इंसानी आवाज ने जगाई उम्मीद, सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर
नेपाल में 9 दिन से सुरंग में फंसे 2 मजदूरों को बचा लिया गया। अंदर से आवाज सुनाई देने के बाद रेस्क्यू टीम ने उम्मीद नहीं छोड़ी और सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर।
सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर
रसुवा, नेपाल। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच जिंदगी की ऐसी कहानी सामने आई है जिसने पूरे देश को उम्मीद दी है। त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे 2 मजदूरों को 9 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के बाद दोनों के बचने की उम्मीद बेहद कम मानी जा रही थी। लेकिन रेस्क्यू टीम को सुरंग के भीतर से इंसानी आवाज सुनाई दी और इसके बाद बचाव अभियान में नई जान आ गई। जब सुरंग से जिंदा निकले 2 मजदूर तो यही याद आया कि "जाको राखे साईंयां मार सके ना कोई।" [1]
आवाज से लौटी उम्मीद
रेस्क्यू टीम के लिए सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सुरंग के भीतर से आवाज सुनाई दी। बचाव दल ने अंदर फंसे लोगों से संपर्क किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें बाहर निकालने की पूरी कोशिश की जा रही है। इसके बाद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल की संयुक्त टीम ने अभियान तेज किया। लंबे समय से मलबे और पानी के बीच फंसे मजदूरों तक पहुंचना आसान नहीं था। कठिन हालात के बावजूद टीम लगातार रास्ता बनाने और अंदर मौजूद लोगों की स्थिति जानने में जुटी रही।
आखिरकार संजय साह और कबीर महार्जन को सुरंग से जिंदा बाहर निकाल लिया गया। दोनों को अस्पताल ले जाया गया ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जांच की जा सके। सामने आई जानकारी के मुताबिक एक मजदूर को गंभीर खतरे वाली स्थिति नहीं थी जबकि दूसरे की हालत को लेकर चिकित्सकीय निगरानी जरूरी बताई गई। 9 दिन तक सुरंग में फंसे रहने के बाद उनका बाहर आना राहत की बड़ी खबर है। परिवारों के लिए यह पल किसी चमत्कार से कम नहीं था क्योंकि इतने लंबे इंतजार के बाद उन्हें अपनों के जीवित होने की खबर मिली।
बचाव अभी जारी
इस रेस्क्यू के बाद भी नेपाल में बचाव अभियान खत्म नहीं हुआ है। त्रिशूली नदी और आसपास के इलाकों में आई बाढ़ ने कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई मजदूरों के अब भी लापता होने की आशंका है और कुछ लोगों के अलग अलग सुरंगों में फंसे होने की जानकारी सामने आई है। भारी मलबा, क्षतिग्रस्त रास्ते और लगातार बदलते मौसम के कारण बचाव दल के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। फिर भी 2 लोगों के मिलने से उम्मीद बढ़ी है कि मलबे के नीचे जिंदगी की और आवाजें भी मिल सकती हैं।
9 दिन बाद मिली जिंदगी की इस खबर ने भयावह आपदा के बीच उम्मीद का एक मजबूत संदेश दिया है। संजय साह और कबीर महार्जन का बचना सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता नहीं बल्कि उन परिवारों के लिए राहत है जो कई दिनों से अपनों की खबर का इंतजार कर रहे थे। सुरंग से जिंदा निकलने वाले इन दोनों मजदूरों की कहानी बताती है कि सबसे मुश्किल हालात में भी उम्मीद को खत्म नहीं करना चाहिए। नेपाल में जारी बचाव अभियान अब बाकी संभावित बचे लोगों को तलाशने पर केंद्रित है और हर नई आवाज नई उम्मीद जगा रही है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। आपदा और बचाव अभियान से जुड़े आंकड़े तथा लोगों की स्वास्थ्य स्थिति समय के साथ बदल सकती है इसलिए अंतिम जानकारी के लिए संबंधित अधिकारियों की आधिकारिक सूचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।