36 चेक डैम से बदलेगी तस्वीर, किसानों के लिए पानी का बड़ा इंतजाम
लद्दाख में 36 चेक डैम के प्रस्ताव से सिंधु और सुरू नदी के पानी को खेती तक पहुंचाने की तैयारी। 56 करोड़ की योजना से 18,600 एकड़ जमीन को सिंचाई मिल सकती है।

गलवान घाटी में बहती श्योक नदी
लेह, लद्दाख। 36 चेक डैम की योजना के जरिए लद्दाख में पानी की कमी और खेती की परेशानी से निपटने की तैयारी है। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने जल शक्ति मंत्रालय को 36 चेक डैम बनाने का प्रस्ताव भेजा है। इसकी अनुमानित लागत 56 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। योजना में लेह क्षेत्र में 7 हिमालयन रॉक चेक डैम और करगिल क्षेत्र में 29 RCC चेक डैम या वियर शामिल हैं। प्रस्ताव को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मंजूरी के लिए भेजा गया है। [1]
खेतों तक पहुंचेगा
36 चेक डैम का मकसद नदियों में बहकर निकल जाने वाले पानी को रोककर उसका इस्तेमाल सिंचाई में बढ़ाना है। लेह में सिंधु नदी और करगिल में सुरू नदी से पानी रोकने की योजना है। प्रशासन के मुताबिक इन परियोजनाओं से मौजूदा सिंचाई ढांचे को मजबूती मिलेगी और खेती योग्य जमीन का दायरा बढ़ सकता है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार सभी प्रस्तावित ढांचे तैयार होने पर 18,600 एकड़ से अधिक जमीन को भरोसेमंद सिंचाई सुविधा मिल सकती है। इससे किसानों की मौसमी पानी की परेशानी कम होने की उम्मीद है।
लद्दाख में बर्फ और ग्लेशियर से पानी की कमी नहीं है, लेकिन खेती के मौसम में उसका बड़ा हिस्सा इस्तेमाल नहीं हो पाता। प्रशासन के अनुसार हर साल होने वाले बर्फ और ग्लेशियर के पिघलाव के कुल पानी का 1 प्रतिशत से भी कम फिलहाल उपयोग में आता है। इसी समस्या को देखते हुए रॉक चेक डैम जैसी स्थानीय और अपेक्षाकृत कम लागत वाली तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इन ढांचों से पानी रोकने के साथ मौजूदा नहरों और खेतों तक उसकी पहुंच बेहतर की जा सकती है।
प्रयोग से भरोसा
36 चेक डैम की योजना को आगे बढ़ाने के पीछे पहले किए गए प्रयोगों का अनुभव भी अहम है। मई 2026 में लेह के उपशी में सिंधु नदी पर पहला हिमालयन रॉक चेक डैम शुरू किया गया था। यह ढांचा नदी तल और आसपास से मिले बड़े पत्थरों से बनाया गया है और इसमें सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया। प्रशासन के अनुसार शुरुआती परियोजनाओं ने पानी रोकने और सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने की क्षमता दिखाई है। कुछ पायलट चेक डैम से सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी और खेती योग्य कमांड क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
इस पहले रॉक चेक डैम से करीब 40 मिलियन लीटर पानी रोकने की क्षमता बनी और जलस्तर में लगभग 10 फीट तक बढ़ोतरी देखी गई। इससे इगू पेह सिंचाई नहर के जरिए गांवों के खेतों तक पानी पहुंचाने में मदद मिली। प्रशासन के अनुसार रॉक चेक डैम ने नदी में पानी का प्रवाह बढ़ने के बावजूद दबाव को संभाला है। अब प्रस्तावित 36 चेक डैम के जरिए इस मॉडल को बड़े स्तर पर अपनाने की कोशिश है। मंजूरी मिलने के बाद परियोजना लद्दाख की खेती और जल सुरक्षा के लिए अहम कदम हो सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। प्रस्तावित परियोजनाओं की अंतिम लागत, संख्या और क्रियान्वयन संबंधित सरकारी मंजूरी और विस्तृत प्रक्रिया के अनुसार बदल सकते हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।