भारत का रुख साफ, नए विश्व नक्शे पर विदेश मंत्रालय की चेतावनी
नए विश्व नक्शे से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन करते हुए विदेश मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को आधिकारिक नक्शे के मुताबिक दिखाने की शर्त स्पष्ट की है।


प्रतीकात्मक फोटो
नई दिल्ली, दिल्ली। भारत का रुख साफ करते हुए विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व नक्शे से जुड़े प्रस्ताव पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारत ने महासभा में समान क्षेत्रफल वाले विश्व नक्शे को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि इस समर्थन को किसी खास नक्शे या सीमा चित्रण की मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए। मंत्रालय के मुताबिक जम्मू कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। [1]
नक्शे पर दो टूक
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे में देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा वास्तविक तरीके से दिखाने से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन किया है। इसका मकसद पुराने नक्शों में मौजूद क्षेत्रफल संबंधी असमानताओं को कम करना है। भारत ने इस पहल का समर्थन किया लेकिन अपनी क्षेत्रीय अखंडता को लेकर स्थिति भी साथ में स्पष्ट रखी। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत की संप्रभुता से जुड़े क्षेत्रों का चित्रण उसके आधिकारिक नक्शे के अनुरूप होना जरूरी है। गलत या भ्रामक चित्रण भारत को स्वीकार्य नहीं होगा।
विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत का रुख उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता और अखंडता से जुड़ा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्ताव के पक्ष में मतदान का मतलब किसी विशेष मानचित्र प्रक्षेपण या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण को स्वीकार करना नहीं है। यानी भारत ने नक्शे को ज्यादा संतुलित बनाने की वैश्विक पहल का समर्थन किया है लेकिन जम्मू कश्मीर और लद्दाख की स्थिति को लेकर अपनी स्थापित नीति में कोई बदलाव नहीं किया है। यह अंतर भारत ने संयुक्त राष्ट्र के संदर्भ में खास तौर पर रेखांकित किया है।
प्रस्ताव का मकसद क्या
नए नक्शे की पहल का उद्देश्य दुनिया के अलग अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाना है। मौजूदा पारंपरिक नक्शों में ऊंचे अक्षांश वाले क्षेत्रों का आकार वास्तविकता से काफी बड़ा नजर आ सकता है जबकि भूमध्यरेखीय क्षेत्रों का आकार अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। इसी वजह से अफ्रीका जैसे महाद्वीपों के वास्तविक आकार को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। संयुक्त राष्ट्र में समर्थित प्रस्ताव इसी तरह की भौगोलिक प्रस्तुति को ज्यादा संतुलित और वास्तविक बनाने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
भारत ने इस व्यापक उद्देश्य का समर्थन किया है लेकिन साथ ही अपनी सीमाओं के चित्रण को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं छोड़ी। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र समर्थित किसी भी विश्व नक्शे में जम्मू कश्मीर और लद्दाख को भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुरूप दिखाया जाना चाहिए। भारत के लिए यह केवल नक्शे की तकनीकी प्रस्तुति का मामला नहीं बल्कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा विषय है। इसलिए वैश्विक नक्शे में बदलाव की पहल और भारत की सीमा संबंधी स्थिति को अलग अलग देखा जाना जरूरी है।
सीमा पर समझौता नहीं
इस पूरे घटनाक्रम में भारत ने स्पष्ट किया कि वह विश्व नक्शे को ज्यादा संतुलित बनाने की पहल के साथ खड़ा है लेकिन अपनी क्षेत्रीय स्थिति से कोई समझौता नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख के चित्रण को लेकर स्पष्ट शब्दों में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भारत की चिंता खास तौर पर ऐसे किसी चित्रण को लेकर है जो उसके आधिकारिक नक्शे से अलग या भ्रामक हो। इसलिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के समर्थन को भारत की सीमा संबंधी नीति में बदलाव के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय नक्शों और क्षेत्रीय सीमाओं से जुड़े चित्रण में संबंधित संस्थाओं की भविष्य की प्रक्रियाओं के अनुसार बदलाव संभव हैं। भारत की आधिकारिक सीमा संबंधी स्थिति के लिए केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयानों को प्राथमिक स्रोत माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।