रेबीज टीके पर सवाल, अबहेयरैब के संदिग्ध बैच का बड़ा खुलासा सामने आया
रेबीज टीके पर सवाल के बीच सरकारी जांच में अबहेयरैब बैच KE25012 मानकों पर खरा नहीं उतरा। नकली दवा की आशंका पर जांच जारी है। 4 लोग गिरफ्तार हुए।


प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। रेबीज टीके पर सवाल उठने के बीच भारत में इस्तेमाल होने वाली अबहेयरैब वैक्सीन के एक बैच को लेकर जांच तेज हो गई है। सरकारी जांच में बैच नंबर KE25012 का एक नमूना तय मानकों पर खरा नहीं उतरा और उसे मानक गुणवत्ता वाला नहीं माना गया। Reuters के अनुसार, यह नमूना दिल्ली के मुखर्जी नगर में एक बिना लाइसेंस वाले परिसर से मिला था। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दवा नियामक अब यह भी जांच रहा है कि कहीं यह दवा नकली तो नहीं है। [1]
जांच में खुलासा
केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला कसौली में किए गए परीक्षण में नमूना वैक्सीन की क्षमता से जुड़ी जरूरी जांच में विफल रहा। दस्तावेज के मुताबिक उसे मानक गुणवत्ता से बाहर और गलत लेबल वाली दवा बताया गया। हालांकि नमूना स्टेरिलिटी, नमी और पहचान से जुड़े कुछ परीक्षणों में पास हुआ। जांचकर्ताओं को पैकेजिंग, लेबल, क्यूआर कोड, कैप के रंग, लाइसेंस संबंधी जानकारी और पैकेट पर लिखे विवरण में भी अंतर मिला। इन गड़बड़ियों ने नमूने की असली पहचान पर सवाल खड़े किए।
इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड ने कहा है कि जांच में मिले शीशे उसकी कंपनी ने नहीं बनाए। कंपनी के मुताबिक जब्त नमूनों और उसके पास मौजूद उसी बैच के रिकॉर्ड में कई अंतर हैं। कंपनी ने अधिकारियों को जरूरी बैच रिकॉर्ड उपलब्ध कराए हैं और जांच में सहयोग करने की बात कही है। नियामक ने 27 अगस्त के पत्र में राज्य दवा अधिकारियों से बैच नंबर KE25012 की आवाजाही और वितरण पर कड़ी निगरानी रखने को कहा था। इसी बीच रेबीज टीके पर सवाल बढ़े हैं।
कंपनी का जवाब
कंपनी के अनुसार इस बैच की अधिकृत सप्लाई में 83,370 शीशे थे और अधिकृत चैनलों से भेजी गई वैक्सीन इस मामले से प्रभावित नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसे स्वास्थ्यकर्मियों से इस बैच को लेकर सवाल मिले हैं, लेकिन बाजार से कोई शिकायत नहीं मिली। मामले में दिल्ली पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। नियामक के मुताबिक अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि संदिग्ध शीशे कहां से आए और क्या वे नकली दवा के तौर पर बाजार में पहुंचाए गए।
रेबीज टीके पर सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि अबहेयरैब वैक्सीन का इस्तेमाल रेबीज से बचाव के लिए संक्रमण से पहले और संदिग्ध संपर्क के बाद किया जाता है। भारत में रेबीज से हर साल हजारों मौतें होती हैं, इसलिए टीके की गुणवत्ता को लेकर किसी भी गड़बड़ी को गंभीर माना जाता है। जनवरी 2025 में इसी वैक्सीन के एक अलग बैच को लेकर नकली होने की चेतावनी सामने आई थी। फिलहाल KE25012 के कितने शीशे बाजार में पहुंचे, इसकी जानकारी जांच पूरी होने के बाद साफ होगी।
अस्वीकरण Disclaimer:
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। संबंधित बैच की वास्तविक स्थिति और बाजार में इसकी पहुंच से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।