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AI से अश्लील तस्वीरें और टेलीग्राम पर बिक्री, छात्र हुआ गिरफ्तार

कोच्चि में छात्र पर सहपाठियों और शिक्षकों की तस्वीरें AI से बदलकर अश्लील तस्वीरें बनाने और टेलीग्राम पर बेचने का आरोप, पुलिस नेटवर्क की जांच कर रही है।

By अजय त्यागी
1 min read
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कथित आरोपी

कथित आरोपी

कोच्चि, केरल। कॉलेज में पढ़ाई, कैमरा और AI का इस्तेमाल किस काम के लिए होना चाहिए, इसका नया उलटा पाठ सामने आया है। भारता माता कॉलेज के 20 वर्षीय बीबीए लॉजिस्टिक्स छात्र श्रीहरी वी एस को शिक्षकों और छात्रों की तस्वीरों को कथित तौर पर बदलकर आपत्तिजनक सामग्री (अश्लील तस्वीरें) बनाने और टेलीग्राम पर साझा करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। ईटीवी भारत की एक रिपोर्ट के अनुसार, फोन से जुड़ी जांच ने कथित नेटवर्क और तस्वीरों की बिक्री के आरोपों को भी जांच के दायरे में ला दिया है।  [1]

मामला ऐसे खुला जैसे डिजिटल दौर का कोई काला मजाक हो। 1 सितंबर को एक पूर्व छात्र ने एक शिक्षिका को गोपनीय सूचना दी, जिसके बाद कॉलेज ने जांच शुरू की। बताया गया कि छात्र कॉलेज के कार्यक्रमों और कक्षाओं की तस्वीरें तथा वीडियो बनाने और संपादित करने से जुड़ा था। आरोप है कि इसी पहुंच का इस्तेमाल तस्वीरों को AI की मदद से बदलने में हुआ। कॉलेज ने उसे निलंबित कर निष्कासित किया और मोबाइल पुलिस को सौंप दिया।

फोन की जांच

पुलिस के मुताबिक छात्र को गुरुवार देर रात हिरासत में लिया गया और शुक्रवार को गिरफ्तारी दर्ज हुई। उसके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 67A समेत अन्य धाराएं लगाई गई हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या सामग्री अलग टेलीग्राम समूहों में पहुंचाई गई और क्या उससे पैसे कमाने की कोशिश हुई। कुछ रिपोर्टों में बिक्री के सबूत मिलने की बात कही गई है, जबकि पुलिस ने फिलहाल किसी वित्तीय लेनदेन की पुष्टि नहीं की है।

पुलिस साइबर टीम के साथ डिजिटल रास्ते की पड़ताल कर रही है और यह जानने की कोशिश हो रही है कि छात्र अकेला था या किसी और की भूमिका भी थी। फोन में छात्रावास के कमरों से जुड़े दृश्य मिलने की खबर ने सवाल और बढ़ा दिए हैं, हालांकि इनके स्रोत और इस्तेमाल की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। कॉलेज परिसर में छात्रों ने कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कथित सामग्री किन समूहों तक पहुंची और उसमें और कौन शामिल हो सकता है।

तकनीक का फंदा

तकनीक ने तस्वीर बनाना आसान किया है, लेकिन किसी की तस्वीर को उसकी अनुमति के बिना बदलकर अश्लील तस्वीरें बनाना कोई मासूम शरारत नहीं है। इस मामले में पुलिस यह तय करेगी कि आरोपों की वास्तविक सीमा क्या है और कितने लोग प्रभावित हुए। फिलहाल जरूरी बात यही है कि कथित सामग्री को आगे साझा न किया जाए और पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक न हो। जांच आगे बढ़ने के साथ साफ होगा कि अश्लील तस्वीरें एक छात्र की करतूत थीं या पीछे कोई बड़ा डिजिटल नेटवर्क भी था।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मामले में लगाए गए आरोपों और जांच से जुड़े तथ्यों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

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