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सीबीएसई की मनमानी पर रोक, उत्तर पुस्तिका फीस अब नियमों से तय

सीबीएसई की मनमानी पर सीआईसी का सख्त रुख। उत्तर पुस्तिका की कॉपी के लिए आरटीआई नियमों के मुताबिक शुल्क लेने और पुराने प्रावधान में बदलाव के निर्देश दिए।

By अजय त्यागी
1 min read
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प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली, दिल्ली। सीबीएसई की मनमानी के आरोप से जुड़े मामले में केंद्रीय सूचना आयोग ने अहम निर्देश दिया है। आयोग ने कहा कि आरटीआई के तहत मांगी गई उत्तर पुस्तिका की कॉपी के लिए शुल्क सूचना का अधिकार नियम 2012 के मुताबिक ही लिया जाना चाहिए। मामला कक्षा 10 के एक छात्र की शिकायत से सामने आया था। छात्र ने महंगी पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया से बचने के लिए आरटीआई के जरिए अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतियां मांगी थीं और शुल्क व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।  [1]

फीस को लेकर विवाद

मामले में छात्र ने बताया था कि 5 विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी लेने के लिए 2500 रुपये और पुन सत्यापन के लिए 2500 रुपये देने पड़ सकते थे। हर सवाल की दोबारा जांच के लिए 100 रुपये का शुल्क भी बताया गया था। इस तरह कुल खर्च 10000 रुपये तक पहुंच सकता था। छात्र ने गणित के प्रश्नपत्र की कठिनाई, मॉडरेशन नीति और अंकों में कटौती को लेकर भी सवाल उठाए थे। बाद में सीबीएसई ने शुल्क मिलने पर मांगी गई उत्तर पुस्तिकाएं ईमेल के जरिए उपलब्ध कराई थीं।

सुनवाई के दौरान सीबीएसई ने 19 मई 2025 के अपने परिपत्र का हवाला दिया। इसमें कहा गया था कि छात्र आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिका की कॉपी ले सकते हैं लेकिन इसके बाद आरटीआई कानून के तहत सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन नहीं मांग सकते। आयोग ने इस रोक पर सवाल उठाया। सीआईसी ने कहा कि आरटीआई के जरिए उत्तर पुस्तिका हासिल करने वाले छात्र को केवल इसी आधार पर उपलब्ध दूसरे कानूनी रास्ते से वंचित नहीं किया जा सकता। आयोग ने माना कि संस्था के आंतरिक प्रावधान आरटीआई कानून से असंगत होने पर अलग शुल्क या शर्त का आधार नहीं बन सकते।

सीआईसी सख्त

आयोग ने सीबीएसई को निर्देश दिया कि आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिका की कॉपी देने के लिए शुल्क सूचना का अधिकार नियम 2012 के अनुसार ही लिया जाए। साथ ही 19 मई 2025 के परिपत्र में जरूरी बदलाव करने की सिफारिश की गई है। आयोग के रुख का असर उन छात्रों पर पड़ सकता है जो अपने अंकों या मूल्यांकन को लेकर उत्तर पुस्तिका देखना चाहते हैं। इससे उन्हें शुल्क और आवेदन प्रक्रिया को लेकर ज्यादा स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। सीबीएसई को आगे ऐसी व्यवस्था रखने को कहा गया है जो आरटीआई कानून के अनुरूप हो।

सीबीएसई की मनमानी को लेकर उठे इस मामले में आयोग का फैसला छात्रों के लिए अहम है। अब आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिका मांगने पर लागू शुल्क को तय नियमों के आधार पर देखा जाएगा। इसका मतलब यह नहीं है कि हर छात्र को पुनर्मूल्यांकन अपने आप मिल जाएगा बल्कि आरटीआई के जरिए कॉपी हासिल करने और उपलब्ध दूसरे उपायों के अधिकार को अलग अलग समझना होगा। छात्रों को आवेदन करने से पहले उस समय लागू नियमों और प्रक्रिया की जानकारी लेना जरूरी रहेगा। इससे परीक्षा मूल्यांकन में पारदर्शिता की मांग को भी मजबूती मिल सकती है।

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। शुल्क और पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भविष्य में बदलाव संभव हैं इसलिए किसी आवेदन से पहले लागू नियमों की पुष्टि करना जरूरी है। सीबीएसई की मनमानी से जुड़े आरोपों को आयोग के निर्देश और उपलब्ध मामले के तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

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Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief