पंचर की दुकान पर मैकेनिक बने पुलिसवाले, आरोपी को नहीं लगी भनक
करीब 1 साल से पुलिस को चकमा दे रहे हत्या के आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस ने वर्दी छोड़कर मैकेनिक का भेष धरा और पंचर की दुकान पर जाल बिछाया।

पुलिस ने वर्दी छोड़कर मैकेनिक का भेष धरा
सीधी, मध्य प्रदेश। करीब एक साल से पुलिस को चकमा दे रहे हत्या के आरोपी वीरेंद्र साकेत तक पहुंचने के लिए पुलिस ने ऐसा तरीका अपनाया जिसकी कल्पना शायद आरोपी ने भी नहीं की होगी। पुलिसकर्मी वर्दी छोड़कर पंचर की दुकान पर मैकेनिक बन गए और आरोपी की राह देखते रहे। 15 सितंबर 2025 को महिला पुलिसकर्मी सविता साकेत की मौत के बाद पति वीरेंद्र फरार हो गया था। पुलिस के मुताबिक अब महाराष्ट्र में उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। पंचर की दुकान आखिरकार उसकी फरारी की आखिरी मंजिल बन गई। [1]
चाल थी बिल्कुल अलग
घटना सीधी पुलिस लाइन स्थित सरकारी आवास की बताई गई है। पुलिस के मुताबिक पति पत्नी के बीच विवाद चल रहा था और घटना वाली रात भी दोनों में कहासुनी हुई। आरोप है कि वीरेंद्र ने बेसबॉल से सविता पर हमला किया जिससे उनकी मौत हो गई। इसके बाद वीरेंद्र गायब हो गया और पुलिस के लिए तलाश शुरू हुई। पश्चिम बंगाल, कोलकाता और गुजरात तक सुराग तलाशे गए लेकिन आरोपी हर बार ठिकाना बदलकर निकल जाता था। यानी पुलिस दौड़ती रही और आरोपी जगह बदलने को अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा समझता रहा।
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि आरोपी महाराष्ट्र में पहचान बदलकर रह रहा है और वहां वाहन चालक का काम कर रहा है। पुलिस को यह भी मालूम हुआ कि वह नियमित रूप से अपनी गाड़ी की हवा और टायर जांच कराने एक तय जगह पहुंचता है। यहीं से गिरफ्तारी की पटकथा बदली और पंचर की दुकान पुलिस के लिए सबसे अहम जगह बन गई। वर्दी में पहुंचने पर शक होने का खतरा था इसलिए पुलिसकर्मियों ने मैकेनिक का भेष धारण किया और सामान्य कर्मचारियों की तरह दुकान पर बैठकर उसकी गतिविधियों पर नजर रखने लगे।
भेष बदला खेल पलटा
आरोपी को शायद यही भरोसा था कि पुलिस फिर किसी कागजी सुराग के पीछे दौड़ रही होगी। उसे क्या पता था कि जिस पंचर की दुकान पर वह रोजमर्रा के काम से पहुंचता है वहीं उसके लिए पुलिस का जाल बिछ चुका है। टीम ने जल्दबाजी नहीं की और सही मौके का इंतजार किया। पुलिसकर्मियों ने दुकान पर पंचर बनाने और गाड़ियों में हवा भरने का काम करते हुए अपनी पहचान छिपाए रखी। आखिरकार आरोपी वहां पहुंचा और उसे भनक लगने से पहले ही टीम ने उसे घेरकर पकड़ लिया।
इस कार्रवाई में तकनीकी सुराग और मुखबिर तंत्र की भूमिका भी अहम बताई गई है। पुलिस को आरोपी के महाराष्ट्र में होने की जानकारी मिलने के बाद टीम ने सीधे गिरफ्तारी के बजाय उसकी दिनचर्या समझने पर जोर दिया। यही सावधानी काम आई और करीब एक साल की तलाश खत्म हो गई। एक तरफ आरोपी पहचान और काम बदलकर कानून की नजर से बचने की कोशिश करता रहा तो दूसरी तरफ पुलिस ने अपना ही परिचय बदल लिया। फर्क इतना रहा कि आरोपी का भेष उसे बचा नहीं सका और पुलिस का भेष उसे सलाखों तक ले गया।
फरारी का अंत
गिरफ्तारी के बाद पुलिस वीरेंद्र साकेत से पूछताछ कर रही है और घटना की रात क्या हुआ था इसकी पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पुलिस के अनुसार पति पत्नी के विवाद के दौरान बेसबॉल से सविता पर हमला हुआ था। इस मामले में आरोपी पर इनाम भी घोषित किया गया था और अब लंबी तलाश के बाद उसे पकड़ लिया गया है। कहानी में सबसे दिलचस्प मोड़ यही रहा कि पुलिस को आखिरकार किसी बड़े ऑपरेशन की नहीं बल्कि पंचर की दुकान की जरूरत पड़ी। पंचर की दुकान ने फरारी की हवा निकाल दी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। हत्या और गिरफ्तारी से जुड़े आरोप पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा अंतिम दोषसिद्धि का निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।