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हथियार चोरी के बाद NIA सक्रिय, कई सवालों के बीच हथियार अब भी गायब

हथियार चोरी के बाद NIA ने जांच संभाली, आतंकी एंगल की पड़ताल तेज है। 12 हथियार और गोला बारूद गायब हैं, सुरक्षा पर भी सवाल उठे। तलाश लगातार जारी

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

हैदराबाद, तेलंगाना। हथियार चोरी ने सिकंदराबाद छावनी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मद्रास रेजिमेंट के बॉलारम परिसर से आधुनिक हथियार और बड़ी मात्रा में गोला बारूद गायब होने के बाद जांच कई एजेंसियों तक पहुंच गई है। अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA भी मामले की पड़ताल में शामिल हो गई है। जांचकर्ताओं को आशंका है कि चोरी के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या आतंकी कनेक्शन हो सकता है। फिलहाल गायब हथियार बरामद नहीं हुए हैं और उनकी तलाश जारी है।  [1]

हथियार कैसे गायब हुए

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब हथियार रखने वाले सुरक्षित कक्ष के ताले और अंदर रखे बक्से टूटे मिले। जांच में सामने आया कि 12 हथियार चोरी हुए हैं। इनमें 4 AK-203 राइफल, 1 INSAS राइफल और 7 पिस्तौल शामिल बताई गई हैं। इसके साथ मैगजीन और बड़ी मात्रा में कारतूस भी गायब हैं। अधिकारियों ने CCTV फुटेज खंगालने के साथ ड्यूटी पर मौजूद जवानों और कर्मचारियों से पूछताछ शुरू की। शुरुआती जांच में अंदर के किसी व्यक्ति की भूमिका की आशंका भी जताई गई है।

जांच का दायरा बढ़ने की एक वजह यह भी है कि हथियारों की चोरी सामान्य आपराधिक वारदात से कहीं ज्यादा गंभीर मानी जा रही है। NIA की एंट्री के बाद संभावित आतंकी एंगल पर भी पड़ताल होगी। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हथियार परिसर से बाहर कैसे निकले और क्या किसी संगठित गिरोह ने इसमें मदद की। सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस और स्थानीय पुलिस पहले से जांच कर रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था में चूक कहां हुई, इसका जवाब भी जांच में तलाशा जा रहा है।

जांच में कई सवाल

जांच के दौरान CCTV कैमरों की स्थिति, प्रवेश और निकास मार्गों तथा हथियारों के आखिरी बार सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल हो रही है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि घटना के समय परिसर में सीमित संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद थे और भारी बारिश भी हुई थी। पुलिस यह संभावना भी देख रही है कि हथियार एक साथ नहीं बल्कि अलग अलग समय पर बाहर निकाले गए हों। हालांकि इन आशंकाओं की अभी पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे बढ़ रही हैं।

सबसे बड़ी चिंता यह है कि गायब हथियार गलत हाथों में पहुंचने की स्थिति में गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकते हैं। इसी वजह से एजेंसियां हथियारों की बरामदगी और उनके संभावित रास्ते का पता लगाने पर जोर दे रही हैं। NIA के शामिल होने से जांच को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी देखा जा रहा है। फिलहाल किसी आतंकी संगठन का नाम सामने नहीं आया है और किसी आरोपी की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया गया है। हथियार चोरी मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। संभावित आतंकी एंगल और किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका से जुड़े तथ्य जांच पूरी होने तक आरोप या आशंका मात्र हैं और इन्हें अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief