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जन्माष्टमी पर गौसेवा, गायों को मीठा दलिया और हरा चारा खिलाया

जन्माष्टमी पर गौसेवा को लेकर धार्मिक परंपरा में विशेष भाव माना जाता है। इसी भाव के साथ तुलसी सर्किल की गौशाला में मीठा दलिया और हरा चारा खिलाया गया। 

By अजय त्यागी
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जन्माष्टमी पर गौसेवा

जन्माष्टमी पर गौसेवा

बीकानेर, राजस्थान। श्री गुरु अर्जुन दास सत्संग भवन एवं श्री रूद्र हनुमान सेवा समिति की ओर से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व गौसेवा के साथ मनाया गया। तुलसी सर्किल स्थित गौशाला में गायों के लिए मीठे दलिये और हरे चारे की व्यवस्था की गई। जहां जन्माष्टमी पर जहाँ माखन मिश्री और झूले की चर्चा रही वहीं यहां सेवा का स्वाद गायों तक पहुंचाया गया। आयोजकों का कहना है कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोपाल स्वरूप से जुड़े भाव के कारण जन्माष्टमी पर गौसेवा को विशेष महत्व दिया जाता है। 

सेवा में दिखी आस्था

संस्था के संस्थापक गुरु अर्जुन दास जी ने आशीर्वचन में कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन गोकुल और वृंदावन की गायों से गहराई से जुड़ा रहा है। उन्होंने गौसेवा को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जोड़ते हुए सेवा और करुणा के भाव को महत्व दिया। कार्यक्रम में अभिषेक गुप्ता, उषा गुप्ता, गोविंद अग्रवाल, बसंत किराडू, चिराग अग्रवाल, हिमांशी, वैभव और मयंक सहित अन्य लोग मौजूद रहे। यहां संदेश भी सीधा था कि पर्व मनाने के तरीके कई हो सकते हैं लेकिन सेवा का रास्ता सीधे जरूरतमंद जीव तक पहुंचता है।

धार्मिक मान्यताओं में गौसेवा को पुण्य और सेवा भाव से जोड़कर देखा जाता है। संस्था की ओर से जन्माष्टमी के अवसर पर इसी आस्था को व्यवहार में उतारने का प्रयास किया गया। गौशाला में चारा और मीठा दलिया उपलब्ध कराने से कार्यक्रम का केंद्र पूजा से ज्यादा सेवा पर रहा। भगवान के जन्मदिन पर भक्तों ने इस बार केक नहीं बल्कि गायों के लिए भोजन तैयार किया। हालांकि आयोजकों के लिए जन्माष्टमी पर गौसेवा सिर्फ प्रतीकात्मक आयोजन नहीं बल्कि श्रीकृष्ण के गोपाल स्वरूप से जुड़ी श्रद्धा और जीवों के प्रति करुणा का संदेश है। 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और आस्थाओं का उल्लेख संबंधित परंपराओं के संदर्भ में किया गया है और इन्हें वैज्ञानिक या सार्वभौमिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief