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फूसराज चोपड़ा का मरणोपरांत नेत्रदान, दो जिंदगियों में भर गए उजाला

श्री डूंगरगढ़ में फूसराज चोपड़ा के मरणोपरांत नेत्रदान से 2 दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में रोशनी आने की उम्मीद है। परिवार का यह दूसरा नेत्रदान है।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg मरणोपरांत नेत्रदान

मरणोपरांत नेत्रदान

श्री डूंगरगढ़ (बीकानेर), राजस्थान। 60 वर्षीय फूसराज चोपड़ा के निधन के बाद उनके परिजनों ने मरणोपरांत नेत्रदान का फैसला लेकर मानवता की मिसाल पेश की है। 5 सितंबर 2026 को फूसराज चोपड़ा का निधन हुआ था। इसके बाद पत्नी चन्दादेवी, पुत्र यश और पुत्रियों श्वेता बाफना, स्वीटी श्रीमाल और मेघना चोपड़ा ने सर्वसम्मति से नेत्रदान की सहमति दी। समाजसेवी चमन श्रीमाल और अमित चोपड़ा ने परिवार को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया। इस पहल से 2 दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में रोशनी आने का रास्ता बनेगा।

दोबारा दिखाई संवेदना

यह परिवार पहले भी ऐसा उदाहरण पेश कर चुका है। फूसराज चोपड़ा के छोटे भाई के निधन के बाद भी नेत्रदान किया गया था। इस तरह परिवार का यह दूसरा नेत्रदान है। नेत्रदान की प्रक्रिया प्राणनाथ हॉस्पिटल और तेरापंथ युवक परिषद सरदारशहर के आई बैंक के सहयोग से पूरी हुई। परिषद प्रवृत्ति सलाहकार अशोक झाबक, नेत्रदान राष्ट्रीय प्रभारी कैलाश तातेड़ और थली प्रभारी लोकेश सेठिया का भी इस कार्य में विशेष सहयोग और मार्गदर्शन रहा। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद लंबे समय से नेत्रदान जागरूकता अभियान से जुड़ी है।

समाज ने फैसले को सराहा

फूसराज चोपड़ा के मरणोपरांत नेत्रदान के इस फैसले को समाज में सेवा और संवेदना की मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है। मौके पर राजकुमार बाफना, छगनलाल चोपड़ा, जगदीशराय मालू, विशाल डाकलिया, ऋषि झाबक, शीतल चोपड़ा, राहुल चोपड़ा, ऋषभ झाबक, शूरवीर मोदी, दिनेश करनाणी, जतन राजपुरोहित, प्रदीप चोपड़ा, शुभम सिंघी, रतनलाल गंग, धनपत मालू सहित समाज के कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। परिवार के इस निर्णय ने यह संदेश दिया कि जीवन के बाद भी किसी और की दुनिया रोशन की जा सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट उपलब्ध विश्वस्त स्रोतों और दिए गए तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। नेत्रदान से संबंधित चिकित्सकीय प्रक्रिया और पात्रता का अंतिम निर्धारण संबंधित चिकित्सकीय संस्थान और अधिकृत आई बैंक के नियमों के अनुसार होता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief