बागेश्वर बाबा की टिप्पणी से बवाल, मांसाहार पर गरमाई सियासत
बागेश्वर बाबा के बयान से बंगाली पहचान और खानपान का मुद्दा गरमाया, कांग्रेस ने पुलिस शिकायत कर कार्रवाई और माफी की मांग की, बीजेपी ने भी जताई आपत्ति।

बागेश्वर बाबा
कोलकाता, पश्चिम बंगाल। बागेश्वर बाबा के नाम से चर्चित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर की गई टिप्पणी अब पुलिस शिकायत तक पहुंच गई है। कांग्रेस नेता मनाश सरकार ने भवानीपुर थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया कि बागेश्वर बाबा की बात से बंगाली पहचान और भावनाएं आहत हुई हैं। शिकायत में कार्रवाई और माफी की मांग की गई है। विवाद ने धार्मिक आस्था के साथ बंगाली संस्कृति और खानपान को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। [1]
बयान पर बढ़ा विवाद
विवाद की वजह बागेश्वर बाबा की वह टिप्पणी बनी जिसमें उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान मछली और मांस खाने पर सवाल उठाया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने ऐसे लोगों को पाखंडी बताया और मांसाहारी भोजन को गंदा खाना कहा। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने विरोध जताते हुए इसे बंगाली संस्कृति का अपमान बताया। बागेश्वर बाबा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने वालों ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां सामाजिक सौहार्द पर असर डाल सकती हैं।
मनाश सरकार ने सवाल उठाया कि किसी दूसरे राज्य से आने वाला व्यक्ति आखिर बंगालियों के खानपान का फैसला कैसे कर सकता है। उन्होंने मछली, मटन और चिकन को बंगाली समाज की लंबे समय से चली आ रही खानपान परंपरा का हिस्सा बताया। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि बागेश्वर बाबा अपनी टिप्पणी पर माफी मांगें और शिकायत के आधार पर कानून के मुताबिक कार्रवाई हो। मामले को लेकर आगे भी विरोध की चेतावनी दी गई है।
बीजेपी ने भी जताई आपत्ति
विवाद बढ़ने पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी बागेश्वर बाबा की टिप्पणी से दूरी वाला रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग अपनी पसंद और परंपरा के मुताबिक भोजन करते हैं। उनके मुताबिक किसी साधु के कहने से बंगाल की खानपान परंपरा नहीं बदल सकती। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली समाज में अलग अलग दिनों पर बनने वाले पारंपरिक भोजन का भी उल्लेख किया।
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने भी लोगों की खानपान की स्वतंत्रता की बात कही। उन्होंने कहा कि देश में कई लोग शाकाहारी हैं लेकिन बंगाल में बड़ी संख्या में लोग परंपरागत रूप से मांसाहारी भोजन करते हैं। ऐसे में विवाद अब केवल एक धार्मिक टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। बागेश्वर बाबा के बयान ने बंगाली पहचान, व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक परंपरा के बीच टकराव की बहस को तेज कर दिया है।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट विश्वस्त समाचार एजेंसियों और स्रोतों से प्राप्त तथ्यों पर आधारित है। इसका प्रकाशन केवल सूचना के उद्देश्य से किया गया है। इसमें शामिल आरोप और शिकायतें संबंधित पक्षों के दावों के आधार पर प्रस्तुत की गई हैं और इन्हें अंतिम कानूनी निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। इस रिपोर्ट के आधार पर लिए गए किसी भी निर्णय के लिए लेखक, प्रकाशक एवं संपादक किसी भी रूप में उत्तरदायी नहीं होंगे।