टेंडर में खेल का आरोप, 1020 करोड़ के मामले में DMK नेता और भाई घिरे
1020 करोड़ के घोटाले में DMK नेता K N Nehru और उनके भाइयों समेत 13 नाम FIR में आए, टेंडर में हेरफेर और रिश्वत के आरोपों की जांच तेज हुई।

प्रतीकात्मक फोटो
चेन्नई, तमिलनाडु। 1020 करोड़ के घोटाले से जुड़े मामले में तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और DMK नेता K N Nehru को Directorate of Vigilance and Anti-Corruption (DVAC) ने FIR में मुख्य आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी ने उनके भाइयों समेत कुल 13 लोगों को मामले में नामजद किया है। आरोप सरकारी टेंडरों में कथित हेरफेर और रिश्वत की रकम जुटाने से जुड़े हैं। रिपोर्ट के मुताबिक कथित तौर पर रिश्वत को पार्टी फंड के नाम पर जमा किए जाने की बात भी सामने आई है। मामले में 2021 से 2025 के बीच के ठेकों से जुड़ी अनियमितताओं की जांच हो रही है। [1]
टेंडर में हेरफेर का आरोप
DVAC की FIR के मुताबिक सरकारी ठेकों की प्रक्रिया में कथित तौर पर मनमानी और हेरफेर किया गया। K N Nehru के भाइयों और 2 पूर्व DMK विधायकों के नाम भी FIR में शामिल हैं। आरोप है कि कुछ लोगों ने ठेकेदारों की सिफारिश करने के साथ उन्हें टेंडर से जुड़ी अहम जानकारी उपलब्ध कराई। इसके बदले कथित रिश्वत की रकम तय किए जाने और उसे अलग तरीके से जुटाने का आरोप है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सरकारी ठेकों से जुड़ी प्रक्रिया में किस तरह फायदा पहुंचाया गया।
यह मामला उस जांच के बाद आगे बढ़ा जिसमें सरकारी अनुबंधों में कथित गड़बड़ियों की जानकारी सामने आई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय की एक रिपोर्ट में भी 2021 से 2025 के दौरान टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं का जिक्र किया गया था। इसके बाद DVAC ने अपनी जांच आगे बढ़ाई। एजेंसी का आरोप है कि ठेके हासिल करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर नेटवर्क के जरिए प्रभाव डाला गया और रिश्वत की रकम को पार्टी फंड से जोड़ा गया। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया से होगी।
FIR में कौन कौन शामिल
DVAC ने K N Nehru को मामले में मुख्य आरोपी बताया है। उनके भाइयों के अलावा 2 पूर्व DMK विधायकों S Sudarshanam और J J Ebenezer के नाम भी FIR में हैं। आरोप है कि इन लोगों ने ठेकेदारों को आगे बढ़ाने और टेंडर से जुड़ी जानकारी साझा करने में भूमिका निभाई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर रिश्वत की रकम कैसे जुटाई गई और किन लोगों तक पहुंची। मामले में नाम आने भर से किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता और अंतिम जिम्मेदारी अदालत के फैसले से तय होगी।
1020 करोड़ के घोटाले के इस पूरे घटनाक्रम से पहले DVAC ने K N Nehru और उनसे जुड़े लोगों के ठिकानों पर तलाशी भी ली थी। हालिया कार्रवाई के दौरान तमिलनाडु में कई स्थानों पर जांच की गई और कथित टेंडर अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की तलाश की गई। राजनीतिक स्तर पर इस कार्रवाई को लेकर विवाद भी सामने आया है। DMK की ओर से इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया गया है जबकि जांच एजेंसी का रुख भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच पर केंद्रित है। अब FIR के बाद मामले की कानूनी और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
1020 करोड़ के घोटाले का मामला इसलिए बड़ा माना जा रहा है क्योंकि इसमें सरकारी टेंडरों, कथित रिश्वत संग्रह और राजनीतिक स्तर पर प्रभाव के गंभीर आरोप एक साथ जुड़े हैं। DVAC की FIR में K N Nehru और 12 अन्य लोगों को नामजद किया गया है। फिलहाल सामने आए आरोप जांच का विषय हैं और किसी भी आरोपी को अदालत से दोषी ठहराए जाने तक कानूनन निर्दोष माना जाता है। आगे की जांच में दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रिया और कथित रकम के लेनदेन से जुड़े सबूतों की अहम भूमिका होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इसमें शामिल भ्रष्टाचार और टेंडर में हेरफेर से जुड़े आरोप जांच एजेंसी के दावों पर आधारित हैं और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।