हेट क्राइम आंकड़ों का Government Accountability Office से ऑडिट कराने की बात भी है। इसका मकसद देशभर में उपलब्ध आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता सुधारना है। बैठक में नॉर्थ कैरोलाइना, न्यू जर्सी, वर्जीनिया, कैलिफोर्निया, मिशिगन, टेक्सास और पेंसिल्वेनिया के राज्य और स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल हुए। नेताओं का जोर इस बात पर रहा कि नस्लीय हिंसा से जुड़े मामलों की पहचान, रिपोर्टिंग और रोकथाम के लिए एक मजबूत व्यवस्था तैयार की जाए, ताकि प्रभावित समुदायों को ज्यादा भरोसा मिल सके।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नस्लीय हिंसा और हेट क्राइम से जुड़े दावे तथा प्रस्तावित कानून की स्थिति समय के साथ बदल सकती है और किसी भी घटना या कानूनी पहल का अंतिम परिणाम संबंधित जांच और विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।