WA Join our WhatsApp Group
Advertisement Advertisement
View in Newspaper Form

पुलिस की बड़ी लापरवाही, उम्र 17 लेकिन रिकॉर्ड में बना दिया 19 साल

पुलिस की बड़ी लापरवाही, 17 वर्षीय किशोर को जेल भेजने पर हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई। अदालत ने रिमांड अवैध बताते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

By अजय त्यागी
1 min read
advertisement13Aug2026%20copy.jpg
प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

अमरावती, आंध्र प्रदेश। पुलिस की बड़ी लापरवाही का मामला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के सामने पहुंचा तो अदालत ने 17 वर्षीय किशोर को चोरी के मामले में जेल भेजे जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने 19 अगस्त 2026 के रिमांड आदेश को अवैध और अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। डिवीजन बेंच ने 31 अगस्त को किशोर के पिता की याचिका मंजूर करते हुए उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया और संबंधित थाना प्रभारी पर 10,000 रुपये की लागत भी लगाई।   [1]

उम्र पर उठे सवाल

पुलिस की बड़ी लापरवाही का मामला तब सामने आया जब किशोर के पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका आरोप था कि 6 लोग बिना अपनी पहचान बताए उनके घर पहुंचे और बेटे को अपने साथ ले गए। बाद में पुलिस ने चोरी के मामले में उसके खिलाफ कार्रवाई की और 19 अगस्त को उसे अन्य आरोपियों के साथ मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। इसके बाद उसे राजामहेंद्रवरम की सेंट्रल जेल में 1 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 

पिता के मुताबिक पुलिस को आधार से जुड़े दस्तावेज भी दिए गए थे लेकिन लड़के की जन्मतिथि वाला हिस्सा हटाया या अस्पष्ट कर दिया गया और उसकी उम्र 19 साल बताई गई। पुलिस की ओर से कहा गया कि उपलब्ध आधार दस्तावेज में जन्म वर्ष का आखिरी अंक साफ नहीं था और उन्हें लड़के के 2006 में जन्म लेने का भ्रम हुआ। सुनवाई के दौरान पुलिस पक्ष ने माना कि रिकॉर्ड में जन्मतिथि 12 सितंबर 2008 थी। 

कोर्ट ने लगाई फटकार

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि वे उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर लड़के की सही जन्मतिथि की पुष्टि करते। अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि रिकॉर्ड में जन्मतिथि स्पष्ट होने के बावजूद पुलिस को उसकी उम्र साफ क्यों नहीं दिखाई दी। कोर्ट ने माना कि किशोर को सामान्य आपराधिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजने वाला रिमांड आदेश कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं था। अदालत ने आदेश रद्द करते हुए उसे तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। 

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लड़के के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अगर कानून के तहत जरूरी हुआ तो अधिकारी किशोर न्याय अधिनियम के मुताबिक आगे की कार्रवाई कर सकते हैं। यानी अदालत का आदेश मामले से छुटकारा देने के बजाय किशोर के साथ सही कानूनी प्रक्रिया अपनाने पर केंद्रित है। पुलिस की बड़ी लापरवाही पर अदालत की सख्ती का असर अब संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर भी पड़ सकता है। संबंधित थाना प्रभारी को 10,000 रुपये आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी को जमा करने का निर्देश दिया गया है। 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। मामले में दर्ज आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को अदालत के अंतिम दोषसिद्धि निष्कर्ष के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।

Rex TV Verification Metrics
Ajay Tyagi - Editor In Chief

Ajay Tyagi

Editor-in-Chief