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गोगा नवमी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, मंदिरों में देर रात तक भजन

गोगा नवमी पर लूणकरनसर में मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, खीर मिश्री और नारियल का भोग लगा और देर रात तक जागरण में भजन गूंजते रहे।

By अजय त्यागी
1 min read
Advertisement002309202602.jpg advertisement13Aug2026%20copy.jpg गोगाजी का थान

गोगाजी का थान

लूणकरनसर (बीकानेर), राजस्थान। गोगा नवमी पर कस्बे के गोगाजी महाराज, कंवर केसरो जी और गुरु गोरक्षनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दूर दराज से पहुंचे लोगों ने मंदिरों में धोक लगाकर पूजा अर्चना की और परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने गोगाजी महाराज को खीर, मिश्री और नारियल का भोग अर्पित किया। लोकमान्यता के चलते लोगों ने जहरीले जीव जंतुओं से रक्षा की कामना भी की। पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा।

मेले में रौनक

मेले के मौके पर मंदिर परिसर और आसपास कई तरह की दुकानें सजी रहीं। बच्चों से लेकर महिलाओं और पुरुषों तक ने यहां जमकर खरीदारी की। खिलौने, प्रसाद, मिठाई और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की दुकानों पर दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रही। गोगा नवमी पर मंदिर दर्शन के साथ मेले की रौनक ने आयोजन को और खास बना दिया। दूर से आए श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था के साथ खरीदारी और मेल मिलाप का भी अवसर रहा। शाम ढलने के बाद भी बाजार जैसे माहौल में चहल पहल बनी रही।

रात्रि में मंदिर परिसर में जागरण और ज्योत प्रज्वलित की गई। श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन करते हुए गोगाजी महाराज की आराधना की। देर रात तक मंदिरों में लोगों की आवाजाही बनी रही और पूरा क्षेत्र धार्मिक वातावरण में डूबा नजर आया। राजस्थान सरकार के अनुसार गोगाजी को जाहरवीर, गोगा पीर और गोगाजी चौहान जैसे नामों से भी जाना जाता है तथा लोक आस्था में उन्हें नागों से जुड़ा देवता माना जाता है। गोगाजी की पूजा राजस्थान सहित कई राज्यों में लोक परंपरा का हिस्सा है।

लोकआस्था की पहचान

गोगाजी को लेकर राजस्थान में कई लोककथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार उन्हें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों में श्रद्धा से माना जाता है और गोगाजी मंदिर धार्मिक सद्भाव की मिसाल भी माने जाते हैं। भाद्रपद कृष्ण नवमी से जुड़ी गोगाजी की आराधना विशेष महत्व रखती है। राजस्थान के गोगामेड़ी में इसी अवसर पर बड़ा धार्मिक मेला भी आयोजित होता है। लूणकरनसर का आयोजन भी इसी लोक आस्था और पारंपरिक श्रद्धा की झलक दिखाता है।

लूणकरनसर में गोगा नवमी पर उमड़ी भीड़ ने कस्बे के धार्मिक माहौल को खास बना दिया। मंदिरों में पूजा अर्चना, भोग, ज्योत और भजन कीर्तन के साथ मेले में हुई खरीदारी ने पूरे आयोजन को जीवंत रखा। श्रद्धालुओं के लिए यह दिन केवल दर्शन और पूजा तक सीमित नहीं रहा बल्कि परिवार की सुख शांति और सुरक्षा की कामना से भी जुड़ा रहा। देर रात तक मंदिर परिसर में बनी आवाजाही और भक्ति का माहौल इस आयोजन की लोकप्रियता दिखाता रहा। गोगाजी नवमी पर लोगों की आस्था पूरे आयोजन में साफ दिखाई दी।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। गोगाजी से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं लोक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं और अलग अलग क्षेत्रों में इनके स्वरूप में अंतर हो सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief